तीसरे दिन भी रहा पलायन, प्रशासन की सख्ती

भरतपुर. देश में लॉक डाउन भले ही चल रहा हो, लेकिन हाई-वे पर इसकी दूसरी कहानी बयां कर रहे हैं।

By: rohit sharma

Published: 30 Mar 2020, 07:56 PM IST

भरतपुर. देश में लॉक डाउन भले ही चल रहा हो, लेकिन हाई-वे पर इसकी दूसरी कहानी बयां कर रहे हैं। इसमें राजस्थान के विभिन्न शहर और गुजरात समेत अन्य प्रदेशों से भरतपुर पहुंच रहे कामगारों की संख्या ने जिला प्रशासन के हाथ-पैर फूला दिए हैं। इस बीच गृह मंत्रालय के नाराजगी जताने के बाद सोमवार को जिला कलक्टर व एसपी लॉक डाउन की पालना कराने स्वयं हाई-वे पर दिखे।

यहां पर उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को पूर्ण रूप से लॉक डाउन की पालना कराने के निर्देश दिए। इस बीच सुबह के समय से ही आगरा-जयपुर व भरतपुर-मथुरा मार्ग पर बाहर से आने वाले श्रमिक और उनके परिवारों का आना बरकरार रहा। हालांकि, अंतराज्जीय बॉर्डरों को सील कर दिया है, लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग निकलते हुए दिखे। जबकि वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। उधर, जिला प्रशासन ने बाहर से आने वाले इन लोगों को स्थानीय इलाके में ठहराने की व्यवस्था करने की बात कही है। वहीं, रोडवेज की तीन बसों ने सुबह ऊंचा नगला बॉर्डर तक फेरे किए, उसके बाद इस सर्विस को भी बंद दिया गया।

गौरतलब रहे कि लॉक डाउन के बीच पिछले दो दिन से जयपुर की ओर से बड़ी संख्या में कामगार उत्तरप्रदेश जाने के लिए जिले की सीमा में प्रवेश किया। इसी तरह दिल्ली की ओर से उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश जाने वाले लोग मथुरा के रास्ते पहुंचे। घर वापस लौटने वालों की संख्या बड़ी तादात में थी। जिस पर प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों की ओर से इन्हें पानी और भोजन के पैकेट्स उपलब्ध करवाए गए।


कोरोना वायरस को लेकर मुख्य सचिव ने वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए जिले संभागीय आयुक्त चंद्रशेखर मूथा व जिला कलक्टर नथमल डिडेल से वार्ता की। वीसी में मुख्य सचिव में लॉक डाउन की पूर्ण पालना कराने के आदेश दिए। उसके बाद आला अधिकारी हरकत में दिखे और ऊंचा नगला बॉर्डर पर पहुंच जानकारी ली और बाहर से आने वालों को प्रवेश को रुकवाया।


लॉक डाउन को लेकर दो दिन से जहां बाहर से आ रही श्रमिक आसानी से ऊंचा नगला बॉर्डर से निकल रहे थे। लेकिन मंगलवार को यूपी बॉर्डर पर सख्ती दिखी। जयपुर की तरफ सुबह के समय जाने वाले लोगों को रोक दिया गया। इस बीच जायजा लेने पहुंचे जिले के उच्चाधिकारियों से भी यूपी के अधिकारियों से हल्की बहस हो गई। हालांकि, दोनों ओर से लॉक डाउन का पूर्ण पालना कराने पर सहमति हो गई।


कामगारों को यूपी बॉर्डर ऊंचा नगला और धौलपुर तक छुड़वाने के लिए रोडवेज की बसों ने बीते दो दिन में करीब 55 से 60 फेरे लगाए। जबकि सोमवार सुबह तीन बसों ने भरतपुर से ऊंचा नगला के बीच एक-एक फेरा लगाया। बाद में बस संचालन बंद के आदेश के बाद सभी बसों को डिपो में खड़ा करवा दिया। भरतपुर डिपो के चीफ मैनेजर अवधेश ने बताया कि शनिवार-रविवार को डिपो की बस दौसा के महवा से जिले के यूपी बॉर्डर ऊंचा नगला तक चली है। इसके अलावा खेरली और भरतपुर से धौलपुर तक बस संचालित कर लोगों को छुड़वाया गया है। उन्होंने मुख्यालय से संचालन बंद करने के आदेश पर बसों को वापस डिपो में बुला लिया गया है।


कामगारों से बड़ी संख्या में सड़कों पर आने की मुख्य वजह जयपुर व दौसा प्रशासन की ओर से इन्हें जहां की तहां नहीं रोकना सामने आया है। नरमी की वजह से ये कामगार भरतपुर जिले तक पहुंच गए। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने इन्हें बॉर्डर तक पहुंचवा दिया। लेकिन शनिवार को यूपी प्रशासन की ओर से इन श्रमिकों को गतन्व तक पहुंचाने में रूचि नहीं दिखाई। यह पैदल ही यूपी सीमा में जाते रहे। कामकारों को रोकने के लिए प्रशासन मुख्य सचिव की वीसी के बाद सख्त दिखा।


जिले की सीमा मुख्यतय हरियाणा के नूंह मेवात और उत्तरप्रदेश के आगरा व मथुरा जिले से लगती है। इसमें नूंह मेवात के पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका व बिछौर पुलिस थाने से लगती है। इससे जिले के पहाड़ी, जुरहरा और गोपालगढ़ थाने लगे हुए हैं। वहीं मथुरा जिले से फरह, गोवर्धनख्, मर्गोरा, बरसाना, कोसी थाने से जिले के कामां, शहर के उद्योगनगर थाने की सीमा लगी हुई है।

जबकि आगरा जिले के बसई जगनेर, जगनेर, खेरागढ़, फतेहपुरसीकरी, अछनेरा की सीमा जिले के चिकसाना, रूपवास, रुदावल व उद्योगनगर थाने की लगी हुई है। भरतपुर जिला पुलिस अधीक्षक हैदर अली जैदी का कहना है कि जिले के सभी बॉर्डर सील कर दिए हैं। बाहर से आ रहे लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। जो लोग आ रहे हैं, उन्हें जिला प्रशासन स्थानीय स्तर पर ठहराने की व्यवस्था करेगा।

rohit sharma Reporting
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