करता था बीटेक की पढाई लेकिन कानों में गूंजती थी बांसुरी की धुन

-पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य भरतपुर के बांसुरीवादक मनुराज राजपूत की कहानी
-रियलिटी शो दिन है हिंदुस्तानी में बॉलीवुड के टॉप म्यूजीशियंस से एप्रीसिएशन पा चुके फ्लूट आर्टिस्ट

By: Meghshyam Parashar

Published: 17 Oct 2020, 08:22 PM IST

भरतपुर. बचपन में मां सुशीला तोमर जब हारमोनियम पर सुर लगाती तो मेरा रोम-रोम खिल उठता। 11 वर्ष की उम्र में उनके साथ मंदिर में भजन गाना शुरू कर दिया। कानों में हमेशा बांसुरी की धुन सुनाई देती थी। यह कहानी है शहर के गोपालगढ़ मोहल्ला निवासी बांसुरीवादक मनुराज राजपूत की। इनका बांसुरी से प्यार इतना गहरा रहा है कि परिवार वालों ने जयपुर बीटेक करने भेजा तो गुपचुप मुंबई पहुंच गए पंडित हरिप्रसाद चौरसिया से बांसुरी सीखने के लिए। वहां प्रवेश मिलना इतना आसान नहीं था। बड़ी मेहनत के बाद वह मुकाम भी पा लिया।
वह बताते हैं कि भरतपुर के बिहारीजी मंदिर में पहले गुरू राकेश बंसीवालासे मुलाकात हुई। वे चाय की दुकान चलाते और मंदिर में उनकी बांसुरी की मधुर ध्वनि गूंजती थी। जब उनसे थोड़ा बहुत सीखा तो कथाओं, भजनों और मंदिरों में बांसुरी बजाने लगा। टाऊन हॉल में हुए कार्यक्रम में बांसुरी बजाई तो खूब तालियां बजी। इसके बाद परिजनों ने बीटेक करने के लिए जयपुर भेज दिया। मन में रोज बांसुरी की धुन गूंजा करती थी। वहां संदीप सोनी सर से फ्लूट सीखना शुरू कर दिया। कुछ दोस्त पॉकेट मनी से फाइन भर दिया करते थे। बीटेक में ट्रेनिंग के दौरान परिजनों से झूठ बोलकर दिल्ली में रवि प्रसन्ना सर से ट्रेनिंग लेने लगा। दो महीने की इंजीनियरिंग ट्रेनिंग में फ्लूट की ट्रेनिंग ले ली। इसके बाद गुरुजी पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के गुरुकुल में प्रवेश के लिए एक साल तक 1300 किमी का सफर तय करता रहा। गुरुजी इतनी आसानी से किसी को प्रवेश नहीं देते थे, लेकिन वहां से जो नोट्स मिलते उसे मैं भरतपुर आकर रोजाना छह से आठ घंटे तक पूरा करता। उन्होंने मेहनत देखी तो खुश हुए। मैंने उन्हें बताया कि यह इंजीनियरिंग की आखिरी साल है। यदि मुझे आपका सानिध्य नहीं मिलता तो परिजनों की मर्जी से इंजीनियरिंग की जॉब करनी पड़ेगी। गुरुजी ने मुझे उड़ीसा के गुरुकुल में भेज दिया। वहां मैंने छह महीने तक ट्रेनिंग ली। फिर पंडितजी ने मुझे वापस मुंबई बुला लिया। यहां 2011 से 2015 तक रहा। कपिल शर्मा के शो दिल है हिंदुस्तानी 2 के जरिए काफी पहचान मिली। शो में संकल्प केथवाल प्रोजेक्ट एंड मनुराज राजपूत की काफी सराहना मिली।

कोरोना ही नहीं संगीता की साधना सभी बीमारियों से लडऩे में समक्ष

मनुराज ने बताया कि संगीत की साधना से किसी भी बीमारी से लडऩे में मदद मिलती है। व्यक्ति ऊर्जावान व प्रसन्नता का अनुभव करता है क्योंकि संगीत का पूरा संबंध हमारे शरीर के योगिक केंद्रों से है। संगीत की साधना से ही व्यक्ति की सच्ची आध्यात्मिक एवं भौतिक उन्नति संभव है। 2017 में कपिल शर्मा के शो में रिचा शर्मा के साथ काम किया। 2018 में सोनू निगम के साथ म्यूजिक मिर्ची अवार्ड, 2018 में मीका सिंह के साथ दिल है हिंदुस्तानी सीजन टू व रहमान के साथ 2018 में द वॉइस में काम किया। अमरीका, कनाड़ा, साउथ अफ्रीका, यूरोप, चीन, दुबई, पोलैंड में भी प्रस्तुति दे चुके हैं।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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