जहां से करोड़ों की कमाई, वहां 20 साल में भी सड़क तक नहीं बना सके अफसर

-अधिकारियों का ध्यान न राजनेताओं को फिक्र, अब रास्ते के नाम पर अवैध वसूली रोकने में भी नाकाम
- डीएमएफटी के फंड से इलाके में विकसित नहीं किया गया आधार भूत ढांचा

By: Meghshyam Parashar

Published: 01 Aug 2020, 03:16 PM IST

भरतपुर/पहाड़ी. जिस इलाके में खनन के नाम पर राज्य सरकार को सालाना करोड़ों रुपए का राजस्व मिलता है, उस इलाके में 20 साल गुजरने के बाद भी अधिकारी सड़क तक नहीं बना सके हैं। खराब स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खनन क्षेत्र में वाहनों के आवागमन के लिए कोई सड़क तक नहीं बन सकी। इसका परिणाम यह हुआ कि कच्चे रास्तों से जहां से वाहन निकलते हैं उन्हीं को समय-समय पर अवैध वसूली का दबंग हथियार बना लेते हैं। सरकार किसी की भी हो लेकिन रसूखदार हर सरकार में अपना प्रभाव जमाकर ऐसी अवैध वसूली को अंजाम देते रहे हैं। ऐसा संभव ही नहीं कि इतने बड़े पैमाने पर इलाके में वसूली होती रही और प्रशासन और पुलिस को उसकी खबर भी न हो। सवाल यह भी उठता है कि अगर सड़क का निर्माण ही करा दिया जाए तो रास्ते की मरम्मत व छिड़काव के नाम पर अवैध वसूली ही बंद हो जाएगी। हाल में ही अवैध वसूली का मामला तक दर्ज हो चुका है। पुलिस बताना चाहती है कि शिकायत आते ही उन्होंने मामला दर्ज कर लिया और अब गिरफ्तारी के लिए दबिश भी दे रही हैं लेकिन आरोपी हाथ नहीं लग रहे लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने आता है। असल में खनन क्षेत्र में जिस तरह ओवरलोडिंग व रास्ते के नाम पर चांदी कूटी जाती रही हैं उसमें हर कोई प्रभाव जमाना चाहता है। उल्लेखनीय है कि नांगल क्रशर जोन में रास्ते की मरम्मत व पानी का छिड़काव कराने के नाम पर 250 रुपए प्रति वाहन अवैध वसूली का मामला सामने आया था। हालांकि कुछ क्रशर संचालकों ने भी दबी जुबान में स्वीकार किया कि अगर बीओटी रोड का निर्माण ही सरकार की ओर से करा दिया जाए तो अवैध वसूली का यह सारा खेल खुद ही बंद हो जाएगा। इस प्रकरण की गोपनीय जांच भी प्रशासन की ओर से कराई गई है।

डीएमएफटी फंड में भी राजनीति का प्रभाव, सड़कों का नहीं होता निर्माण

राज्य सरकार ने 31 मई 2016 को अधिसूचना जारी कर खनन संचालन प्रभावित जिलों में गैर-लाभकारी निकाय के रूप में राज्य के प्रत्येक जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट की स्थापना के लिए डीएमएफटी नियम, 2016 लागू किया था। राज्य में सभी 33 जिलों में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट की स्थापना की गई थी। यह जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) एक गैर लाभकारी निकाय के रूप में स्थापित एक ट्रस्ट है। जो खनन कार्यो से प्रभावित जिलो में खनन से संबंधित कार्यों से प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्रो के हित और लाभ के लिए काम करता है। यह जिले मे प्रमुख या लघु खनिज रियायत के धारक के योगदान के माध्यम से वित्त पोषित है। जिला खनिज फाउंडेशन का उद्देश्य प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) में डीएमएफ योगदान और कल्याणकारी योजनाओं का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न विकासात्मक और कल्याणकारी योजनाओं/कार्यक्रमों को लागू करने, प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए करना है। पीएमकेकेकेवाई के अनुसार बजट का कम से कम 60 फीसदी उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में तथा 40 फीसदी धन का उपयोग अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में किया जाना चाहिए। उच्च प्राथमिकता में पीने के पानी की सप्लाई, प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, महिलाओं व बच्चों का कल्याण, वृद्ध और विकलांग लोगों का कल्याण, कौशल विकास, स्वच्छता हैं जबकि अन्य प्राथमिकता में भौतिक मूलढांचा, सिंचाई, ऊर्जा और वाटरशेड विकास, खनन क्षेत्र में पर्यावरण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उपाय किए जाना है, लेकिन पहाड़ी इलाके में उक्त ट्रस्ट के माध्यम से कोई काम होता नजर नहीं आ रहा है। यहां तक की जिस इलाके से इस ट्रस्ट को राशि जाती है उसके लिए आधारभूत ढांचा के रूप में रास्ते तक की व्यवस्था सरकार नहीं कर सकी है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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