पुलिसकर्मियों ने जोड़े हाथ...अब तो मान जाओ भाई, अपनी और परिवार की करो सुरक्षा

-अब भी बाहर से आए परिजनों की जानकारी छिपा रहे लोग

By: Meghshyam Parashar

Published: 27 Mar 2020, 07:58 PM IST

भरतपुर. लॉकडाउन में अब काफी हद तक शहर की जनता सरकार और प्रशासन का साथ दे रही हैं, लेकिन ऐसी विपत्ति में अब खुद पुलिसकर्मी भी मिसाल पेश कर रहे हैं। शुक्रवार को जब बिजलीघर चौराहे, कोतवाली चौराहे समेत कुछ स्थानों पर लोग घर से बाहर निकलने से बाज नहीं आए तो पुलिसकर्मियों ने डंडे बरसाने के बजाय उनके सामने हाथ जोड़े। सुबह नौ बजे से 12 बजे तक आवश्यक सेवाओं से संबंधित दुकानों को खोला गया। सफेद घेरे में खड़े होकर ग्राहकों ने सोशल डिस्टेंसिंग की पालना की। वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर पुलिस को मशक्कत का भी सामना करना पड़ा। यहां पर पुलिस ने लाठियां भी दिखाई।

अब भी बाहर से आए परिजनों की जानकारी छिपा रहे लोग

एक और बात सामने आई है कि लोग अब भी बाहर से आए लोगों की जानकारी छिपा रहे हैं। बताते हैं कि प्रदेश में जहां सबसे अधिक संक्रमित रोगी आए हैं, उन जिलों से अगर कोई आता है तो उसकी जानकारी देने से परिजन भी कतरा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह सुरक्षा में चूक है। इसका परिणाम भयावह हो सकता है। डीग में भी भीलवाड़ा से आए परिजनों की तीन दिन तक जानकारी छिपाने को लेकर शिकायत की गई है।

कोरोना में भी कमाई: डीलर ने डकारा 16 क्विंटल गेहूं

खाद्य सुरक्षा से जुड़े गरीब लोगों के गेहूं वितरण में लगातार धांधलेबाजी हो रही है। इसे लेकर शुक्रवार को पहाड़ी की ग्राम पंचायत मातुकी में 61 राशन कार्डों में वितरित होने वाले 16 क्विंटल गेहूं को अलवर जिले के किशनगढ़वास तहसील की ग्राम पंचायत नूरनगर के डीलर नथूलीराम ने डकार लिया। समस्या से जूझते गांव मातुकी के ग्रामीणों ने इसकी शिकायत भरतपुर में रसद विभाग से की है। यहां के डीएसओ ने अलवर डीएसओ को गड़बड़ी की सूचना दी है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण अब राशन की दुकानों पर गेहूं का वितरण पोस मशीन के बजाए ओटीपी नंबर से कर दिया है। राशन कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक होने पर ओपीटी आता है। ओटीपी भी न आए तो उपभोक्ता को गेहूं का वितरण किया जाएगा। लेकिन, पोस मशीन पर अंगुलियों के निशान नहीं लिए जाएंगे। इस स्थिति के बावजूद नूर नगर के डीलर ने मातुकी के खाद्य सुरक्षा में आने वाले 61 राशन कार्डधारकों का 16 क्विंटल गेहूं निकाल लिया। जिला रसद अधिकारी बनवारी लाल मीणा का कहना है कि मातुकी से कुछ ग्रामीण शिकायत लेकर आए थे कि अलवर में उनके गेहूं का निकाल लिया है। इस स्थिति से अलवर डीएसओ को सूचित कर दिया है।

इनका दर्द भी जानिए सरकार

250 किमी का सफर और गोद में नन्ही जानें

जयपाल नोएड़ा में मजदूरी करता है। कोरोना का खौफ फैलते ही मालिक ने उसे नौकरी से निकाल दिया। अब वह चार दिन से पैदल ही सफर कर रहा है। उसे धौलपुर जिले के बसेड़ी में पैतृक गांव तक जाना है। रास्ते में जिससे भी मिन्नत की, सभी ने दुत्कार दिया। पत्नी राधा और वो खुद दो साल व आठ साल के बेटे को गोद में लेकर सफर कर रहे हैं। जब वह थक जाते हैं तो आठ साल के बेटे को पैदल चलाते हैं। बेटा बार-बार मां से कहता हैं कि अब पैरों में दर्द हो रहा है।
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पांव में छाले...पर कोरोना से ज्यादा सरकार से नाराज

अलवर से मध्यप्रदेश के दमोह जा रहे श्रमिक भी कोरोना से ज्यादा सरकार से खौफजदा हैं। अर्जुन, भूरा, सबोधरा, गीता, गोलू बेलदारी व कारीगरी का काम करते हैं। सेठ ने उन्हें आगामी कुछ माह के लिए काम बंद बताकर भेज दिया हैं। उनके अंदर कोरोना के खौफ से ज्यादा सरकार के प्रति नाराजगी है। वह बताते हैं कि सरकार को उन्हें घर भिजवाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी। ताकि वह खुशी-खुशी घर जा सकें। अब पैदल सफर करना पड़ रहा है। दो दिन से कुछ खाया तक नहीं है। पांव में छाले पड़ चुके हैं।

मेडिकल की दुकानों में दवा कम, परिचितों के घरों में छिपाई

शहर में बड़े दवा विक्रेताओं ने छापामार कार्रवाई के डर से दुकानों में दवाओं का स्टॉक कम कर दिया है। बताते हैं कि दवा विक्रेताओं की ओर से परिचितों व खुद के घरों में गोदाम बना लिए हैं। चूंकि पिछले कुछ दिन से नकली दवाओं का कारोबार भी धड़ल्ले चल रहा है। इसकी सूचना के बाद भी प्रशासन व औषधि नियंत्रक विभाग के अधिकारियों की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आए दिन झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई का दम भरकर खानापूर्ति करने वाले संबंधित विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से ही यह कारोबार चल रहा है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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