कैंसर की कसक के बीच जिंदादिली से जी जिंदगी और जीत ली जंग

- 21 साल से कैंसर को मात दे रहे हैं 72 वर्षीय कुंतल

By: Meghshyam Parashar

Updated: 05 Feb 2021, 01:17 PM IST

भरतपुर. माना कि जिंदगी हर कदम नई जंग है, लेकिन जिंदादिली और हौसले जिंदगी जीने का फलसफा बदल देते हैं। कल की किसी को पता नहीं होती, लेकिन हम आज को बेहतर जीकर आने वाले दिनों की अच्छी नींव रख सकते हैं। यह कहना है कैंसर जैसी घातक बीमारी को मात देने वाले देवी सिंह कुंतल निवासी प्रिंस नगर भरतपुर का। कुंतल पिछले 21 वर्ष से कैंसर से जूझकर हौसलों के बलबूते स्वस्थ जिंदगी जी रहे हैं।
देवी सिंह की उम्र आज 72 वर्ष है। उन्हें इस बीमारी का भान 21 साल पहले वर्ष 2000 में हुआ तो एकबारगी उनके सारे सपने बिखर से गए, लेकिन उन्होंने हौसलों का दामन थामे रखा। वर्ष 2001 में उनका उपचार हुआ। इस दरिम्यान उन्हें छह कीमो और 34 सेक लगाए गए। गले के कैंसर से जूझते हुए उनका इलाज चलता रहा। इस बीच वह जयपुर में चिकित्सक को दिखाते रहे। उन्होंने इस बीमारी पर काफी नियंत्रण कर लिया। इसके बाद वर्ष 2009 में उन्हें फेंफड़ों के कैंसर ने घेर लिया। इस बारगी वह टूटते नजर आए, लेकिन फिर भी हौसलों को लेकर आगे बढ़े और समय-समय पर जांच कराकर उपचार कराया। यह जिंदादिली और सकारात्मक सोच का ही परिणाम था कि वर्ष 2010 में वह फिर से स्वस्थ हो गए। इसके बाद भी नियमित चिकित्सक के सम्पर्क में रहे। इस बार वह फरवरी 2020 में चिकित्सक के पास रिव्यू के लिए गए तो चिकित्सक ने चेकअप के बाद उन्हें अगले माह आने को कहा, लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद वह फिर नहीं जा सके। इस बीच वह दवाओं के सहारे फेंफड़ों के कैंसर से जूझे। अक्टूबर 2020 में जयपुर के चिकित्सक ने उन्हें भरतपुर में ही कैंसर यूनिट में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. चरन सिंह चौधरी को दिखाने के लिए कहा। सारे चेकअप होने के बाद उन्होंने नवम्बर माह में फेंफड़ों के कैंसर से जूझते हुए ऑपरेशन कराया है। पिछले तीन माह से वह चिकित्सक की निगरानी में इलाज ले रहे हैं और अब अब खुद ही चाय आदि पीने लगे हैं। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़कर उस पर पार पाने वाले कुंतल का गुरुवार को आरबीएम चिकित्सालय की कैंसर यूनिट में सम्मान किया गया। पिछले 21 साल से कैंसर को हराने वाले कुंतल ने गुरुवार को अस्पताल में 21 वर्ष का केक काटा।

पहले फौजी बनकर तो अब कैंसर से कभी नहीं हारे

कुंतल आर्मी में सूबेदार रहे। इसके बाद वह सिविल में डाकघर में सेवारत रहे। कुंतल बताते हैं कि वर्ष 1996 तक वह धूम्रपान एवं तम्बाकू आदि का सेवन कर लिया करते थे, लेकिन वर्ष 1996 के बाद से उन्होंने ऐसी सभी चीजों से तौबा कर ली है। कुंतल कहते हैं कि स्वस्थ जीवन जीने के लिए ऐसी चीजों से हमेशा दूर रहना चाहिए। प्रबल इच्छाशक्ति से सब कुछ संभव है। हिम्मत एवं हौसले के बलबूते कैंसर जैसी बीमारी को भी मात दी जा सकती है। बशर्ते अच्छी सोच लेकर जिंदगी जिएं और नियमित रूप से चिकित्सक के सम्पर्क में रहें। कुंतल ने कहा कि युवा पीढ़ी व्यसनों से दूर रहकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अच्छी जिंदगी जी सकती है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned