scriptPoliticians are only mining traders then how can they stop... | जब कांग्रेस के राजनेता ही खनन व्यापारी तो रोक कैसी...! | Patrika News

जब कांग्रेस के राजनेता ही खनन व्यापारी तो रोक कैसी...!

-राज्यमंत्री जाहिदा के प्रधान पुत्र के नाम दो लीज आवंटित, इसलिए वन संरक्षित घोषित करने में हुई देरी
- आदिबद्री व कनकांचल पर्वत पर आवंटित 46 लीजें हरियाणा व राजस्थान के रसूखदार व्यापारी व नेताओं की

भरतपुर

Published: July 23, 2022 12:55:10 pm

भरतपुर . आदिबद्री व कनकांचल पर्वत को राज्य सरकार ने वन विभाग को सौंप दिया है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह काम इतने सालों क्यों अटका रहा, देरी के पीछे जिम्मेदारों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि यहां कामां विधायक व राज्यमंत्री जाहिदा खान के बेटे पहाड़ी पंचायत समिति प्रधान साजिद खान के नाम से भी दो लीज आवंटित है। जिस समय इन दोनों पर्वतों को वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, उसके बाद भी राज्यमंत्री के बेटे की लीज पर स्टोन क्रशर लगाने के लिए एनओसी जारी कर दी गई। जाहिर है कि मंत्री का रुतबा इसमें आड़े आता रहा। ढिलाई का नतीजा यह रहा कि गांव पसोपा में 552 दिन के धरने के बाद विजयबाबा ने खुद को आग के हवाले कर दिया।
साधु-संतों के आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन जिला कलक्टर की ओर से 12 अक्टूबर 2021 को तहसील सीकरी व पहाड़ी की कुल 749.44 हैक्टेयर सिवायचक तथा 7.96 हैक्टेयर चारागाह मिलाकर कुल 757.40 हैक्टेयर भूमि को सघन वृक्षारोपण के लिए वन विभाग को हस्तांतरित करने, 62.55 हैक्टेयर खातेदारी एवं गैर खातेदारी भूमि पर खनन संबंधी सभी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव प्रमुख शासन सचिव राजस्व विभाग को भेजा गया। जिसके बाद लीजधारक न्यायालय में चले गए। इसमें मैसर्स साजिद मिनरल्स बनाम सरकार ने एक ही फर्म के नाम से दो याचिका दायर की। इसमें आदिबद्री पर्वत की शृंखला में पहाड़ी पंचायत समिति प्रधान साजिद खान के नाम से दो लीज संचालित हैं। इनमें एक पर कुछ माह पहले ही स्टोन क्रशर की एनओसी दी गई। यह क्रशर आंदोलन उग्र होने से पहले तक संचालित था। हालांकि अब भी लीजधारकों ने वन संरक्षित क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
जब कांग्रेस के राजनेता ही खनन व्यापारी तो रोक कैसी...!
जब कांग्रेस के राजनेता ही खनन व्यापारी तो रोक कैसी...!
बड़ा सवाल ...पहाड़ वन विभाग में, स्टोन क्रशर्स निजी खातेदारी भूमि पर

भले ही राज्य सरकार की ओर से आदिबद्री व कनकांचल पर्वत को वन विभाग को सौंप दिया गया है, लेकिन अभी बहुत सारा हिस्सा ऐसा है, जहां निजी खातेदारी व पहाड़ों के आसपास की जमीन पर 30 से ज्यादा स्टोन क्रशर संचालित हैं। अभी तक किसी भी आदेश में इनको लेकर कोई निर्णय नहीं आया है। अगर यह स्टोन क्रशर यहां लगे रहते हैं तो अवैध खनन रोक पाना मुश्किल होगा। क्योंकि वर्ष 2008 में कामां व डीग के बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में लीजों का आवंटन निरस्त करने के बाद यही परेशानी आई थी। इसके बाद स्टोन क्रशरों को भी हटाया गया था।
परेशानी ये भी...आवंटित लीज चार साल बाद निरस्त

वन संरक्षित क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद लीजधारकों के सामने भी एक बड़ी समस्या है। उनका कहना है कि विभाग की आवंटन से लेकर एनओसी की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि व्यापारी आर्थिक संकट से घिर जाता है। छपरा जोन में 2018 में 19 लीजों का ऑक्शन हुआ था। आज तक ईसी जारी नहीं हुई है। चार साल का समय होता है। इसके बाद निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसलिए हाइकोर्ट जाना पड़ा है। इसमें भी यही प्रक्रिया रहेगी तो लीजधारक तो परेशानी से ही जूझते रहेंगे।
बार-बार जनप्रतिनिधि उठाते रहे सवाल

-25 अगस्त 2021 को नगर के विधायक वाजिब अली ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। इसमें साजिद खान के नाम से आवंटित दो लीजों का भी जिक्र किया था। इसमें बताया था कि खनन सीमा से बाहर जाकर बड़ी मात्रा में अवैध खनन कर सरकार को हर माह करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा है। साधु-संत भी इस मामले को लेकर धरने पर बैठे हैं।
इनका कहना

-पहले से ही साधुओं की मांग का समर्थन किया है। खुद मैंने भी एक बार नियमों के दरकिनार कर अधिक खनन होने की शिकायत की थी। कुछ रसूखदारों को भी यहां लीज आवंटित है। इसी दबाव में दोनों पर्वतों को वन संरक्षित क्षेत्र घोषित करने में देरी की जाती रही है। साधुओं को साथ लेकर मंत्रियों से भी मुलाकात कराई थी।
वाजिब अली
विधायक, विधानसभा क्षेत्र नगर

- राज्य सरकार ने निर्णय लिया है। बाकी यह फोन पर करने की बात तो नहीं है। बाद में मीडिया को अवगत कराया जाएगा। जो निर्णय सरकार ने लिया है तो इसमें हम भी क्या कर सकते हैं।
साजिद खान
प्रधान, पंचायत समिति पहाड़ी

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