scriptGave the gift of reservation, called the Baba of the track | स्मृति शेष : आरक्षण का दिलाया तोहफा, कहलाए पटरी वाले बाबा | Patrika News

स्मृति शेष : आरक्षण का दिलाया तोहफा, कहलाए पटरी वाले बाबा

- करामाती कर्नल ने आरक्षण आंदोलन से पाई ख्याति

भरतपुर

Published: April 01, 2022 12:03:39 pm

भरतपुर/बयाना . गुर्जरों को आरक्षण दिलाने के लिए ट्रेक जाम करने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का गुरुवार को जयपुर में निधन हो गया। करामाती कर्नल ने समाज में शिक्षा की अलख जगाकर खूब ख्याति पाई। कर्नल बैंसला करौली जिले के हिण्डौनसिटी के रहने वाले थे।
गुर्जर समाज को आरक्षण देने की मांग को लेकर रेलवे ट्रेक रोकने के बाद कर्नल बैंसला का आन्दोलन देश भर में शुरू हो गया था। इसके बाद कर्नल बैंसला को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहचान मिली। कर्नल ने गुर्जर सामज को पांच प्रतिशत आरक्षण दिलाने का सपना भी पूरा कराया। वर्ष 2008 में बयाना के पीलूपुरा में कर्नल बैंसला के नेतृत्व में गुर्जरों ने आरक्षण की मांग को लेकर दिल्ली-मुम्बई रेलवे मार्ग जाम कर दिया। गुर्जरों के लगातार रेलवे ट्रेक पर पर जमे रहने के कारण 27 दिन तक रेल सेवा बंद रही थी। गुर्जर नेता बैंसला ने गुर्जर आरक्षण की मांग को लेकर शुरू किए आन्दोलन में कई बार में गुंर्जरों को पांच प्रतिशत आरक्षण एमबीसी वर्ग में दिलाने को लेकर आन्दोलन किए। इसके बाद गुर्जर समाज के लोग संगठित होकर शिक्षा की ओर आगे बढ़े। गुर्जर समाज के लोगों मानना है कि शिक्षा की अलख जगाने में कर्नल बैंसला का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
स्मृति शेष : आरक्षण का दिलाया तोहफा, कहलाए पटरी वाले बाबा
स्मृति शेष : आरक्षण का दिलाया तोहफा, कहलाए पटरी वाले बाबा
सिपाही से कर्नल तक पहुंचे बैंसला

कर्नल बैंसला का जन्म करौली जिले के मुडिया गांव में 12 सितंबर 1939 को हुआ। उनके पिता बच्चू सिंह भी फौज में थे। कर्नल बैंसला ने फौज में सिपाई के रूप में ज्वाइन कर राजपूताना राइफल्स में 196 2 में ंभारत-चीन युद्ध में भी बहादुरी दिखाई थी। कर्नल के पद तक पहुंचने के बाद वह 1991 में सेवानिवृत हुए। इसके बाद उन्होंने डांग क्षेत्र में गुर्जर समाज के लोगों को शिक्षा में पिछड़ा देखकर आरक्षण के लिए कदम उठाया। पहली बार 1996 में मांग उठाई। इसके बाद बैंसला ने 2004 में आरक्षण आंदोलन को तेज करने का फैसला लिया। वर्ष 2005 में पीपलखेड़ा पाटौली में आरक्षण आन्दोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में गुर्जर आंदोलनकारियो की मौत के बाद भी कर्नल पटरियों पर जमे रहे। वर्ष 2007 में कर्नल बैंसला इसी मांग को लेकर फिर पटरियों पर बैठ गए। इसके बाद लोगों ने कर्नल बैंसला को पटरी वाले बाबा का नाम दिया। इस आन्दोलन का नेतृत्व भी कर्नल बैंसला ने किया। इसमें चोपडा कमेटी ने गुर्जर सहित 5 जातियों को एमबीसी में आरक्षण का प्रावधान लागू कराया, लेकिन मामले में 50 फीसदी की सीलिंग पार करने के कारण मामला कोर्ट में अटक गया। इसके बाद वर्ष 2008 में भाजपा की सरकार बदलने का बड़ा कारण गुर्जर आन्दोलन और पुलिस फायरिंग रहा। कर्नल बैंसला की अगुवाई में गुर्जर आरक्षण आन्दोलन पीलूपुरा में वर्ष 2008 , 2010, 2015 एवं 2020 में हुआ इसके अलावा कई महापंचायतें भी हुईं।

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