नेतागिरी के साथ मेयर निभा रहे अपना धर्म, स्कूल बंद इसलिए गांव में बच्चों को दे रहे शिक्षा

-जुलाई माह से अब तक अंग्रेजी बोलना सीख चुके बच्चे, गणित व सामान्य ज्ञान की भी देते हैं जानकारी, अब भरतपुर में पढ़ाने की करेंगे व्यवस्था

By: Meghshyam Parashar

Published: 15 Nov 2020, 11:04 AM IST

भरतपुर. नगर निगम के मेयर अभिजीत कुमार ने नेतागिरी के साथ ऐसा बीड़ा उठाया है कि वे बड़ों के साथ बच्चों के भी चहेते बन गए हैं। कोरोनाकाल में सरकारी स्कूल बंद होने के बाद उन्होंने उच्चैन के पास स्थित पैतृक गांव नगला हीरापुर में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। ये सभी बच्चे अब अंग्रेजी में बोलने के साथी गणित व सामान्य ज्ञान में दक्षता प्राप्त कर रहे हैं। मार्च माह से कोरोना संक्रमण की आशंका के कारण राज्य सरकार की ओर से स्कूलों को बंद कर दिया गया था। जब गांव के कुछ बच्चे पढ़ाने की बात को लेकर मेयर अभिजीत कुमार के पास पहुंचे तो उन्होंने हां कर दिया। इसके बाद वह प्रतिदिन दो से ढाई घंटे बच्चों को पढ़ाने में समय देने लगे। अब जब बच्चों को पढ़ाने में समय को लेकर परेशानी आने लगी तो उन्होंने भरतपुर में ही बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था की है। इसके लिए एक स्कूल बस की भी व्यवस्था की गई है। बच्चों को यह सारी सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। मेयर अभिजीत ने बताया कि अक्सर कई बार गांव आने में समय लग जाता है। क्योंकि नगर निगम में भी काम देखने पड़ते हैं। इसलिए शहर में ही किराए पर मकान की व्यवस्था की गई है। ताकि गांव से प्रतिदिन बच्चों को यहां बुलाकर पढ़ाया जा सके। जुलाई माह से बच्चों को पढ़ा रहा हूं। कोई भी आकर देख सकता है कि बच्चों की शिक्षा में कितना अंतर आया है। वह अंग्रेजी में काफी कुछ सीख चुके हैं और अंग्रेजी बोलते भी हैं। गणित व सामान्य ज्ञान में उनका हुनर दिखने लगा है।

शुरुआत में थे 10 बच्चे, अब आसपास के गांवों से भी आए

मेयर अभिजीत बताते हैं कि शुरुआत में कुछ बच्चों ने आकर बताया कि सरकारी स्कूल बंद होने से उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। इस पर उन्हें समय देना शुरू कर दिया। अब आसपास के गांवों के ग्रामीण भी बच्चों को पढ़ाने के लिए भेज रहे हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग व कोरोना गाइडलाइन की पालना को लेकर उन्हें अभी मना करना पड़ता है। गांव में जगह की उपलब्धता इतनी नहीं है। जल्द ही शहर में व्यवस्था कर इन्हें पढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मेयर बनने से पहले भारतीय राजस्व सेवा का अधिकारी भी रहा हूं, इसलिए बच्चों की पढ़ाई को लेकर स्वयं की जिम्मेदारी भी समझता हूं।

बोले: बच्चों को अंग्रेजी में बात करता देख होता है गर्व

मेयर अभिजीत बताते हैं कि शुरुआत में जब बच्चों को पढ़ाना शुरू किया तो परेशानी आई, लेकिन बच्चे वास्तव में होशियार हैं। अब जब वो अंग्रेजी में सवाल पूछते हैं और आपस में बात करते हैं तो बड़ा गर्व का अनुभव होता है। क्योंकि भले ही स्कूल नहीं खुले, लेकिन पढ़ाई को बाधित नहीं होने दिया गया।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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