scriptShakti will be worshiped from February 2, Gupt Navratri till 10 | माघ माह में दो फरवरी से होगी शक्ति की भक्ति, गुप्त नवरात्र 10 तक | Patrika News

माघ माह में दो फरवरी से होगी शक्ति की भक्ति, गुप्त नवरात्र 10 तक

-पांच फरवरी को रहेगी बसंत पंचमी

भरतपुर

Published: January 21, 2022 11:20:14 am

भरतपुर. माघ माह की गुप्त नवरात्र दो फरवरी से शुरू होंगी। खास बात यह है कि इन नौ दिनों के दौरान मां सरस्वती का जन्मोत्सव भी रहेगा। इसके अलावा कई शुभ योग भी रहेंगे। इन योगों में की गई पूजा, दान-पुण्य व खरीद-फरोख्त विशेष फलदायी व समृद्धिकारक रहेगी। गुप्त नवरात्र का समापन 10 फरवरी को होगा। नए साल की यह पहली नवरात्र है।
पं. राममोहन शर्मा ने बताया कि माघ माह में पवित्र नदी, कुंड या तालाब में स्नान-दान करने का जितना महत्व है, उतना ही महत्व गुप्त नवरात्र में व्रत रखकर मां दुर्गा काली की साधना उपासना करने का है। नवरात्र के दौरान चार फरवरी को विनायकी चतुर्थी, पांच को सरस्वती प्रकटोत्सव बसंत पंचमी, सात फरवरी को शीतलाष्टमी, आठ को अचला सप्तमी और 10 को नवरात्र के समापन दिवस पर महानंदा नवमी रहेगी। गणेशजी, मां सरस्वती, मां महानंदा की पूजा का भी विशेष अवसर मिलेगा। इस कारण नवरात्र की साधना अधिक फलदायी रहेगी। इसके चलते छह, आठ और नौ फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। पं. मनु मुदगल ने बताया कि वर्ष में चार नवरात्र होती हैं। इनमें शारदीय व चैत्र नवरात्र प्रकट और माघ व आषाढ़ में होने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। गुप्त नवरात्र में देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी, परंतु श्रद्धालुओं की संख्या सीमित ही रखी जाएगी। गुप्त नवरात्र को घर में रहकर साधना करना ही अधिक श्रेष्ठ है। मां दुर्गा के अनेक भक्त नौ दिन उपवास रखकर सप्तशती व चालीसा आदि का पाठ कर विभिन्न प्रकार की साधनाएं करते हैं। इससे उनके आत्मबल में भी वृद्धि होती है। यह नवरात्र शक्ति की पूजा लिए खास मानी जाती है।
माघ माह में दो फरवरी से होगी शक्ति की भक्ति, गुप्त नवरात्र 10 तक
माघ माह में दो फरवरी से होगी शक्ति की भक्ति, गुप्त नवरात्र 10 तक
26 की दोपहर 3.49 बजे तक धनु राशि में रहेंगे मंगल

ग्रहों के सेनापति मंगल देव रविवार शाम से वृश्चिक राशि को छोड़कर धनु राशि में प्रवेश कर लिया। मंगल के गोचर परिवर्तन से कई राशियों के जातकों को शुभ फल मिलेंगे। ज्योतिर्विदों के अनुसार नौ ग्रहों में मंगल को ग्रहों का सेनापति व भूमि पुत्र माना जाता है। मंगल 26 फरवरी को दोपहर 3.49 बजे तक धनु राशि में ही रहेंगे। धनु राशि में मंगल और शुक्र ग्रह एक साथ युति करेंगे। वैदिक ज्योतिष में मंगल की युति और शुक्र का विशेष महत्व माना गया है।
सर्वार्थ सिद्धि योग में आज तिलकुटा चौथ

इस साल 21 जनवरी को तिलकुटा चौथ का व्रत रहेगा। यह व्रत माद्य कृष्ण चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस दिन महिलाएं पुत्र की दीर्घायु व परिवार की खुशहाली के लिए दिनभर निराहार रहकर व्रत करेंगी और शाम को चौथ माता व गणेशजी की कहानी सुनेंगी। रात्रि को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं। इस चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी, माद्यी चौथ, तिल चौथ आदि नामों से जाना जाता है। चतुर्थी तिथि 21 जनवरी को सुबह 8.52 बजे से 22 जनवरी को सुबह 9.15 बजे तक रहेगी। वहीं सौभाग्य योग सुबह 7.20 बजे से दोपहर तीन बजकर चार मिनट तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग व सौभाग्य योग, ऐश्वर्य, सुख समृद्धि व संपन्नता के प्रतीक माने जाते हैं।
इस माह यह उपवास भी आएंगे

-शुक्रवार 28 जनवरी को माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे षटतिला एकादशी कहते हैं। पद्म पुराण के अनुसार इस एकादशी पर तिल का छह तरह से उपयोग करना चाहिए। इनमें तिल का उबटन, तिल से नहाना, भगवान को तिल का नैवेद्य लगाना, तिल खाना, तिल से हवन और तिल का दान करना चाहिए।
-शनिवार 29 जनवरी को माघ कृष्ण पक्ष की द्वादशी है। इसे तिल द्वादशी कहते हैं। इस दिन तिल मिले पानी से भगवान विष्णु का अभिषेक और पूजा कर तिल से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। इस व्रत और पूजा से मनोकाना पूरी होती हैं और हर परेशानी दूर होती है।
-मंगलवार एक फरवरी को माघ मास की अमावस्या रहेगी। इसे मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन पितरों के धूप-ध्यान करें। किसी पवित्र नदी में स्नान और दान-पुण्य करें।

-बुधवार दो फरवरी को गुप्त नवरात्र का पहला दिन है।
-शुक्रवार चार फरवरी को माघ माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थीहै। शनिवार पांच फरवरी को बसंत पंचमी है।

-शनिवार 12 फरवरी को जया एकादशी रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु और उनके अवतार श्रीकृष्ण की पूजा करें। बाल गोपाल को तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
-रविवार 13 फरवरी को कुंभ संक्रांति रहेगी। सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और तीर्थ दर्शन करने का विशेष महत्व है।

-बुधवार 16 फरवरी को माघ मास की आखिरी तिथि यानी पूर्णिमा रहेगी। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करें और दान-पुण्य करें। पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा करने की भी परंपरा है।

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