नवाचार: प्राकृतिक खेती कर मुनाफा ही नहीं कमाया प्रदेशभर में नाम

-गांव पना की महिला विरमादेवी मीणा के परिवार ने किया सपना साकार, बगैर कीटनाशक दवा व रासायनिक खाद के कर रही सब्जी व फलों की खेती

By: Meghshyam Parashar

Published: 16 Sep 2020, 09:40 AM IST

भरतपुर. जिले के भरतपुर-बयाना सड़क मार्ग पर पना गांव के पास कमल मीणा परिवार ने 16 बीघा कृषि फार्म में विभिन्न प्रकार के फल व फूलदार, औषधिय व सब्जियों और खाद्यानों की फसलें लगाकर किसानों के लिए समन्वित कृषि का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। उसने अपनी खेती में रासायनिक खादों व कीटनाशक दवाओं के स्थान पर प्राकृतिक कृषि विधि को अपनाया जा रहा है। ताकि खाद्य पदार्थों में विषैले तत्वों का समावेश नहीं हो सके। क्षेत्र में कमल मीणा के इस कृषि फार्म को लोग मिनी कृषि विश्वविद्यालय के नाम से अधिक जानते हैं। इस मिनी कृषि विश्वविद्यालय को प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में निहारने आते हैं ताकि वे इन विधियों को अपने खेतों पर अपनाकर आमदनी बढ़ा सकें।
कमल मीणा यद्यपि सरकारी सेवा में है जब उसने सेवा के दौरान पंजाब, हरियाणा एवं दक्षिणी राज्यों का भ्रमण किया तो वहां देखा कि किसान परम्परागत खेती के स्थान पर अधिक आय देने वाली औषधीय, फल-फूलों व सब्जियों की खेती कर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। इसी तर्ज पर उसने अपने खेतों मेें अधिक आय देने वाली फसलें लगाने का मन बनाया इसे भरतपुर की स्वयंसेवी संस्था ने तकनीकी जानकारी दी और उन्नत किस्म के फल व फूलदार पौधे तथा खाद्यानों के बीज मुहैया कराए। उसने अपने फार्म की चारों ओर की करीब आठ फुट ऊंची दीवार बनाई ताकि फार्म में लगाई जाने वाली फसलें सुरक्षित रह सकें।

लखनऊ से ललित व कलकत्ता से थाई किस्म के अमरूद के पौधे लगाए

पना गांव के सड़क के किनारे बने कृषि फार्म में कमल मीणा ने मलियाबाद लखनऊ से ललित, कलकत्ता से थाई सात, सवाईमाधोपुर से बर्फ खांन व धवन किस्मों के अमरूद के पौधे लाकर लगाए। यद्यपि ये पौधे अभी डेढ़ साल के हैं जब वे डेढ़ वर्ष फल देने लगेंगे तो निश्चय ही उसे करीब पांच लाख रुपए की आमदनी शुरू हो जाएगी। इसी प्रकार उसने पुष्कर से जामुन, सउदी अरब से खजूर के पौधे मंगाकर लगाए और काजरी से बेर के रेड कश्मीरी एपल किस्मों के एवं नींबू के सीडलैस व कागजी किस्मों के पौधे मंगवाकर अपने फार्म हाउस में लगाए। इसके अलावा कमल मीणा ने अपने फार्म में आंवला, अनार, चीकू, शहतूत, सहजन, कचनार, अमलतास के अलावा इमारती लकड़ी व सजावटी किस्मों के सागवान, नीम, फाइकस, मछलीपाम, पाम, अर्जुन, शीशम, कचनार, बांस आदि के पौधे लगाए हैं।

फूलदार पौधों से महका फार्म

कृषि फार्म में गुलाब, गैंदा, मोरपंखी, बारहमासी सहित विभिन्न किस्मों के फूलदार पौधे लगाए हैं इससे पूरा फार्म हाउस महक रहा है। इन फूलों की बिक्री से कमल मीणा के परिवार को प्रतिमाह करीब आठ से 10 हजार रुपए की आमदनी अतिरिक्त प्राप्त हो रही है। कमल मीणा ने अपने कृषि फार्म पर गेंहू की देशी किस्म के बंशी, काली मूंछ वाला, बोधका एवं काला प्रजाति के गेंहू और देशी किस्म के चना व मसूर की बुवाई की है। वहीं सब्जियों में मिर्च, बैंगन, टमाटर, गाजर, मैथी, मटर, पालक, धनियां, बथुआ, पत्तागोभी, फूलगोभी, लहसुन व प्याज के साथ गन्ना भी लगा रखा है। इन सभी फसलों में रासायनिक खादों व कीटनाशक दवाओं के स्थान पर जैविक खाद व डॉ. सुभाष पालेकर द्वारा विकसित की गई प्राकृतिक कृषि विधि को अपनाया जा रहा है। सब्जियों एवं खाद्यान्न की बिक्री से उसे प्रतिवर्ष तीन से चार लाख रुपए की आमदनी प्राप्त हो रही है। कृषि फार्म में करीब आधा एकड़ भूमि में औषधिय फसल सतावर लगाई। इनकी जड़ों की बिक्री से उसे आसानी से छह लाख रुपए की आय प्राप्त हो गई। वह अपने फार्म में अन्य औषधिय पौधे भी इस वर्ष लगाएगा। इसके लिए भूमि तैयार कर ली है। उन्होंने फार्म हाउस में गिर नस्ल की गाय एवं मुर्रा नस्ल की भैंसें पाल रखी हैं इन्हें हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए बरसीम व कांचनी भी फार्म हाउस में लगा रखी है। दुग्ध विक्रय से उसे प्रतिदिन 800 से 1000 रुपए की आमदनी प्राप्त हो रही है। फार्म हाउस के बाहर वह शीघ्र आउटलेट बनाएगा ताकि कृषि फार्म में उत्पादित साग सब्जियां, फल फूल व दूध आदि का विक्रय कर सके ताकि लोगों को कीटनाशक व रासायनिक खादों से मुक्त शुद्ध उत्पाद प्राप्त हो सकें।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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