scriptOur poor are eating 33 crores of wheat | सरकारी मसीहा की मेहरबानी, 33 करोड़ का गेहूं खा रहे हमारे गरीब | Patrika News

सरकारी मसीहा की मेहरबानी, 33 करोड़ का गेहूं खा रहे हमारे गरीब


- दो करोड़ का कमीशन ले रहे राशन डीलर
- अभी पोर्टल बंद, अभी एक लाख से ऊपर कतार में

भरतपुर

Published: May 09, 2022 09:05:14 am

भरतपुर . चुनावी बिसात बिछाने को सरकारें मसीहा बन बैठी हैं। इस बिसात पर गरीब मोहरा नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि सरकारें इन पर खुले दिल से पैसा लुटा रही हैं। महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही, लेकिन सरकारी दरियादिली बदस्तूर जारी है। जिले की बात करें तो यहां के गरीब प्रतिमाह 33 करोड़ रुपए का गेहूं खा रहे हैं। गरीबों के साथ डीलर भी निहाल हो रहे हैं। जिले में दो करोड़ रुपए का कमीशन राशन डीलर ले रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा योजना सरकारों की वैतरणी पार करने वाली मानी जा रही हैं। यही वजह है कि केन्द्र और राज्य सरकार गरीबों का पेट भरने में पीछे नहीं हट रही हैं। उत्तरप्रदेश चुनाव के दौरान भी मुफ्त का गेहूं सुर्खियां बटोरता नजर आया। अब आगामी दो साल चुनावी मानी जा रही हैं। ऐसे में मुफ्त में कटौती नजर नहीं आ रही है। इससे इतर बेकाबू महंगाई थामने का सरकारें कोई जतन करती नजर नहीं आ रही है। खास तौर से पेट्रोल और रसोई गैस के बढ़ते दामों ने आमजन की कमर तोड़ दी है, लेकिन राज्य और केन्द्र सरकार इस ओर कतई ध्यान देती नजर नहीं आ रहीं। अभी खाद्य सुरक्षा योजना के पोर्टल पर सरकार ने आवेदन लेकर उसे 30 अप्रेल से बंद कर दिया है, लेकिन अभी भी इस पर 52 हजार आवेदन लंबित हैं। इससे पहले यह पोर्टल 18 मार्च 2020 को बंद किया था। उस समय 22 हजार आवेदन पेंडिंग थे, जिनमें से विभागीय स्तर पर 12 हजार का निस्तारण कर दिया गया, जबकि 10 हजार आवेदन पेंडिंग रह गए थे। गेहूं का भाव 2200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से माना जाए तो 1 लाख 52 हजार क्विंटल के भाव 33 करोड़ 44 लाख रुपए के होते हैं।
सरकारी मसीहा की मेहरबानी, 33 करोड़ का गेहूं खा रहे हमारे गरीब
सरकारी मसीहा की मेहरबानी, 33 करोड़ का गेहूं खा रहे हमारे गरीब
धनाढ्य उठा रहे योजना का लाभ

कहने को तो सरकारें गरीबों की भलाई के लिए योजना संचालित कर रही हैं, लेकिन धनाढ्य जमकर इन योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। विभाग भले ही इ-मित्र के जरिए आवेदन लेकर पारदर्शिता के दावे कर रहा हो, लेकिन इसमें 'चूकÓ की गुंजाइश बनी ही रहती है। इसी का नतीजा है कि अभी भी बहुतेरे रसूखदार इस योजना का गेहूं डकार रहे हैं। विभागीय दावे की बात करें तो कुल परिवारों में 20 प्रतिशत लोग इस योजना को पलीता लगा रहे हैं, जबकि असलियत में इससे कहीं ज्यादा धनाढ्य इस योजना से निहाल हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन के अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं।
पौने तीन करोड़ डीलर और परिवहन के

गरीब भले ही करोड़ों रुपए का गेहूं हर माह खा रहे हों, लेकिन योजना की बात करें तो 2 करोड़ रुपए डीलरों को सरकार सिर्फ गेहूं बांटने का देती है। इसके अलावा राशन की दुकानों तक गेहूं पहुंचाने का खर्चा भी 70 लाख रुपए प्रतिमाह बैठता है। ऐसे में सरकार की बहुतेरी आमदनी गरीबों के भले के नाम पर खर्च हो रही है।
आंकड़ों में मुफ्त की कहानी
- 33 करोड़ 44 लाख का गेहूं बंट रहा प्रतिमाह
- 15 लाख 50 हजार लोग लाभ रहे हैं खाद्य सुरक्षा योजना का
- 3 लाख 34 हजार 500 परिवार जुड़े हैं योजना से
- 190 परिवार अन्नपूर्णा के
- 19784 अंत्योदय योजना में
- 98341 बीपीएल
- 14249 स्टेट बीपीएल
- 2 लाख 46 हजार 903 हैं अन्य
- 1 रुपए प्रति किलो अनाज मिलता है अंत्योदय, स्टेट बीपीएल एवं बीपीएल को
- 5 किलो गेहूं पूरी तरह मुफ्त है केन्द्र सरकार से
- 76 हजार क्विंटल मिलता है राज्य सरकार से
- 76 हजार क्विंटल मिलता है केन्द्र सरकार से
इस तरह हो रहा खर्चा

125 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन मिलता है राशन डीलर को
- 1014 राशन डीलर हैं जिले में
- 2 करोड़ रुपए प्रतिमाह कमीशन मिलता है डीलरों को
- 70 लाख रुपए प्रतिमाह खर्च होते हैं परिवहन पर
इनका कहना है

सरकार की योजना के मुताबिक चयनित परिवारों को राशन वितरण का लाभ दिया जा रहा है। राशन वितरण के लिए डीलरों का कमीशन तय है।

- सुभाषचन्द्र गोयल, जिला रसद अधिकारी भरतपुर

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