मंत्री जी...अब खाद्य सुरक्षा से जोडऩे की कवायद

भरतपुर. राज्य में लाखों ऐसे परिवार हैं जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के हकदार हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की कारगुजारी के कारण लाभ से वंचित हैं।

भरतपुर. राज्य में लाखों ऐसे परिवार हैं जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के हकदार हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की कारगुजारी के कारण लाभ से वंचित हैं। वहीं ऐसे भी परिवार हैं, जो सरकारी सेवाओं और आर्थिक रूप से सुदृढ हैं। इसलिए लाभ के पात्र नहीं होने की स्थिति में भी राशन कार्ड लेकर उचित मूल्यों की दुकानों पर कतार में देखी जा सकती हैं।

अब खाद्य सुरक्षा में सरकारी हो या गैर सरकार अगर योजना में अपात्र व्यक्ति लाभ ले रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई कर पात्र परिवारों को जोड़ा जाएगा। ये बात भरतपुर के सर्किट हाउस में जनसुनवाई कर रहे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेशचंद मीणा ने कही। उन्होंने एनएफएसए (खाद्य सुरक्षा योजना) के लम्बित प्रकरणों में तत्काल कार्य करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। क्योंकि, भरतपुर जिले में लोगों ने खाद्य सुरक्षा में 08 हजार अधिक आवेदन किए। इनमें से लगभग 5 सौ आवेदन अप्रूव्ड हो पाए। इस पर कैबीनेट मंत्री मीणा ने कहा कि बड़ी दुखद स्थिति है।


उन्होंने कहा कि सरकार ने जो घोषणाएं की हैं उसके तहत खाद्य सुरक्षा को धरातल पर लाकर उन लोगों तक लाभ पहुंचाना है जो वास्तविक स्थिति में इसके हकदार हैं। राज्य में ऐसा देखा गया है कि करीब 40 लाख परिवारों के नाम तो खाद्य सुरक्षा में जुड़े हैं, लेकिन उन तक लाभ पहुंचा ही नहीं। जबकि, लाखों परिवार ऐसे हैं जो अपात्र हैं लेकिन भरपूर लाभ ले रहे हैं। यह अचरज की बात है। वहीं राशन की दुकानों पर गेहूं वितरण के समय मेें भी बदलाव किया है। अब महीने की 01 तारीख से 15 तक पूरे दिन खोली जाएंगी राशन की दुकानें और 16 से महीने के अंत तक तीन-तीन घंटे दुकानें खोलने की बात कही।


कहा कि राज्य में कोई भी पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित नहीं रहेगा। यही वजह है कि मंत्री स्तर पर जनसुनवाई और बैठक लेकर स्थिति देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि वितरण के दौरान पोस मशीन में अपलोड न होना एक समस्या थी। अब जीपीएस सिस्टम से कार्य में पारदर्शिता आएगी। जिले में रसद विभाग के अधीन 01 हजार 07 उचित मूल्य की दुकानें संचालित हैं, जहां से खाद्य सुरक्षा योजना के तहत 3.42 लाख परिवारों से लगभग 16 लाख लोग गेहूं लेते हैं। इनमें ऐसे परिवारों के पास भी खाद्य सुरक्षा के कार्ड हैं जो आर्थिक रूप से सुदृढ़ हैं। कह सकते हैं कि ऐसे परिवार योजना की श्रेणी में नहीं आते हैं।


अब सरकार ने ऐसे परिवारों के निष्कासन पर कवायद शुरू कर दी है। बात अगर योजना में पात्रता की दृष्टि से मापदंडों की करें तो इसमें एक लाख से अधिक वार्षिक पेंशन, आयकरदाता, स्वायत्तशाषी संस्थानों में नियमित कर्मचारी या अधिकारी, सरकारी, अद्र्धसरकारी,चौपहिया वाहन, नगर निगम या नगरपालिका क्षेत्र में एक हजार वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल में पक्का मकान, निर्धारित सीमा से अधिक कृषि भूमि आदि मापदंड रखने वाले परिवार सरकार की योजना के पात्र नहीं हैं।

pramod verma Reporting
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