दुर्घटना को बताया हत्या, एक हजार से अधिक लोग जुलूस के रूप में पहुंचे कलक्ट्रेट

-चौथे दिन उठाया मृतक का शव, छह घंटे तक पुलिस-प्रशासन व शहर की जनता रही परेशान

By: Meghshyam Parashar

Published: 14 Sep 2020, 10:12 PM IST

भरतपुर. शहर में करीब आठ से 10 घंटे तक पूरा शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। क्योंकि बगैर किसी सूचना भीम आर्मी व जाटव समाज के लोग करीब एक हजार से अधिक की संख्या में मुख्य बाजार से जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंच गए। जहां तीन दिन पूर्व खेड़ली मोड के पास युवक गौरव जाटव की मौत को हत्या बताते हुए जमकर हंगामा किया। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। आनन-फानन में हरकत में आए पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों मौके पर अतिरिक्त जाब्ता तैनात कराया। इसके बाद बिजलीघर से सारस चौराहे को जाने वाले मार्ग पर यातायात को डायवर्ट किया गया। इससे एक बार बिजलीघर चौराहे से लेकर कुम्हेर गेट तक जाम लग गया। इससे करीब दो घंटे तक पूरे शहर की यातायात व्यवस्था ठप हो गई।
जानकारी के अनुसार पुलिस का दावा है कि गौरव पुत्र किश्रू जाटव निवासी विजय नगर हीरादास वार्ड नंबर 13, 11 सितंबर की रात को खेड़ली मोड़ के पास किसी वाहन की टक्कर से घायल हो गया था। उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां हालत चिंताजनक होने पर जयपुर रैफर कर दिया गया। जहां ले जाते समय घायल की मौत हो गई। परिजन वापस उसके शव को आरबीएम अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां दूसरे दिन पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया था। इसको लेकर उसी दिन से पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप लगाते हुए हंगामा किया जा रहा है। सोमवार सुबह 11 बजे नुमाइश मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। जहां बैठक करने के बाद जुलूस के रूप में कुम्हेर गेट, लक्ष्मण मंदिर, चौबुर्जा व बिजलीघर होते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। जहां करीब एक घंटे नारेबाजी व प्रदर्शन होता रहा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल को कलक्टर से मिलने के लिए बुलाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया। इसमें बताया कि गौरव को एनएच 21 पर खेड़ली मोड चौकी के पुलिसकर्मियों ने मारपीट कर बेहोश कर दिया। इसके बाद महुआ के अस्पताल में छोड़कर भाग गए। इसके बाद उसकी मौत हो गई। उन्होंने दोषियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने, मुख्यमंत्री सहायता कोष से 50 लाख रुपए मुआवजा राशि दिलाने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग रखी। इसके बाद भी करीब तीन घंटे बाद शाम पांच बजे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई। इसमें मांगों को लेकर सहमति बनने व प्रकरण की जांच कराने के आश्वासन देने पर मामला शांत हुआ। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आरोप झूठा था। उस पक्ष को समझा दिया गया है। इसके बाद आरबीएम अस्पताल की मोर्चरी से परिजनों ने शव उठाया।

मां बोली...बेटा मार दिया मुझे भी मार डालो

मृतक गौरव जाटव की मां पिस्ता देवी कलक्ट्रेट के सामने सुधबुध खो बैठी। ऐसे में वह एक बार तो बेहोश हो गई। खुद पुलिस अधिकारियों में भी इसको लेकर हड़कंप मच गया क्योंकि मृतक की मां की हालत देखकर प्रदर्शनकारी और भी आक्रोशित हो गए। इस पर मां पिस्तादेवी ने पुलिसकर्मियों को लताड़ते हुए कहा कि मेरे बेटे को मार दिया अब मुझे भी मार डालो। मृतक गौरव के अभी कोई संतान नहीं है। उसकी पत्नी रचना आठ माह की गर्भवती है।

कोरोना गाइडलाइन का उड़ा मखौल, खतरे में आया शहर

जुलूस में शामिल भीड़ का अनुमान करीब एक हजार लगाया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि पिछले तीन दिन से यह प्रकरण चल रहा था, लेकिन पुलिस व प्रशासन का खुफिया तंत्र भी फेल नजर आया। अचानक इतनी बड़ी संख्या में आए लोगों ने कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए बनी गाइडलाइन को तोड़ दिया। इसके बाद भी जिम्मेदारों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इधर, मृतक के साथी का दावा कि पुलिस पर मारपीट का आरोप गलत

भुसावर. मृतक गौरव के एक साथी गांव बछामदी के लोकेंद्र का एक वीडियो भी वायरल हुआ है। इसमें लोकेंद्र ने दावा किया है कि 11 सितम्बर को वह और उसका साथी गौरव हाई वे पर बाइक चला रहे थे तब मृतक व उसके साथी ने शराब पी रखी थी। बाइक असंतुलित होकर सड़क के बीच बाइक डिवायडर से टकरा गई और बाइक सहित गिर पड़े। घायल की सूचना पर सबसे पहले एनएचआई की एम्बुलेंस व पुलिस पहुंची और घायलों को तुरंत दौसा महवा के सरकारी अस्पताल ले गए। पुलिस ने कोई मारपीट नहीं की है।


-कोरोना की गाइडलाइन तोडऩा गलत है। यह अन्य लोगों को खतरे में डालने जैसा है। बाकी आरोप लगाने वाले पक्ष भीम आर्मी व अन्य को समझाया गया है। उन्होंने एक ज्ञापन भी दिया है।
नथमल डिडेल
जिला कलक्टर

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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