कलक्टर ने की मेयर व आयुक्त से समझाइश, नहीं बन सकी सहमति

-नगर निगम में विवाद का मामला

By: Meghshyam Parashar

Published: 26 Aug 2020, 08:05 PM IST

भरतपुर. नगर निगम में पिछले कुछ माह से चल रहा विवाद अभी समाप्त नहीं हो सका है। चूंकि मंगलवार देर शाम जिला कलक्टर नथमल डिडेल की ओर से दोनों के साथ बात की गई, लेकिन इसमें भी कोई हल नहीं निकल सका। मेयर ने जहां अधिकारी का तबादला नहीं होने तक विवाद का हल नहीं निकलने की बात कही। जबकि आयुक्त ने सभी आरोपों को निराधार बताया। इससे इस विवाद का निस्तारण नहीं हो सका है। उल्लेखनीय है कि जिला जाटव महासभा समिति की ओर से जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर नगर निगम में चल रही खींचतान के बारे में बताया गया था। इसमें नगर निगम प्रशासन व मेयर के बीच हो रहे विवाद के कारण शहर में विकास कार्य अवरुद्ध होने का दावा किया गया था। इसके बाद जिला कलक्टर ने एक-एक कर दोनों से वार्ता की थी। इधर, बुधवार को भी कुछ लोगों की ओर से मेयर से बात की गई है। इसमें कोई सफलता नहीं मिल सकी। बताते हैं कि मेयर अभिजीत कुमार जहां आयुक्त का तबादला नहीं होने तक अपने निर्णय पर डटे हुए हैं तो वहीं आयुक्त की ओर से सभी आरोपों को एक सिरे से खारिज कर कर चुकी हैं।


एक करोड़ रुपए तक के बिल पारित करने का आयुक्त को अधिकार

नगर निगम में पिछले कुछ माह से सियासी घटनाक्रम व विवाद के बीच अब एक और नया मामला सामने आया है। पिछले दिनों आयुक्त के स्तर पर ठेकेदारों के बिल पास करने के मामले को लेकर मेयर ने चुनौती दी थी। अब आयुक्त नीलिमा तक्षक ने पत्रिका को एक आदेश की प्रति भेजी है। यह पत्र निदेशालय स्थानीय निकाय राजस्थान जयपुर के निदेशक एवं विशिष्ट शासन सचिव ने भेजा है। इसमें कहा कि वांछित मार्गदर्शन के क्रम में लेख है कि राजस्थान नगरपालिका (सामग्री का क्रय एवं ठेका) नियम 1974 के नियम 14 (1) (क) (2) एवं राजस्थान नगरपालिका लेखा नियम 1963 के नियम सात एवं राजस्थान नगरपालिका अभिदायी भविष्य निधि एवं उपदान नियम 1969 के नियम 13 से स्पष्ट है कि आयुक्त नगर निगम को एक करोड़ रुपए तक की वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां प्रदत्त हैं। इसलिए आयुक्त नगर निगम एकलन हस्ताक्षर से एक करोड़ रुपए तक के बिल पारित कर आहरण करने के लिए चेक जारी करने के लिए सक्षम हैं। इसकी प्रति नगर निगम के मेयर को भी भेजी गई है।


-नगर निगम में एक करोड़ या उससे नीचे के ही काम होते हैं। पहले तक कुछ भुगतान की फाइल या एनआइटी स्वीकृति के लिए मेरे पास आ भी जाती थी, लेकिन यह सब गड़बड़ है। अगर कोई काम एक करोड़ रुपए से अधिक का भी होगा तो उसे दो टुकड़ों में बांट दिया जाएगा। इसका मतलब साफ है कि यह आदेश नगर निगम में भ्रष्टाचार में इजाफा करने की दिशा में उठाया गया कदम है। मेरी निष्ठा और कर्तव्य भ्रष्टाचार के खिलाफ है। मैं इसका विरोध करता रहूंगा।
अभिजीत कुमार
मेयर नगर निगम

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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