भरतपुर नगर निगम बना राजनीति का अखाड़ा

-जिला जाटव महासभा समिति ने आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को दिया ज्ञापन

By: Meghshyam Parashar

Updated: 26 Aug 2020, 02:15 PM IST

भरतपुर. नगर निगम में चल रही खींचतान का मामला अब जिला कलक्टर तक जा पहुंचा है। जिला जाटव महासभा समिति ने मंगलवार को विकास की जगह नगर निगम में राजनीति का अखाड़ा बनने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर नथमल डिडेल को ज्ञापन दिया। साथ ही उन्हें भी नगर निगम में चल रहे विवाद के बारे में बताया।
ज्ञापन में उल्लेख किया है कि प्रथम बार शिक्षित व समाज का मेयर कांग्रेस पार्टी की ओर से बनाया गया है। पिछले कुछ महीनों से देखने में आ रहा है कि आयुक्त व मेयर के बीच विवाद बना हुआ है। नगर निगम में राजनीति का अखाड़ा बनने के कारण शहर की समस्याएं जस की तस बनी हुई है। शहर का विकास अवरुद्ध होने से सरकार व पार्टी की छवि खराब हो रही है। निगम प्रशासन की ओर से महापौर के अधिकारियों का हनन खुलेआम किया जा रहा है, जो कि सुनिश्चित षड्यंत्र का हिस्सा है। मेयर की ओर से भ्रष्टाचार के प्रकरणों में कार्रवाई करने के लिए कई बार निगम प्रशासन को लिखा गया है, लेकिन उक्त प्रकरणों में कार्रवाई करने के लिए कई बार निगम प्रशासन को लिखा गया है। उक्त प्रकरणों पर कोई कार्रवाई नहीं कर आमजनता व राज्य सरकार की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से मनमर्जी कर भय का वातावरण निगम में बनाया हुआ है। मेयर को कार्य करने नहीं दिया जा रहा है। निगम कोष का जनहित के नाम पर दुरुपयोग किया जा रहा है। नगर निगम में 25 वर्ष गुजरने के बाद कांग्रेस का कोई बोर्ड बना है उसे भी निगम प्रशासन के कुछ अधिकारी सही तरह से कार्य नहीं करने दे रहे हैं। संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन किया जा रहा है। नगर निगम में पदस्थापित संबंधित अधिकारियों को हटाकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या न्यायिक जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें। प्रतिनिधिमंडल में विजय सिंह इंजीनियर, महेश बराखुर, किशनपाल पूर्व पार्षद, राजकुमार पप्पा, प्रेमप्रकाश, लीलाधर गुधैनियां, विनोद मेडिकल, विमलेश, आकाश कमलपुरा, पार्षद मुकेश कुमार उर्फ पप्पू, दिनेश सोगरवाल, एडवोकेट गजेंद्र आदि शामिल थे।

बड़ा सवाल...विवाद के कारण विकास का रास्ता अवरुद्ध

नगर निगम में चल रहे इस विवाद के कारण शहर के विकास का रास्ता भी अवरुद्ध हो चुका है। दोनों ही पक्ष विवाद सुलझाने की दिशा में कदम तक नहीं उठा रहे हैं। चूंकि बड़ा सवाल यह भी उठता है कि दिसंबर 2019 तक चुनाव के कारण विकास कार्य नहीं हो सके। इसके बाद कोरोना संक्रमण को लेकर कभी बजट तो कभी कार्य रुकते रहे, अब विवाद के कारण विकास की रफ्तार धीमी पड़ चुकी है। अगर ऐसे ही रहा तो नगर निगम में जो काम होने हैं वो भी रुक जाएंगे। जरूरी यह है कि जिले के बड़े अधिकारियों व मंत्रियों के साथ ही जिम्मेदारों को इस विवाद का निस्तारण कराकर एक नई पहल करनी चाहिए। ताकि जो दावा जनप्रतिनिधियों की ओर से शहर की दिशा और दशा सुधारने का दावा करने वालों को भी इस प्रकरण में पहल करनी चाहिए। वैसे नगर निगम का विवादों से पुराना नाता रहा है, लेकिन इस बार यह विवाद इतना बढ़ गया कि महीनों का समय गुजर चुका है। वहीं दूसरी ओर विवाद के चलते अब गुट भी बनते जा रहे हैं।

वर्षों से मुद्दा बनती रही सीएफसीडी को भी भूले जिम्मेदार

शहर की जनता और नेताओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा सिटी फ्लड कंट्रोल (सीएफसीडी) रही है। चुनाव के समय हमेशा यह मुद्दा उठाया जाता रहा है, परंतु चुनाव के बाद जिम्मेदारों की ओर से इसे भुला दिया जाता है। हर साल बारिश के मौसम में शहर की बड़ी आबादी को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है। सीएफसीडी निर्माण को लेकर भले ही न्यायालय में विचाराधीन है। नगर निगम का नया बोर्ड बनने के बाद सीएफसीडी निर्माण को लेकर संबंधित वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ शर्मा से भी वार्ता की गई है, लेकिन कुछ समय बाद यह मुद्दा भी भुला दिया गया। जबकि नगर निगम ही नहीं शहर की जनता भी जानती है कि अगर सीएफसीडी का निर्माण होता है तो शहर में जलभराव की परेशानी को जड़ से समाप्त किया जा सकेगा।

-जाटव महासभा ने ज्ञापन देकर मामले से अवगत कराया है। इस बारे में नगर निगम में भी बात की गई है। जल्द ही समस्या का निस्तारण कराया जाएगा। शहर के विकास में कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
नथमल डिडेल
जिला कलक्टर

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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