scriptDistrict of five ministers, yet the game of commission in the hospital | पांच मंत्रियों का जिला...फिर भी अस्पताल में कमीशन का खेल | Patrika News

पांच मंत्रियों का जिला...फिर भी अस्पताल में कमीशन का खेल

-जिले के सबसे बड़े जनाना अस्पताल व आरबीएम अस्पताल में जांच के नाम पर कमीशनखोरी, मरीजों को निजी सेंटरों पर भेज रहे

भरतपुर

Updated: February 23, 2022 04:30:45 pm

भरतपुर. कहने को तो भरतपुर को प्रदेशभर में पांच मंत्रियों वाले जिले के रूप में जाना जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि इतने मंत्री होने के बाद भी जिले के सबसे बड़े जनाना अस्पताल व संभाग के सबसे बड़े आरबीएम अस्पताल में व्यवस्थाओं के नाम पर मरीजों को ठगा जा रहा है। भले ही व्यवस्थाओं को सुधारने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि कमीशनखोरी व दलाली के बीच जांच के नाम पर मरीजों के साथ धोखा किया जा रहा है। जहां जनाना अस्पताल में सोनोग्राफी की जांच दोपहर एक बजे तक होने के कारण उन्हें निजी सेंटरों पर जाना पड़ रहा है तो वहीं अन्य जांचों के लिए निजी लैब सेंटरों ने अस्पतालों में दलालों को छोड़ रखा है। यही कारण है कि इस मामले में आरबीएम अस्पताल भी पीछे नहीं है। नमक कटरा निवासी मंजू आरबीएम अस्पताल में उपचार के लिए पहुंची, जहां डॉक्टर ने कुछ जांच लिख दी। जब वह जांच कराने पहुंची तो वहां एक नर्सिंगकर्मी ने कहा कि निजी लैब पर जाकर जांच करा लीजिए। इतना ही नहीं यहां हर दिन इसी तरह के मामले सामने आते हैं। जनाना अस्पताल में दोपहर एक बजे बाद सुरक्षा गार्डों के माध्यम से मरीजों को निजी सोनोग्राफी सेंटरों जांच के लिए भेजा जाता है। जहां से उनका कमीशन जुड़ा होता है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने २० फरवरी को दलाली के दलदल में जांच, प्रशासन से परे सांच, २१ फरवरी को बंटी ने कहा था कि वहां चले जाना, जल्द हो जाएगी सोनोग्राफी व २२ फरवरी को महिलाओं का दर्द...दो घंटे तक कतार में लगने के बाद भी नहीं हो सकी सोनोग्राफी शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामले का खुलासा किया था।
पांच मंत्रियों का जिला...फिर भी अस्पताल में कमीशन का खेल
पांच मंत्रियों का जिला...फिर भी अस्पताल में कमीशन का खेल
बड़ा सवाल...सालों से हो रही मांग, जिम्मदारों ने साधी चुप्पी

बड़ा सवाल यह है कि जिलेभर से आने वाली महिला मरीजों की पीड़ा को लेकर जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी कितनी चिंता कर रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सालों से जनाना अस्पताल में सोनोग्राफी समय दोपहर एक बजे बाद करने की मांग की जा रही है, लेकिन इसके बाद भी किसी ने ध्यान तक नहीं दिया है। संभाग मुख्यालय होने के बाद भी इस तरह की समस्याओं का निराकरण नहीं होना भी जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।

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