संरक्षित वन क्षेत्र का प्रस्ताव तैयार, छपरा में हो सकता है लीज आवंटन

-आदिबद्री व कनकाचल पर्वत की एक हजार हैक्टेयर भूमि घोषित हो जाएगी वन सरंक्षित क्षेत्र
-46 लीजों का किया जाएगा स्थानांतरण

By: Meghshyam Parashar

Published: 11 Oct 2021, 02:15 PM IST

भरतपुर. पिछले करीब दो साल से जिले के ब्रज क्षेत्र में स्थित कनकाचल व आदिबद्री पर्वत को खनन मुक्त कराने की मांग पूरी होने जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से करीब एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र को वन संरक्षित भूमि का दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। जहां से स्वीकृति के बाद गजट नोटिफिकेशन किया जाएगा। इसके साथ ही यहां पूर्व में आवंटित 46 लीज स्थानांतरित करने के लिए दूसरे स्थान के चयन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। इसमें प्रथम दृष्टया छपरा में संभावना तलाशी जा रही है। चूंकि वहां इन लीजों को स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त इलाका मौजूद है। हालांकि इसका निर्णय प्रस्ताव के आधार पर राज्य सरकार ही करेगी।
जानकारी के अनुसार जुलाई 2009 में कामां व डीग में बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग स्थित 216 लीजों पर खनन बंद कराने के लिए उन्हें सरंक्षित वन क्षेत्र में शामिल कर लिया गया था। उस दौरान किन्हीं कारणों से आदिबद्री व कनकाचल पर्वत का हिस्सा सरंक्षित वन क्षेत्र में शामिल होने से रह गया था। इसलिए अब पिछले दो साल से मानमंदिर गहवर बरसाना के निर्देशन में साधु संत आंदोलन कर रहे थे। पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में जयपुर में हुई बैठक में इस एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सरंक्षित वन क्षेत्र में शामिल कराने का निर्णय लिया गया था। अब इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। फिलहाल यहां खनन कार्य बंद करा दिया गया है। संरक्षित वन क्षेत्र घोषित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के 1996 में दिए निर्णय के अनुसार यहां खनन प्रतिबंधित हो जाएगा।

यह भी समझिए...किसको कितनी लीज, यह सरकार का निर्णय

सूत्रों के अनुसार वैसे तो पुर्नवास के तहत एक हैक्टेयर लीज आवंटित करने का प्रावधान है। बाकी किसी के पास अब तक पूर्व के स्थान पर पांच या उससे कहीं ज्यादा लीज आवंटित है तो उसका नीतिगत निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर ही किया जाएगा। छपरा में पुर्नवास के पीछे यह भी पहलू है कि वहां पूर्व में विभाग की ओर से सर्वे कराकर 110 प्लॉट निकाले जा चुके हैं। अगर वहां 45 व एक सिलिका की लीज के धारक को आवंटन किया जाता है तो आसानी से बाकी लीजों का आवंटन ई-ऑक्सन से कर बड़ा राजस्व प्राप्त किया जा सकता है।

इधर, बैकडेट में हो रहे लीज ट्रांसफर जैसे काम

आश्चर्य की बात यह है कि जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल भले ही यहां काम बंद करा दिया गया है, लेकिन खनिज विभाग के लिए अब भी यह लीज बड़ा साधन बनी हुई है। अवकाश के दिन भी यहां लीजों के दस्तावेज संबंधी कार्य ऑफिस खोलकर बैकडेट में किए जा रहे हैं। ताकि पुर्नवास के तहत लीज आवंटन के समय कोई विवाद सामने नहीं आए। जो अधिकारी डेपुटेशन पर होने के बाद भी 15 दिन से नहीं आ रहा था, वह हर दूसरे दिन कोटा से यहां चक्कर काट रहे हैं।

प्रमुख सचिव कुलदीप रांका से मिले नगर विधायक वाजिब अली

नगर के विधायक वाजिब अली रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रमुख सचिव कुलदीप रांका से मिले। विधायक ने बताया कि राज्य सरकार ने बृज के पर्वतों की रक्षा के लिए यह अच्छा कदम उठाया है। अब पुर्नवास के तहत व्यापारियों को छपरा में लीज आवंटन समय पर करना चाहिए। ताकि कारोबार शुरू किया जा सके। छपरा में पूर्व में ही 110 प्लॉट बन चुके हैं। इसलिए छपरा ही उपयुक्त स्थान है, जहां लीजों का स्थानांतरण किया जा सकता है। साधु-संतों से मुलाकात के बाद दो बार मुख्यमंत्री को इस प्रकरण से अवगत कराया गया था। साधु-संत भी सरकार के निर्णय से खुश हैं। कोलरी, ककराला व इन लीजों से जुड़े व्यापारियों ने दो दिन पहले समस्या बताई थी। इसलिए मुख्य सचिव को भी समस्या से अवगत कराया गया है।

इनका कहना है

-चार-पांच दिन में राज्य सरकार के स्तर पर प्रस्ताव स्वीकृत हो सकता है। हमारा आंदोलन सफल हो रहा है। इससे आदिबद्री व कनकाचल पर्वत को आने वाली पीढिय़ां भी देख सकेंगी।

राधाकांत शास्त्री
कार्यकारी अध्यक्ष, मानमंदिर गहवरवन बरसाना

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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