नवाचार: प्रत्येक पंचायत में होंगे दो सरसों फार्म स्कूल

-जिला कलक्टर ने बैठक में दी जानकारी

By: Meghshyam Parashar

Published: 25 Sep 2020, 03:00 PM IST

भरतपुर. जिला कलक्टर एवं आत्मा शाषी परिषद के अध्यक्ष नथमल डिडेल ने कहा कि कृषक नवीन तकनीकी से जोड़कर एवं विकसित कृषि उपकरणों की सहायता से परम्परागत खेती के साथ ही उद्यानिकी एवं पशुपालन के सहयोग से अपने उत्पादन एवं आय में वृद्धि कर अपने जीवन स्तर में सुधार लाएं।
आत्मा शाषी परिषद के अध्यक्ष डिडेल गुरुवार को राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय परिसर में आयोजित जिले में फार्म स्कूलों के आदान वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से वित्त वर्ष 2020-21 में आत्मा योजना के तहत जिले में 20 फार्म स्कूलों के आयोजन के लिए लक्ष्य प्राप्त हुए हैं। तद्नुसार प्रत्येक पंचायत समिति में दो-दो फार्म स्कूलों का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। आत्मा शाषी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार जिले की मुख्य फसल सरसों फसल के फार्म स्कूलों के आयोजन को प्राथमिकता दी जाएगी तथा ये फार्म स्कूल, सरसों अनुसंधान निदेशालय सेवर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित किए जाएंगे ताकि इस राष्ट्रीय स्तरीय अनुसंधान निदेशालय पर कार्यरत वैज्ञानिकों की ओर से विकसित की गई आधुनिक तकनीकों का लाभ जिले के सरसों उत्पादक किसानों को मिल सके, साथ ही फसल विविधीकरण को ध्यान में रखते हुए जिले में उद्यानिकी फसलों के पांच फार्म स्कूल, इसमें तीन फार्म स्कूल सौंफ फसल के तथा दो फार्म स्कूल बैंगन की फसल के भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को प्रायोगिक तौर पर खेतों पर ही तकनीकी जानकारी मिल सकेगी जिससे उनको व्यवहारिक रूप से किसी प्रकार की तकनीकी से वंचित न रहें।

स्कूलों में चयनित किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

आत्मा के परियोजना निदेशक ने फार्म स्कूलों के आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए अवगत कराया कि सरसों अनुसंधान निदेशालय की ओर से चयनित किसानों को जिले में विभागीय सिफारिशों के अनुसार प्रत्येक फार्म स्कूल के लिए निर्धारित राशि की सीमा में नि:शुल्क आदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आदानों की कीमत निर्धारित राशि से अधिक होने पर शेष राशि किसान को स्वंय वहन करनी पड़ेगी। इन फार्म स्कूलों पर फसल की बुवाई से लेकर कटाई होने तक समय-समय पर खेत में लगी हुई फसल पर ही गांव के चयनित 25 प्रगतिशील किसानों को फसल के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा और वैज्ञानिकों की ओर से मौके पर ही किसानों की समस्याओं तथा जिज्ञासाओं का समाधान किया जाएगा। इस तरह से किसानों को उनके गांव तथा खेत पर ही फसलों के बारे में आधुनिक तकनीक की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और किसान मौके पर ही व्यावहारिक रूप से फसलोत्पादन की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों को ना केवल सरसों की वैज्ञानिक खेती की जानकारी मिलेगी, बल्कि उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी, किसानों में जागरुकता आएगी और अंतत: किसानों को अपनी आमदनी बढ़ाने, दोगुना करने हेतु सफलता की राह पर आगे बढऩे का अवसर मिलेगा। सरसों अनुसंधान निदेशालय सेवर फार्म के प्रधान वैज्ञानिक (प्रसार शिक्षा) डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि आत्मा परियोजना द्वारा आवंटित राशि में से निर्धारित 20 फार्म स्कूलों के आयोजन के बाद शेष राशि से 5 अतिरिक्त फार्म स्कूलों का आयोजन किया जाएगा। इस प्रकार कुल आवंटित 25 फार्म स्कूलों का आयोजन किया जाएगा। केन्द्र के मृदा वैज्ञानिक, शस्य वैज्ञानिक, कीट वैज्ञानिक, पौध व्याधि वैज्ञानिक तथा अन्य सम्बन्धित वैज्ञानिकों की ओर से खेतों पर ही जाकर उपस्थित किसानों को फसलोत्पादन की विभिन्न अवस्थाओं, जैसे कि मिट्टी पानी की जांच, खेत की तैयारी, खाद बीज की मात्रा तथा इनके उपयोग की वैज्ञानिक विधि फसल में लगने वाले कीढों तथा बीमारियों की पहचान, बचाव के लिए प्रबन्धन तथा उपचार के बारे में जानकारी देते हुए प्रशिक्षण दिया जाएगा। आत्मा परियोजना के सहायक निदेशक गणेश मीणा ने कहा कि भरतपुर जिले में सरसों की खरीद तेल की मात्रा के आधार पर होती है, इसलिए प्रशिक्षण में मुख्य रूप से सरसों में तेल की मात्रा तथा गुणवत्ता बढाने के लिए ध्यान दिया जायेगा।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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