व्हील चेयरों का अभाव, दिव्यांग हो सकते हैं मतदान से दूर

व्हील चेयरों का अभाव, दिव्यांग हो सकते हैं मतदान से दूर

Pramod Kumar Verma | Publish: Apr, 21 2019 09:08:26 PM (IST) Bharatpur, Bharatpur, Rajasthan, India

भरतपुर. चलने-फिरने में असमर्थ दिव्यांगों को लोकतंत्र के महाकुंभ में मतदान कराने के राज्य सरकार के प्रयास बूथों पर व्हील चेयरों की अनुपलब्धता के कारण निरर्थक साबित होते लग रहे हैं।

भरतपुर. चलने-फिरने में असमर्थ दिव्यांगों को लोकतंत्र के महाकुंभ में मतदान कराने के राज्य सरकार के प्रयास बूथों पर व्हील चेयरों की अनुपलब्धता के कारण निरर्थक साबित होते लग रहे हैं। यह स्थिति 138 बूथों पर सामने आ सकती है, जहां सैंकड़ों दिव्यांग मतदान से वंचित रह सकते हैं।

जिले में 1774 बूथ हैं। इनमें से 1502 बूथों पर अनेक तरह के दिव्यांग अपने मत का प्रयोग करेंगे। इनमें से 606 बूथ ऐसे हैं जहां प्रति बूथ दस से कम दिव्यांग हैं। वहीं 348 बूथ ऐसे हैं जहां दस और दस से अधिक दिव्यांगों के नाम हैं जो चलने-फिरने में बिल्कुल असमर्थ हैं। इनकी मतदान की व्यवस्था के लिए व्हील चेयर की आवश्यकता है। फिलहाल समाज कल्याण विभाग के पास 210 व्हील चेयर हैं। इनमें से 180 व्हील चेयर विभाग की और 30 व्हील चेयर अपनाघर ने उपलब्ध कराई हैं।

वैसे तो जिले में 16,279 दिव्यांगों को चिह्नित किया है, जिनमें अधिकांश दिव्यांग मतदान केंद्रों पर जाने में असमर्थ हैं। ऐसे दिव्यांगों को बूथों तक पहुंचाकर मत का प्रयोग कराने के लिए व्हील चेयरों की जरूरत है। इस स्थिति में समाज कल्याण विभाग ने राज्य सरकार से व्हील चेयर उपलब्ध कराने की डिमांड भेजी है।

इसके अलावा लुपिन, भगवान महावीर विकलांग समिति से व्हील चेयर की कहा था, जहां पर उपलब्ध नहीं हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अब महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से अपने क्षेत्र में दिव्यांगों से सहमति पत्र भरवा रहा है। इसमें दिव्यांग लिख रहे हैं कि 'मैं अपना वोट डालने के बाद अपनी व्हील चेयर को वहीं छोड़ दूंगा...Ó। इस हिसाब से विभाग को व्हील चेयर के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।


सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग भरतपुर में उपनिदेशक राजेंद्र शर्मा का कहना है कि निर्वाचन विभाग के निर्देशानुसार बूथों पर दिव्यांगों को व्हील चेयर की व्यवस्था की जाएगी। इस संबंध में राज्य सरकार को डिमांड भेजी है। इसके अलावा सामाजिक समितियों से भी सहायता मांगी जा रही है।

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