घोटाला...और अफसर चुप!

- बिना स्टोर प्रभारी के प्रमाणित बिल किए पास, वेरीफिकेशन टीम ने भी चलाई आपत्ति की कैंची

By: Meghshyam Parashar

Published: 13 Jan 2021, 01:30 PM IST

भरतपुर. राजकीय मेडिकल कॉलेज में पहुंचे डबल बेड और डाइनिंग टेबल सहित अन्य सामान कॉलेज के स्टोर से नदारद है, जबकि इसके बिल की राशि कॉलेज प्रशासन ने पास कर दी है। खास बात यह है कि इन बिलों को स्टोर प्रभारी ने प्रमाणित नहीं किया। इसके बाद भी कॉलेज प्रशासन ने मनमर्जी के चलते इन्हें पास कर लिया। अब वेरीफिकेशन टीम ने इस पर आपत्ति की कैंची चला दी है।
मेडिकल कॉलेज में यह बिल तमाम सरकारी कायदों को ताक पर रखकर पास किए गए हैं। अगस्त 2020 में मेडिकल कॉलेज में आवासों की शोभा बढ़ाने वाला कुछ सामान पहुंचा, लेकिन यह सामान स्टोर की सूची में नहीं आया। करीब एक लाख रुपए की राशि के खरीदे गए इस सामान के बिल जब स्टोर प्रभारी के पास पहुंचे तो उन्होंने इन्हें पास करने से इनकार कर दिया। इस पर कॉलेज प्रशासन ने खुद कलम थामी और तमाम सरकारी नियम-कायदों को धता बताते हुए बिलों को पास कर दिया। इसके बाद वेरीफिकेशन टीम ने स्टोर की पड़ताल की तो पाया कि अगस्त माह में आया कुछ सामान स्टोर में नहीं है। ऐसे में टीम ने इन पर आपत्ति की मुहर लगा दी है।

नहीं हुई एफआइआर, टीम भी बदली

राजकीय संपत्ति से क्रय किए गए सामान में से यदि कोई भी सामान गायब होता है तो नियमानुसार थाने पर एफआइआर दर्ज करानी होती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। इससे साफ जाहिर है कि कॉलेज प्रशासन की मंशा गायब हुए सामान के मामले में एफआइआर कराने की नहीं है। इससे यह भी स्पष्ट है कि कॉलेज प्रशासन सामान को गायब नहीं मान रहा है। खास बात यह है कि वेरीफिकेशन टीम ने गायब हुए सामान को सत्यापित नहीं किया तो वेरीफिकेशन टीम ही बदल दी गई। चूंकि सत्यापन करने वाली टीम स्थानीय कॉलेज की ही होती है। ऐसे में यह टीम पिछले दो-तीन माह में दो बार बदली जा चुकी है।

साहब के आवास की बढ़ा रहा शोभा

कॉलेज सूत्रों का दावा है कि शहर के अग्रवाल फर्नीचर से क्रय किया गया सामान एक साहब के आवास की शोभा बढ़ा रहा है। यह सामान कॉलेज में नहीं होने के कारण पहले स्टोर कीपर ने बिल पास करने में आपत्ति जताई। बाद में वेरीफिकेशन टीम ने भी इस सामान को स्टोर में नहीं देखकर आपत्ति जता दी है। अब यह सामान किस आवास की शोभा बढ़ा रहा है। यह जांच का विषय है।

इस सामान पर हुई आपत्ति

राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल के नाम बने बिलों में डबल बेड छह बाई छह, डायनिंग टेबल मय चेयर, मॉड्यूलर स्टूल एवं रिवॉल्विंग चेयर आदि सामान दर्ज है, लेकिन अब यह स्टोर में नहीं है। इसके अलावा एक बिल्डिंग की रंगाई-पुताई, पुट्टी आदि के बिल पर भी आपत्ति जताई गई है। इस पूरे सामान की कीमत के बिलों की राशि करीब एक लाख रुपए बताई जा रही है।

प्रिंसिपल बोले: अधिकृत ही नहीं है डबल बेड व डाइनिंग टेबल

जब पत्रिका ने मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. रजत श्रीवास्तव से बात करने की कोशिश की तो पहले उन्होंने कॉल का जबाव ही नहीं दिया। इसके बाद जब अननॉन नंबर से फोन किया तो परिचय देते ही बोले कि वह वीसी में है। अभी कोई बात नहीं कर सकते। इतने में ही जब उन्हें गायब सामान वाले प्रकरण के बारे में पूछा तो कहा कि अभी नहीं मालूम है, उनसे ही पूछिए। इसके बाद उन्होंने मैसेज कर कहा कि डबल बेड और डाइनिंग टेबल मेडिकल कॉलेज के लिए या फैकल्टी क्वार्टर के लिए अधिकृत नहीं है। गलत फीडबैक से आपको कौन गुमराह कर रहा है? कृप्या मुझे उसका नाम बताएं।


कर दी शिकायत तो नौकरी पर आंच, आत्महत्या की दी चेतावनी

भरतपुर . राजकीय मेडिकल कॉलेज में संविदा पर कार्य करने वाले स्टोर वेरीफायर कम क्लर्क ने प्राचार्य एवं नियंत्रक राजकीय मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखकर नौकरी जाने पर आत्महत्या करने की चेतावनी दी है। पत्र में प्रदीप कुमार प्रजापति ने लिखा है कि उसने तीन सालों में पूर्ण ईमानदारी एवं निष्ठा से कार्य किया। उसके पास केयर टेकयर का अतिरिक्त चार्ज भी रहा। ऐसे में उसने वर्किंग-डे व जीएच के दिनों में भी कार्य किया। पत्र मेे कहा है कि मेरी ज्वाइनिंग 12 जनवरी 2018 से 5 जनवरी 2021 तक प्राचार्य एवं नियंत्रक कार्यालय की ओर से या मेरे स्टोर विभाग की ओर से कोई भी शिकायत पत्र नहीं मिला है। पत्र में आरोप है कि मेरे अनुभव प्रमाण पत्र चाहने पर मुझे जवाब 'बेक डेटÓ में मिला। इसमें लिखा कि मेरे विरुद्ध अनियमितता चल रही है। ऐसे में प्रमाण पत्र नहीं मिल सकेगा। पत्र में सवाल उठाया है कि 5 जनवरी का पत्र मुझे 6 जनवरी को क्यूं मिला, जबकि कार्यालय एक ही बिल्डिंग में है। पत्र में कहा है कि मेरे सराहनीय कार्य के लिए मुझे कई बार सम्मान मिला है। पत्र में आरोप है कि एक एकाउंटेंट एवं प्राचार्य की ओर से मुझे पिछले तीन माह से प्रताडि़त किया जा रहा है। पत्र में आरोप है कि मैंने 30 दिसम्बर 2020 को लेखा शाखा के खिलाफ कमीशन के लालच का शिकायत पत्र कॉलेज कार्यालय को प्रस्तुत किया था। इसके चलते मुझे बिना मतलब फंसाया जा रहा है। 31 दिसम्बर को मुझे केयर टेकर का कार्य निष्ठा के साथ करने के लिए लिखा गया। इसके बाद भी मेरी सेवा अवधि में वृद्धि का अनुमोदन नहीं भेजा गया। पत्र में कहा है कि गलत नीतियों के चलते मेरी नौकरी जाती है तो मैं आत्महत्या कर लूंगा, जिसकी जिम्मेदार एकाउंटेंट एवं प्राचार्य व कॉलेज प्रशासन होगा।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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