आतिशबाजी पर अंकुश, खुशियों के खजाने हुए खोखले

- आंगन में खुशियों बिखेरने वालों की दिवाली हुई बेनूर
- पहले एनसीआर की पटकनी, अब कोरोना ने किया कबाड़ा

By: Meghshyam Parashar

Published: 11 Oct 2021, 02:22 PM IST

भरतपुर. दीपावली के त्योहार पर जब लोगों के आंगन में आतिशबाजी झिलमिलाती थी तो उनके घर भी खुशियों की बौछार होती थी, लेकिन अब यह बीते वक्त की बात हो चली है। एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) ने भरतपुर को अब तक खुशियों की कोई बड़ी सौगात तो नहीं दी, लेकिन दीपावली को रंगीन करने वाले आतिशबाजी व्यवसायियों का 'दिवाला सा निकाल दिया है। एनसीआर की मार झेल इस व्यवसाय का अब कोरोना ने कबाड़ा सा कर दिया है। आतिशबाजी फैक्ट्रियों पर लटके ताले इसकी गवाही दे रहे हैं। आलम यह है कि जिनके दम से दिवाली दमकती थी, उनके आंगन अब बेनूर नजर आ रहे हैं।
एनसीआर में शामिल होने के बाद भरतपुर के इस व्यवसाय को ग्रहण लग गया। तमाम बंदिशों के बीच भी यह कारोबार घिसट रहा था, लेकिन दो साल पहले कोरोना ने इस व्यवसाय को पूरी तरह समेट दिया। ऐसे में इस व्यवसाय से जुड़े व्यापारी और मजबूर फांकाकशी की जिंदगी बसर करने पर मजबूर हो रहे हैं। अकेले भरतपुर की बात करें तो यहां आतिशबाजी का व्यापार चार से पांच करोड़ रुपए का था। अब पिछले तीन साल से फैक्ट्रियों के ताले तक नहीं खुल सके हैं। अमूमन एक फैक्ट्री में 40 से 50 लाख का कच्चा माल पड़ा है, जो सडऩे के कगार पर है। इनमें सूंतली, गत्ता, एल्मुनियम पाउडर एवं कैमिकल आदि शामिल हैं। एनसीआर से पहले होली के त्योहार के बाद चटक धूप खिलते ही इन फैक्ट्रियों में खुशियों का कारोबार शुरू हो जाता था, जो दीपावली तक चलता था, लेकिन अबकी बार यहां सिर्फ सन्नाटा पसरा है। लोगों की चहल-कदमी से आबाद इन परिसरों में अब झाडिय़ां उग आई हैं। आलम यह है कि खुशियों के इस कारोबार में अब सिर्फ मायूसी ही नजर आ रही है।

1000 लोगों के परिवार हुए बेरोजगार

भरतपुर में आशितबाजी कारोबार की बात करें तो यहां आतिशबाजी बनाने वाली तीन से चार फैक्ट्री हैं। यहां काम करने वाले श्रमिक, यहां से आतिशबाजी खरीदने वाले दुकानदार, माल पहुंचाने एवं माल लाने वाले लोगों की बात करें तो करीब एक हजार लोगों के परिवार का पालन इस व्यवसाय से हो रहा था, लेकिन अब यह बेरोजगार हो गए हैं और दूसरी जगह अन्यत्र मजदूरी करने पर मजबूर हैं। आलम यह है कि ऐसे श्रमिक होली के बाद से ही इन व्यवसायियों के पास काम मांगने पहुंच रहे हैं, लेकिन इन्हें यहां से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। अब उन्होंने परिवार की गुजर-बसर के लिए दूसरा काम तलाशा है।

बेरियम पर रोक, लेकिन यहां सब कुछ बंद

आतिशबाजी के कारोबार से जुड़े व्यवसायी बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई है, जो अत्यधिक प्रदूषण करते हैं। इनमें मुख्य रूप से 'बेरियम नाइट्रेट से तैयार होने वाले पटाखों पर रोक है, जबकि भरतपुर में ग्रीन पटाखों का निर्माण होता है। आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी करने वाले पटाखे बेरियम नाइट्रेट से तैयार होते हैं, जो यहां नहीं बन रहे। व्यापारी बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री पर रोक नहीं लगाई है, जबकि राज्य सरकार ने सब कुछ ही बैन कर दिया है। ऐसे में इस कारोबार से जुड़े व्यापारी परेशान हैं। व्यापारी कहते हैं कि दिल्ली में अत्यधिक प्रदूषण की वजह से मुख्यमंत्री ने केवल दिल्ली में पटाखा बिक्री पर रोक लगाई है, जबकि गाजियाबाद एवं फरीदाबाद में यह रोक नहीं है, लेकिन राजस्थान में कोरोना की आड़ में सब कुछ बंद कर दिया है। इससे यह कारोबार पूरी तरह चौपट हो गया है।

बढ़ रहा गैरकानूनी व्यापार

व्यापारियों ने बताया कि राजस्थान में पटाखा निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध ने गैर कानूनी व्यापार को बढ़ावा दिया है। भरतपुर की सीमा से लगते उत्तरप्रदेश के आगरा में यह कारोबार खूब फल-फूल रहा है। खास तौर से भरतपुर की सीमा से सटे अछनेरा में इसकी फैक्ट्रियां लगी हैं। इसके चलते गैर कानूनी रूप से लोग वहां से पटाखे ला रहे हैं। इससे सरकार को राजस्व की हानि हो रही है। वहीं यह दुर्घटना का कारण भी बनता नजर आ रहा है।

यह बोले व्यापारी

लाइसेंस की फीस जमा करा चुके हैं, जो वर्ष 2023-24 तक की है। साथ ही फैक्ट्रियों में कच्चा माल भरा पड़ा है। पिछले चार साल से व्यापारी आहत हैं। अब तक जमा पूंजी से काम चल रहा है। बच्चों की पढ़ाई सहित अन्य खर्चे हैं, जो काम बंद होने से पूरे नहीं हो पा रहे हैं। कर्ज में डूबते जा रहे इस कारोबार से जुड़े व्यापारी अब अन्य काम-धंधे की तलाश में हैं, जिससे परिवार का पालन-पोषण हो सके।
- अमित चंदानी, आतिशबाजी व्यापारी


काम बंद होने से सब कुछ ठप सा हो गया है। ऐसे में घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। उम्र भर जिस व्यवसाय के सहारे परिवार को चलाया। अब उसके बंद होने से परिवार का गुजारा मुश्किल हो रहा है। अब इस उम्र में कोई दूसरा धंधा करने भी बेहद कठिन लग रहा है। बच्चों को अब अन्य कोई दूसरा धंधा तलाशने को कहा है। काम बंद होने से इस व्यवसाय से जुड़े लोगों पर कर्ज बढ़ता जा रहा है।
- गिरधारी नारंग, आतिशबाजी व्यापारी

इस व्यवसाय से जुड़े लोग इस उम्मीद हैं कि सरकार से कोई राहत मिले, लेकिन सरकार नाउम्मीद कर रही है। दिल्ली और राजस्थान को छोड़कर अन्य कहीं भी ग्रीन पटाखों पर रोक नहीं है। कारोबार ठप होने से व्यापारी बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। पहले एनसीआर ने मुश्किलें खड़ी की, लेकिन अब कोरोना ने पूरी तरह इस इस व्यापार को चौपट कर दिया है। व्यापारियों के साथ इस धंधे से जुड़ा श्रमिक वर्ग भी आहत है।
- अतुल, आतिशबाजी व्यापारी

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned