हाइकोर्ट का डर या...प्रशासन के आंतरिक समझौते का खेल!

- जिंदल हॉस्पिटल से राशि वसूली का मामला, अब खड़े हो रहे प्रशासन के आंतरिक समीकरण पर सवाल

By: Meghshyam Parashar

Published: 20 May 2021, 01:59 PM IST

भरतपुर. पीएम केयर फंड के सरकारी वेंटीलेटरों को निजी जिंदल हॉस्पिटल को देने के मामले में प्रशासन की कार्रवाई का गणित 'महज खानापूर्ति या अब भी मेहरबानी पर आकर अटक गया है। वजह, अभी तक न तो जिंदल हॉस्पिटल से सरकारी वेंटीलेटरों का किराया वसूला गया है और न ही मरीजों से वसूली गई पूरी राशि ही हॉस्पिटल से ली है। यूं तो जांच कमेटी ने राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के नाम जिंदल हॉस्पिटल से एक लाख 62 हजार रुपए का चेक ले लिया है, लेकिन यह महज खानापूर्ति ही नजर रही है।
आरबीएम चिकित्सालय प्रशासन ने जिंदल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को प्रशासन की अनुशंसा पर करीब 27 अप्रेल को पांच तथा 6 मई को 5 वेंटीलेटर उपलब्ध कराए थे। इसके लिए आरबीएम प्रशासन ने सात मई को जिंदल हॉस्पिटल को पत्र लिखकर किराया जमा कराने की बात कही गई। जिंदल अस्पताल को यह वेंटीलेटर संक्रमण की स्थिति में मरीजों के हित को देखते हुए चिकित्सकीय कमेटी की अनुशंसा पर जिला कलक्टर के अनुमोदन के बाद आम आदमी की जीवन रक्षा के लिए प्रति वेंटीलेटर किराया दो हजार प्रतिदिन की दर पर दिए गए। इनका किराया राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी में जमा कराने को कहा था। अब यदि किराये की बात की जाए तो 27 अप्रेल एवं 6 मई को दिए गए वेंटीलेटरों का राज्य सरकार की 11 मई को आई गाइड लाइन तक 20 दिन का किराया दो लाख रुपए होता है, लेकिन अभी तक जिंदल हॉस्पिटल की ओर से एक भी पैसा किराये के रूप में जमा नहीं कराया है। खास बात यह है कि प्रशासन ने भी जांच में यह माना है कि जिंदल हॉस्पिटल ने प्रति मरीज से वेंटीलेटर के नाम पर 9 हजार रुपए की वसूली की। अब यदि जिंदल हॉस्पिटल की ओर से प्रतिदिन 9 रुपए के हिसाब से मरीजों से की गई वसूली को देखा जाए तो 10 वेंटीलेटरों का 20 दिन चार्ज करीब 18 लाख रुपए होता है। हालांकि अब भी इस प्रकरण को लेकर आमजन सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि यह मेहरबानियों का गणित शुरू से लेकर अंत तक खत्म होने वाला नहीं है। क्योंकि इस मेहरबानी के पीछे सत्ता, शासन और..., जो भी दोषी हैं, उनके नाम जब तक सामने नहीं आएंगे, तब तक इन घोटाले का खुलासा नहीं हो पाएगा।

वसूली है तो आरएमआरए को क्यों?

प्रशासन ने मरीजों से वसूली गई मनमानी कीमत के जिंदल हॉस्पिटल से 1 लाख 62 हजार रुपए लिए हैं। इस राशि का चेक राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी को दिया गया है। यदि यह राशि बतौर जुर्माना वसूल की गई है तो इसका पैसा सोसायटी को क्यों दिया गया है, जबकि आरएमआरएस को नियमानुसार किराये की राशि दी जानी चाहिए। इस पर प्रशासन ने अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। इससे स्पष्ट है कि हाइकोर्ट में जबाव देकर खानापूर्ति करने व आमजन को गुमराह करने की कार्रवाई यहां पर कहीं न कहीं जिला प्रशासन के दबाव में आकर अमल में लाई गई है। चूंकि यह भी सवाल खड़ा होता है कि अभी तक इस मामले को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। जबकि सारा खेल उन्हीं माननीय की सह पर ही किया गया है। पहले जो वेंटीलेटर देने को खुद की पहल बता रहे थे, वह अब जुर्माना मानकर यह तो साबित कर चुके हैं कि उनसे कहीं न कहीं गल्ती हुई है, लेकिन अब बोलने से पीछे हट रहे हैं।

हाईकोर्ट में सुनवाई आज

सरकारी वेंटीलेटरों को शहर के जिंदजल हॉस्पिटल को देने के मामले में दाखिल हुई पीआईएल पर अब सुनवाई गुरुवार को जयपुर उच्च न्यायालय में होगी। मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल एवं हिना गर्ग ने बताया कि विजय गोयल की पीआईएल पर बुधवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन अब यह सुनवाई गुरुवार को होगी। इसमें भारत सरकार, राजस्थान सरकार, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा विभाग, जिला कलक्टर भरतपुर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिंदल हॉस्पिटल को नोटिस जारी किए हैं।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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