खुद के कामों में पिछड़ा निगम, अब सिटीजन फीडबैक ही बड़ा सहारा

-सात सवालों के जवाब जानने के लिए कभी भी आ सकती है टीम, निगम डॉक्यूमेंट उपलब्ध कराने में सिर्फ 23 फीसदी अंक ही हासिल कर सका

By: Meghshyam Parashar

Published: 03 Jan 2020, 07:02 PM IST

भरतपुर. स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नगर निगम खुद के कामों में फेल हो चुका है। क्योंकि शहर की सफाई व्यवस्था से लेकर नौंह कचरा घर पर प्लांट लगाने तक का कार्य इस बार भी नहीं हो सका है। इसलिए अब सिटीजन फीडबैक के आधार पर ही अंकों में बढ़ोतरी ही सहारा बनी हुई है। शहरों को साफ-सुथरा बनाने के उद्देश्य से होने वाला स्वच्छता सर्वेक्षण चार जनवरी से शुरू हो रहा है। यह 30 जनवरी तक चलेगा। नगर निगम तो डॉक्यूमेंट उपलब्ध कराने में भी करीब 23 फीसदी ही अंक हासिल कर सका है। अब शहरवासियों के फीडबैक शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर नजर टिकी हैं। शहरवासी सात सवालों के सही जवाब देंगे तो सिटीजन फीड बैक के आधार पर हमें 1500 अंक मिल सकते हैं। केंद्र सरकार की टीम सात सवाल पूछकर पब्लिक फीडबैक लेने के लिए गुपचुप तरीके से आएगी। इस बार पब्लिक फीडबैक के अलावा सार्वजनिक शौचालयों व ठोस कचरा प्रबंधन के उचित प्रबंधों पर भी सवाल जवाब होंगे। जनता का फीडर बैक अच्छा रहे इसको लेकर अभी नगर निगम की ओर से कोई खास अभियान नहीं चलाया गया है। इस बार निगम अधिकारी स्थान का चयन कराने में मनमानी नहीं चला पाएंगे, क्योंकि टीम बिना बताए ही आएगी। अब तक निगम अधिकारी उन्हीं स्थानों का सर्वे करवा देेते थे, जहां सुधार होते थे। टीम के पास निगम का रिकार्ड ऑन होगा। उसी के आधार पर शहरवासियों का फीडबैक व स्थानों की जांच के आधार पर ऑनलाइन अंक दिए जाएंगे। नगर निगम आयुक्त नीलिमा तक्षक ने बताया कि लोगों को जागरूक किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक वार्ड में जाकर डोर टू डोर जाकर कचरा कलेक्शन की जानकारी देंगे। साथ ही स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत पूछे जाने वाले सातों सवालों की जानकारी प्रदान की जाएगी। कुछ स्थानों पर रैलियों का भी आयोजन किया जा रहा है।

अगर रैंकिंग में पिछड़ा निगम तो यह होंगे कारण

-नौंह का कचरा प्लांट पिछले चार साल से मजाक बना हुआ है। अफसरों के उचित पैरवी नहीं किए जाने के कारण यह प्लांट आज तक चालू नहीं हो सका है।
-शहर में पिछले तीन महीने से डोर टू डोर कचरा संग्रहण की योजना फेल होती जा रही है। ऑटो टिपर से नियमित कचरा संग्रहण नहीं हो पा रहा है।
-शहर की सफाई व्यवस्था आज भी 50 वार्डों के हिसाब से की जा रही है। जबकि नगर निगम में अब 65 वार्ड बन चुके हैं।
-शहर के सुलभ शौचालयों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उनकी सफाई पर व्यय तो किया जाता है, लेकिन सफाई सालभर में मुश्किल दो-चार दिन ही हो पाती है।
-नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ही खुद 90 प्रतिशत पार्षदों को ही मालूम नहीं है कि स्वच्छता सर्वेक्षण क्या है।
-स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर पिछले साल निगम ने थोड़ा बहुत प्रयास किया था। इस बार जागरुकता अभियान के नाम पर सिर्फ मौखिक ही भाषणबाजी की जा रही है। मतलब अभियान के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
-इस साल सफाई को लेकर कोई भी बड़ा अभियान नहीं चलाया गया है। जबकि हर साल दो दिन के लिए बड़ा अभियान चलाकर शहर में जागरुकता लाने का प्रयास किया जाता रहा है।

पांच तरीकों से तय किया जाएगा सिटीजन फीडबैक

केंद्रीय टीम के सदस्य बाजारों, गलियों व लोगों से बातचीत करेंंगे। लोगों के जवाबों को मोबाइल या टैब के माध्यम से ऑनलाइन फीड करेंगे। ताकि कोई बदलाव न हो सके। स्वच्छता एप, स्वच्छता हेल्पलाइन नंबर-1969 के बारे में जनता से बातचीत करेंगे। लोगों के मोबाइल पर फोन करके फीडबैक लिया जाएगा। स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में भरतपुर नगर निगम को देश में 279वीं और प्रदेश में 14वीं रैंक मिली थी। जबकि वर्ष 2018 में देशभर में 259 एवं प्रदेश में 16वीं रैंकिंग मिली थी। ये हालात तो तब हैं जब नगर निगम की ओर से शहर की सफाई पर हर महीने वेतन समेत सभी मदों में एक करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। शहर में 1100 सफाई कर्मी हैं जो आबादी के लिहाज से पर्याप्त हैं। फिर भी ठीक से सफाई नहीं हो रही है। फिलहाल भरतपुर की 235वीं रैंक चल रही है। जो कि सिटीजन फीडबैक के बाद किसी भी जगह जा सकती है।

आपसे ये 7 सवाल पूछे जाएंगे, सही जवाब देने सुधरेगी रैंकिंग

1. क्या सार्वजनिक शौचालय साफ हैं।
2. क्या डिवाडरों पर पेड़ पौधे लगे हैं।
3. क्या आपको स्वच्छता सर्वेक्षण के बारे में जानकारी है।
4. क्या गली मोहल्ले व बाजार साफ रहते हैं।
5. क्या आपके आस पड़ोस का क्षेत्र साफ रहता है।
6. क्या आपके शहर में ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) है।
7. क्या आपको जीएफसी (गारबेज फ्री सिटी स्टार रेटिंग) की स्थिति के बारे में जानकारी है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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