ड्यूटी से सीखा हौसलों का पाठ तो हराया कोरोना

- परिवार ने दी कोरोना को मात

By: Meghshyam Parashar

Published: 20 May 2021, 02:07 PM IST

भरतपुर. खाकी हमेशा हौसलों का पाठ पढ़ाती है। ऐसे में समाज की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाले जवान अपनी सुरक्षा भी बेहतर कर सकते हैं। चाहे वह फिर कोरोना से जंग हो या समाज के दुश्मनों से। भले ही पूरा परिवार कोरोना की चपेट में आ गया, लेकिन बुलंद हौसलों के चलते हम इसे हराने में कामयाब हो गए। यह कहना है बांसी खुर्द ट्रेनिंग सेंटर में तैनात रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले उप निरीक्षक प्रेम सिंह का। सिंह के पूरे परिवार ने पॉजिटिव होने के बाद हौसलों के दम पर कोरोना को मात दी।
एसआई सिंह बताते हैं कि कुछ अस्वस्थता महसूस होने के बाद बेटे लक्ष्मण सिंह (33) एवं पुत्र वधू अंजना (28) ने नमूने दिए। उनकी रिपोर्ट अगले दिन पॉजिटिव आई। यह सदमे सरीखा था, लेकिन अगले ही पल पूरा परिवार संभल गया और सबकी जांच कराई। नमूनों के आधार पर प्रेम सिंह (58) खुद, उनकी पत्नी कृष्णा फौजदार (55), नाती मोहित (8) एवं नातिनी हिमांशी (1 साल चार माह) सभी पॉजिटिव निकले। ऐसे में परिवार एकजुट होकर कोरोना से लडऩे को तैयार हो गया। सरकारी गाइड लाइन की पालना करने के साथ नियमित दवाओं का सेवन किया। साथ ही पौष्टिक भोजन लिया। इस बीच कृष्णा एवं अंजना को अस्पताल में एडमिट भी कराया गया, लेकिन फिर भी परिवार ने हौसला नहीं खोया। सिंह बताते हैं कि परिवार के साथ मित्र भी हौसला अफजाई करते रहे। खास तौर से लुपिन के अधिशासी निदेशक सीताराम गुप्ता ने उन्हें दवा भी भिजवाईं और फोन पर बेफिक्र होकर कोरोना को मात देने की बात कही। सिंह बताते हैं कि इसके बाद सात मई को मेरी और बेटे दोनों की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई। इस दरिम्यान ही पूरा परिवार स्वस्थ हो गया। इसके बाद मैंने और बेटे ने अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली। सिंह के बेटे भी पुलिस में हैं और पुलिस लाइन में तैनात हैं।

जरूर लगवाएं वैक्सीन

ट्रेनिंग सेंटर में जवानों को पढ़ोन वाले सिंह बताते हैं कि मैंने और बेटे ने पहले ही दोनों वैक्सीन लगवा ली थीं। इसके चलते कोरोना का असर कम हुआ और गंभीर जैसी स्थिति नहीं बनीं। सिंह ने कहा कि लोगों को कोरोना से बचने के लिए सरकारी गाइड लाइन की पालना के साथ वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।

ऐसे कहानियों से मिल रही कोरोना मरीजों को प्रेरणा

सिंह ने बताया कि कोरोनाकाल के बीच ऐसी कहानियां राजस्थान पत्रिका की ओर से प्रमुखता से प्रकाशित की जा रही है। असल में ऐसी कहानियां पढऩे से कोरोना मरीजों को भी प्रेरणा मिलती है। उनके अंदर हिम्मत बढऩे के साथ ही वो कोरोना से जंग लडऩे के लिए खुद मजबूत बना लेते हैं। साथ ही प्रशासन को भी चाहिए कि ऐसे लोगों के विचार व कहानियों को मरीजों के मोटिवेशन के लिए उपयोग में लिया जाना चाहिए। ताकि कोरोना के भय को मरीजों में कम किया जा सके। साथ ही वैक्सीन, मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग की पालना इन तीन नियमों का पालन करने का तो संकल्प ही ले लेना चाहिए। इनके पालन किए बिना कोरोना जंग मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन भी है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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