सांसद की मुखरता मोदी के विजयीरथ में लगा सकती है अडंगा

एससी-एसटी एक्ट के संसद में बिल लाने से पहले और बाद में क्षेत्रीय सासंद बहादुर सिंह कोली की मुखरता उनके और भाजपा के लिए लिए लोकसभा चुनाव में संकट खड़ा कर सकती है।

By: rohit sharma

Published: 03 Jan 2019, 10:25 PM IST

भरतपुर. एससी-एसटी एक्ट के संसद में बिल लाने से पहले और बाद में क्षेत्रीय सासंद बहादुर सिंह कोली की मुखरता उनके और भाजपा के लिए लिए लोकसभा चुनाव में संकट खड़ा कर सकती है। हाल में भरतपुर में केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री अर्जुनलाल मेघवाल ने ली बैठक में भी सांसद कोली के तेवर पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाले दिखे। ये सब उस समय हो रहा है, जब हाल में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और भरतपुर जिले में भाजपा का सफाया हो गया।


विधानसभा चुनाव 2013 में भाजपा ने छह सीटों पर विजय हासिल की थी। इसमें स्वयं वैर विधानसभा से वर्तमान सांसद भाजपा की टिकट पर विधायक के रूप में निर्वाचित हुए। बाद में पार्टी ने उन्हें वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भरतपुर सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। कोली ने करीब 2 लाख 66 हजार मतों से जीत हासिल कर अपनी लोकप्रियता दिखाई। लेकिन विधानसभा चुनाव की बात करें तो उनके गृह विधानसभा क्षेत्र वैर में भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप कोली को हार का सामना करना पड़ा। पराजित प्रत्याशी ने केन्द्रीय मंत्री की बैठक में हार की एक वजह सांसद कोली द्वारा सहयोग नहीं करने का भी आरोप मढ़ा है।

सांसद कोली ने जिस अंतर से लोकसभा चुनाव में जीत अर्जित की थी, वह उस लिहाज से उसे बरकरार नहीं रख पाए। पार्टी को हाल में हुए विधानसभा चुनाव में वैर में हार का सामना करना पड़ा। वहीं, उनके अनुभव को आंका जाए तो वह इससे पहले भी वह वर्ष 1999-2003 में तब बयाना संसदीय सीट से सांसद रह चुके हैं लेकिन उस लिहाज से भरतपुर जिले के लिए खास कार्य नहीं करवा पाए।

सांसद कोली पर लगातार सांसद निधि से बजट आवंटित करने में कमीशन लेने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। उन पर भाजपा के ही सरपंच ही कमीशनखोरी के आरोप जड़ चुके हैं। इससे पहले वह लुधावई टोल पर गार्ड को थप्पड़ मारने के मामले में वीडियो वायरल होने से चर्चा में रह चुके हैं।

कोली का विधानसभा क्षेत्र वैर है और वह ज्यादातर समय अपने इलाके में सक्रिय रहते हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव 2018 में पार्टी को उनकी सक्रियता का कोई लाभ नहीं मिल पाया। पार्टी उम्मीदवार को यहां से मुंह की खानी पड़ी। जबकि इस इलाके में उन्होंने सांसद निधि से अधिक बजट खर्च किया था।

ये किए थे वादे
-चंबल से व्यर्थ बहने वाला पानी लाएंगे। ईस्टर्न कैनाल 368 करोड़ की योजना केंद्रीय योजना बन चुकी है।
-आगरा ईदगाह से बांदीकुईलाइन विद्युतीकरण 109 करोड़ रुपए मंजूर।
-वैर में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने को कहा था। अभी कुछ नहीं हो पाया है।
-किशोरी महल, वैर के सफेद महल, डीग के महल के लिए बजट मंजूर कराना।
- जिले में चंबल परियोजना की पेयजल लाइन अभी तक नहीं बिछ पाई है।

rohit sharma Reporting
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