पिता ने संजोया सपना, बेटी ने किया साकार

- कठिन परिश्रम से हर मंजिल पाना आसान

By: Meghshyam Parashar

Published: 07 Mar 2021, 11:27 AM IST

भरतपुर. किसी भी स्वर्णिम सफर की राह इतनी आसान नहीं होती। चांद तक पहुंचने वाली बेटियों ने भी सामाजिक बेडिय़ों को तोड़कर यह मुकाम हासिल किया है। बुलंद इरादों के बलबूते हर मुकाम को पाना मुमकिन है। सामाजिक ताने-बाने के बीच महिलाएं शिक्षा को अपना हथियार बनाकर अपने सपनों को साकार कर सकती हैं। यह कहना है अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) बीना महावर का।
पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहीं बीना बताती हैं पिता की चाह प्रशासनिक अधिकारी बनने की थी, लेकिन उनका यह सपना पूरी नहीं हो सका। इसको लेकर घर में यदा-कदा यह चर्चा होती रहती थी। पिता की मंशा को भांपकर मैंने किशोर अवस्था में ही प्रशासनिक अधिकारी बनने की ठान ली थी। बीना आठवीं और 10वीं कक्षा में जिला टॉपर बनीं। वहीं 12वीं में अपनी श्रेणी में अव्वल रहीं। बीना कहती हैं कि मन में एक ही धुन सवार थी कि सिविल सर्विसेज में जाना है। इसके लिए मैं जोश और जुनून के साथ इसमें जुट गई। पहले प्रयास में आरपीएस में चयन हुआ, लेकिन मन अभी भी प्रशासनिक सेवा में जाने का था। दूसरे प्रयास के बीच मैंने ज्योग्राफी में पीजी कर ली। साथ ही आरपीएस के लिए भी दो माह की ट्रेनिंग हो गई। दूसरे प्रयास में वह आरएएस बन गईं। यह वह क्षण था जब मैं पापा के सपने को पूरा करने पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही थी। बीना की प्रथम पोस्टिंग भरतपुर में एसीएम के पद पर हुई। इसके बाद वह नगरपरिषद आयुक्त, एसडीएम एवं डीएसओ आदि पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

महिलाएं खुद को बनाएं सशक्त

बीना कहती हैं कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा सरकार दे रही है, जबकि यह नारा हर महिला के जेहन में होना चाहिए। एक महिला ही महिला को बेहतर तरीके से समझ सकती है। समाज में बदलाव के लिए दहेज और कन्या भू्रण हत्या जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करना होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए अपनी मंजिल को प्राप्त करने का सबसे आसान तरीका शिक्षा है। महिलाएं शिक्षित होकर खुद को सशक्त बना सकती हैं। एक पढ़ी-लिखी नारी हर चुनौती से पार पा सकती है।

मिलता है सुकून

एडीएम बीना महावर कहती हैं कि अफसर का काम योजनाओं से लोगों को लाभान्वित करना होता है। मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है। वह कहती हैं कि हालांकि सभी काम कानून के दायरे में होते हैं, लेकिन जब कहीं बाहर कोई व्यक्ति अभिवादन इसलिए करता है कि उसका काम सहज तरीके से समय पर हो गया तो मन को खासा सुकून मिलता है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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