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दो साल बाद लगेगा झील का बाड़ा मेला, श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन

-कोरोना के कारण दो साल तक निरस्त रहा था मेला, बैठक में लिया निर्णय

भरतपुर

Published: March 11, 2022 02:05:22 pm

भरतपुर. कोरोनाकाल के निरस्त पंचायत समिति बयाना स्थित झील का बाड़ाा कैलादेवी मंदिर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला नवरात्रा मेला इस बार लगेगा। यह मेला दो साल से नहीं लग रहा था। अब यह एक से 16 अप्रेल तक लगेगा। लोक मान्यता है कि करौली स्थित कैला माता का मूलस्वरूप झील का बाडा मंदिर में है। माता की प्रतिमाएं प्राकट्य हैं। अर्थात इनका निर्माण नहीं किया गया, बल्कि पहाड़ों से स्वत: ही पैदा हुई है। इन्हें बाद में मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। इसलिए झील का बाड़ा कैलादेवी माता की भी पूर्वी राजस्थान सहित उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, गुजरात, दिल्ली में काफी मान्यता है और चैत्र माह में लगने वाले मेले में लाखों श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। मेले में करीब 20 हजार से ज्यादा मुंडन और जात अनुष्ठान होते हैं। मेले में करीब पांच लाख से ज्यादा लोग शिरकत करते रहे हैं। एडीएम प्रशासन बीना महावर की अध्यक्षता में संबंधित विभागों की मेला व्यवस्था संबंधी बैठक गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में हुई।
उन्होंने संबंधित विभागों को मेले अवधि के दौरान विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति की सुचारू व्यवस्था बनाए रखने एवं मेला स्थल पर नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मेला स्थल पर अग्निशमन वाहन एवं एंबुलेंस की व्यवस्था करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने पुलिस विभाग को मेला स्थल पर कानून व्यवस्था बनाए रखने एवं मंदिर के अंदर एवं बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस जाप्ता तैयार करने के निर्देश दिए। जिला स्तर पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी रखें तथा पवित्र कुंडों पर स्नान के समय फोटो खींचने पर प्रतिबंधित किया गया है। बैठक में देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त केके खण्डेलवाल ने बताया कि गत दो वर्षों से कोविड-19 के संक्रमण की परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए राज्य सरकार के निर्देशानुसार मेला स्थगित रखा गया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मेले की समस्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई है। बैठक में उपखण्ड अधिकारी बयाना विनीता स्वामी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बयाना राजेन्द्र वर्मा एवं तहसीलदार आदि उपस्थित थे।
दो साल बाद लगेगा झील का बाड़ा मेला, श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन
दो साल बाद लगेगा झील का बाड़ा मेला, श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन
वरिष्ठ साहित्यकार रामवीर वर्मा: अनोखा है झील का बाड़ा का इतिहास

वरिष्ठ साहित्यकार रामवीर सिंह वर्मा बताते हैं कि भरतपुर के दक्षिण-पश्चिम भाग में बयाना के पास झील का बाड़ा नामक स्थान पर कैलादेवी का विशाल परिसर है। इस प्राचीन मंदिर का पुर्नरुद्धार महारानी गिर्राज कौर ने कराया था और वर्तमान देवी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा वर्ष 1923 ई. में की गई। पूर्व महाराजा बृजेंद्र सिंह इसी मंदिर में अष्ठमी की पूजा करने जाया करते थे। यहां बड़ा लक्खी मेला लगता है जो कि नवरात्र से आरंभ होकर पूरे दिन तक चलता है, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से दो साल से नवरात्र में मेला नहीं लगा। रियासतकालीन समय में एक बहुत बड़ा शामियाना झील का बाड़ा में लगाया जाता था। जहां पर महाराजा बृजेंद्र सिंह जल्दी पहुंच कर प्रथम स्नान किया करते थे एवं पीताम्बरी पहन कर पूजा अर्चना करते थे। मंदिर में महाराजा के पूजा करने की विशेष व्यवस्था की जाती थी। पुलिस आदि का पूरा इंतजाम होता था। महाराजा मंदिर परिसर में बैठकर देवी की पूजा करते थे। उसी समय मंदिर परिसर में देवी के भक्त जो भोपा नाम से जाने जाते हैं, अपना नाच व गायन प्रस्तुत करते थे। देश की अन्य देवियों की तरह महाराजा बली चढ़ा कर उन भोपों को इनाम देते थे। शामियाने के पीछे अलग एक कक्ष बनाया जाता था। उसमें दोपहर का सादा भोजन होता था। उसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों से आए गायक भजन प्रस्तुत करते थे। शाम की आरती करने के बाद महाराजा वापस भरतपुर अपने महल में आ जाते थे। इस प्रकार मेले में जाने से उनका जनसंपर्क बढ़ता था और साथ ही अनुष्ठान होते थे।

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