अब सिपाही भी कर सकेंगे तफ्तीश, जिले से पीएचक्यू भेजे 117 के नाम

पुलिस महकमे में अब सिपाही यानी कांस्टेबल भी मुकदमों की तफ्तीश कर सकेंगे। विभाग में अनुसंधान अधिकारियों की चल रही कमी को पूरा करने के लिए हाल में पुलिस मुख्यालय ने यह निर्णय लिया है।

By: rohit sharma

Published: 06 Jan 2020, 11:08 AM IST

भरतपुर. पुलिस महकमे में अब सिपाही यानी कांस्टेबल भी मुकदमों की तफ्तीश कर सकेंगे। विभाग में अनुसंधान अधिकारियों की चल रही कमी को पूरा करने के लिए हाल में पुलिस मुख्यालय ने यह निर्णय लिया है। अनुसंधान के लिए चुने जाने वाले कांस्टेबलों के नाम पीएचक्यू ने मंागे हैं। जिस पर जिले से 117 कांस्टेबल मापदण्ड पर खरे उतर रहे हैं। इनकी सूची गत दिनों मुख्यालय भेजी गई है। गौरतलब रहे भरतपुर जैसे जिले में लम्बे समय से अनुसंधान अधिकारियों की कमी चल रही है। इस वजह से मुकदमों का निस्तारण समय पर नहीं हो पाता है और अनुसंधान अधिकारियों पर अतिरिक्त बोझ के चलते वह मानसिक तौर दबाव में रहते हैं। इस नई प्रक्रिया से पीडि़त को समय पर न्याय मिलने में मदद मिलेगी। वर्तमान में हैड कांस्टेबल से कम की रैंक का अधिकारी अनुसंधान नहीं कर सकता है। एसपी हैदरअली जैदी ने बताया कि पीएचक्यू के निर्देश पर जिले से 117 कांस्टेबलों की सूची भेजी गई है। ये कांस्टेबल सीआरपीसी के तहत अनुसंधान कर सकेंगे। इससे अनुसंधान में गति आएगी और पैडेंसी भी नियंत्रण में रहेगी।

ग्रेजुएट होगा नया अनुसंधान अधिकारी


नए अनुसंधान अधिकारी में उसी का चुनाव किया गया है जो स्नातक है। यानी जिसने ग्रेजुएट कर रखा है। इसके बाद उसकी कांस्टेबल की नौकरी करीब 8 साल हो चुकी है और 5 साल फील्ड में कार्य करने का अनुभव हो। जिले में इस पैमाने पर खरा उतरने वाले 117 कांस्टेबलों की सूची बना कर उसे पीएचक्यू भेजा गया है। पीएचक्यू से हरी झण्डी मिलने पर यह ये कांस्टेबल संबंधित थाने में अनुसंधान कर पाएंगे। ये केवल दण्ड संहिता प्रक्रिया (सीआरपीसी) के तहत जांच करेंगे।

जिले में एएसआई व एसआई की कमी


जिले में अनुसंधान अधिकारी के रूप में मुख्य भूमिका निभाने वाले एएसआई और एसआई की कमी बनी हुई है। इसमें एएसआई करीब 125 और एसआई करीब 52 हैं। जबकि कांस्टेबल में जिले में स्वीकृत नफरी से अधिक हैं। नफरी 1802 की है जबकि जिले में करीब 1850 कांस्टेबल हैं। वहीं हैड कांस्टेबल की नफरी 474 है।

12 हजार से अधिक दर्ज होते हैं मुकदमे


जिले के पुलिस थानों में दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या अधिक है। यह हर साल 12 हजार से अधिक मुकदमे दर्ज होते हैं। बीते साल जिले में 13484 मुकदमे दर्ज हुए जबकि वर्ष 2018 में 12145 मुकदमे सामने आए थे। इन मुकदमों की समय पर जांच के लिए अधिकारी नहीं होने से लम्बित प्रकरणों की संख्या बढ़ जाती है।

rohit sharma Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned