वन विभाग की झूठ पकड़ा तो अब जेसीबी से काटे रास्ते, खोदी खाई

-थाने में मामला दर्ज कराने के नाम पर साधी चुप्पी, पहाड़ी की कार्रवाई के बाद कामां में भी उठे रहे वन विभाग, पुलिस व स्थानीय प्रशासन पर सवाल

By: Meghshyam Parashar

Updated: 19 Sep 2020, 03:02 PM IST

भरतपुर/कामां. वन विभाग ने शुक्रवार को बृजांचल के वन सरंक्षित पहाड़ों में अवैध खनन रोकने के लिए रास्ते कटवा कर चारों ओर खाई खोद दी है, लेकिन खनन माफियाओं के खिलाफ रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हो सकी है। इन दिनों खनन माफियाओं के हौंसले बुलंद है। खनन माफिया शिकायत कर्ताओं के साथ हमला करने से भी नहीं चूक रहे हैं। पहाड़ी के गाधानेर में दो दिन पूर्व हुई घटना इसका स्पष्ट प्रमाण है। राजस्थान पत्रिका ने 18 सितम्बर को वन विभाग का झूठ पकड़ा...धड़ल्ले से हो रहा पहाड़ों पर अवैध खनन शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामले को उजागर किया था। इसमें कामां की चरण पहाड़ी पर खनन माफियाओं ने बचाव में पहाड़ के ऊपर से रस्सी बांध कर भागने को नया तरीका तलाश रखा है। वहीं पूर्व में खनन रोकने के लिए वन विभाग ने लाखों रुपए खर्च कर रास्ते काट दिए थे, लेकिन खनन माफियाओं ने रास्ते भरकर खनन का करोबार शुरू कर दिया था। वन विभाग ने टायरा, अकबरपुर, लेवड़ा, कनवाड़ी व 18 सितम्बर को चरण पहाड़ी को भी रास्ते काट कर खाइयां खोदने काम शुरू कर दिया है।
जानकारी के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद भी मखौल उड़ाया जा रहा है। इन्हें रोकने के लिए सरकार ने कर्मचारी तैनात कर रखे हंै और रास्ते काटकर बार-बार रोकने के प्रयास किए जा रहे हंै। आखिर अवैध खनन रुकने का नाम क्यों नहीं ले रहा है। इसके पीछे खास कारण है कि कामां व पहाड़ी में रसूख के दबाव में कार्रवाई नहीं की जाती है। पुलिस, खनिज विभाग, वन विभाग व प्रशासनिक अधिकारी एक-दूसरे पर पल्ला झाड़कर इतिश्री करने में जुटे रहते हैं। इसी तरह खनन माफियाओं ने गाधानेर, ठेकड़ा, ठेकका बास के चारागाह पहाड़ को छलनी कर दिया है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले कुछ सालों में इनका अस्तित्व ही मिट जाएगा। आखिर जब-जब चोरी से अवैध खनन होता रहा है। उस समय तैनात अधिकारियों ने मूकदर्शक बनकर तमाश किसके इशारे पर देखा। कार्रवाई से पहले उनकी जांच की जानी चाहिए कि आखिर किस रसूखदार नेता या अफसर या खननमाफिया के इशारे में यह सबकुछ हो रहा है। उनकी नैतिक जिम्मेदारी है कि सरकार को चोरी गए पत्थर का राजस्व वसूला जाना चाहिए।

-स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासन, पुलिस, खनिज विभाग, वन विभाग सभी मिलकर खननमाफियाओं का साथ दे रहे हैं। पिछले कुछ दिन के दौरान हुई कार्रवाई से यह सबकुछ स्पष्ट है। जरूरी है कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के साथ सरकार को इन विभागों के मुखियाओं की भी कॉल डिटेल के अलावा अन्य जांच करानी चाहिए। ताकि सारा खुलासा हो जाएगा।
बाबा हरिबोलदास

-गांव टायरा, अकबरपुर, लेवड़ा, कनवाड़ी, चरण पहाड़ी के अवैध खनन को रोकने के लिए जेसीबी मशीन से रास्ते काटकर चारों ओर खाई खोदी गई है।
विक्रम सिंह रेंजर वन विभाग कामां


इधर, राज्यमंत्री सुभाष गर्ग बोले: बंशी पहाड़पुर में अवैध की रोकथाम के लिए बनाया जाएगा प्रस्ताव

-मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है मामला

भरतपुर. तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा है कि भरतपुर जिले के बयाना-रूपवास में बंशी पहाड़पुर क्षेत्र में अवैध खनन को रोकने के लिए इस क्षेत्र को बंध बारैठा वन अभ्यारण क्षेत्र से डीनोटिफाई कर व उसके स्थान पर नए वन आधारित क्षेत्र को बंध बारैठा वन क्षेत्र में शामिल करने तथा क्षेत्र में खनन को लिगलाइज करने के लिए मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है। इससे क्षेत्र में अवैध खनन की रोकथाम होगी वहीं वैध खनन शुरू होने से राज्य सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी। वहीं क्षेत्र के हजारों परिवारों के आर्थिक हितों को संरक्षित किया जा सकेगा और लोग बेरोजगार नहीं होंगे।
तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री ने भरतपुर जिला कलेक्टर को क्षेत्र में अवैध खनन की रोकथाम के लिए मौका मुआयना कर यह प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे कि बयाना-रूपवास में बंशी पहाड़पुर बंध बारैठा वन अभ्यारण की रेंज में होने से डीनोटिफाई किया जाना चाहिए क्योंकि इस क्षेत्र के 20 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में किसी भी प्रकार के पेड़-पौधे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के आगे का क्षेत्र जिस पर वन व पेड़ है उस क्षेत्र को बंध बारैठा वन अभ्यारण क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि वह क्षेत्र वास्तव में वनक्षेत्र है। डॉ. सुभाष गर्ग ने भरतपुर जिला कलेक्टर को निर्देशित किया है कि वह अपनी अध्यक्षता में खान विभाग, वन विभाग एवं पर्यावरण विभाग की संयुक्त रूप से बैठक आयोजित कर बयाना—रूपवास में बंशी पहाड़पुर क्षेत्र को बंध बारैठा वन अभ्यारण क्षेत्र से डीनोटिफाई करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवाया जाना सुनिश्चित करें तांकि भारत सरकार के जरिए उच्चतम न्यायालय में प्रकरण को रखा जा सके।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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