कंपनी बड़ी या अफसर: एक ही कंपनी की देरी से सूख रहे कंठ, फिर भी सरकार मेहरबान

-प्रतिभा कंपनी के पास 226 गांवों में चंबल प्रोजेक्ट का काम, राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग भी जता चुके नाराजगी, विधायकों की शिकायत का भी नहीं कोई असर, रसूख के दबाव में अटक रही कार्रवाई, कुम्हेर, डीग, नगर के गांवों में नहीं पहुंचा चम्बल का पानी

By: Meghshyam Parashar

Published: 20 May 2021, 02:13 PM IST

भरतपुर. सियासत का केन्द्र रहे चम्बल जल ने शहरों को तो करीब-करीब सुकून दे दिया है, लेकिन गांव अभी भी नीर की पीर सह रहे हैं। देरी से परियोजना को भी खूब पलीता लगा है, लेकिन हर बार हिदायत से ज्यादा कुछ नहीं हो सका हे। जिले के कुम्हेर, डीग एवं नगर कस्बे में तो चम्बल का पानी पहुंच गया हे, लेकिन गांव अभी इसके लिए तरस रहे हैं। नगर के गांवों से पानी आगे नहीं बढऩे के कारण कामां और पहाड़ी की प्यास अभी भी अधूरी है। बात यहां पर ही खत्म नहीं होती, बल्कि प्रतिभा कंपनी की लापरवाही बार-बार उजागर होने के बाद भी उस पर कार्रवाई नहीं होना बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। कभी पैनल्टी लगने के बाद भी सरकार की मेहरबानी तो कभी रसूख के दबाव में प्रशासनिक अधिकारियों का कार्रवाई नहीं करना कहीं न कहीं अंदरखाने मिलीभगत को भी उजागर कर रहा है। जबकि हकीकत यह है कि अब इस कंपनी को ब्लेक लिस्ट कर देना चाहिए था।
कुम्हेर क्षेत्र की बात करें तो यहां काम कर रही श्रीराम कंपनी ने अपना काम पूरा कर सप्लाई शुरू कर दी है, लेकिन दूसरी कंपनी प्रतिभा की लेटलतीफी के चलते यहां लोगों की प्यास अब तक नहीं बुझ सकी है। सियासी दावों में इस बार की गर्मियों में ही लोगों के हलक तर करने के दावे किए गए थे, लेकिन दावे, हकीकत में नहीं बदल सके। इसके अलावा कुम्हेर एवं भरतपुर के 226 गांवों की परियोजना का काम अभी भी अधर में लटका हुआ है। हालांकि विभागीय दावे हैं कि नगर के गांवों में पानी की टेस्टिंग शुरू हो गई है, लेकिन जमीनी हकीकत अभी दूर नजर आ रही है। विभागीय दावों में कामां-पहाड़ी के लिए मैन लाइन डलने की बात कही जा रही है, लेकिन इसके उलट नगर के गांवों तक पानी पहुंचने का अनुमान इस बार की सर्दियों तक का है। ऐसे में कामां-पहाड़ी तक पानी कब पहुंचेगा। इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। सूत्रों का दावा है कि काम की गति का हाल यही रहा तो अगली गर्मी भी लोगों को टैंकरों के सहारे बितानी होंगी। भरतपुर और कुम्हेर के 226 गांवों में पानी पहुंचाने का काम मुम्बई की प्रतिभा कंपनी के पास है, लेकिन कंपनी काम नहीं कर रही। इसके चलते दूसरी कंपनी को इसका काम देने पर मंथन उच्च स्तर पर चल रहा है। बताते हैं कि प्रतिभा कंपनी ने यह काम शुरू ही नहीं किया है। ऐसे में लोग अभी तक पानी की आस लगाए बैठे हैं। कामां-पहाड़ी में केसीसी कंपनी द्वारा ट्रांसमिशन का काम किया जा रहा है। जी इन्फ्रा कंपनी डीग में काम कर रही है। इसने भी अपने हिस्से का करीब-करीब कर दिया है और नगर में इसका काम चल रहा है। सूत्रों ने बताया कि प्रतिभा कंपनी के कारण अटके कार्य को अब जी इन्फ्रा को देने पर विचार चल रहा है। पहले भी सूर्यदीप कंपनी को यह काम दिया गया था, लेकिन वह इस काम को पूरा नहीं कर सकी।

पांच दिन में एक बार मिल रहा पानी

जिले में चम्बल का पानी भले ही सियासत के केन्द्र में हो, लेकिन सूखते हलक कभी भी केन्द्र में नहीं आ सके हैं। कामां-पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में लोगों को चार से पांच दिन में एक बार पानी मिल रहा है। इससे लोग काफी आहत हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों से भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन नतीजा अब तक सिफर ही रहा है।

विधायक लगा चुके हैं आरोप

नगर के गांवों में पानी नहीं पहुंचने के मामले में नगर विधायक वाजिब अली सरकार से शिकायत कर चुके हैं। अप्रेल माह में की गई शिकायत में अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। विधायक ने शिकायत में कहा था कि परियोजना का कार्य पूर्व में आईवीआरसीएल इन्फ्रा लिमिटेड हैदराबाद की कंपनी को वर्ष 2013 में दिया गया। जलदाय विभाग ने कंपनी को परियोजना की धीमी प्रगति के लिए नोटिस के साथ हर्जाना राशि करीब 14 करोड़ की कटौती भी की। विभाग ने पांच वर्ष बाद 2018 में कंपनी से परियोजना का अनुबंध समाप्त की सिफारिश की। आईवीआरसीएल ने इस कार्य को अपने स्तर पर जीए इन्फ्रा प्रा.लि. को सबलेट के रूप में आवंटित कर दिया। कार्य शुरू करने के दौरान ही पूर्व में काटी गई हर्जाना राशि 14 करोड़ रुपए को विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकार से वापस करा ली। विधायक का आरोप है कि विभाग एक तरफ तो कंपनी से परियोजना के शेष कार्यों को रद्द करने की सिफारिश कर रहा था तथा शेष कार्य आईवीआरसीएल की जोखिम एवं लागत पर अन्य एजेंसी से संपादित कराने की कह रहा था। दूसरी ओर जीए ने मिलीभगत कर 14 करोड़ की हर्जाना राशि को सरकार से वापस ले ली। अधिकारियों ने मिलकर उसने सरकार को 14 करोड़ का चूना लगा दिया।

हकीकत...15 मई को राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग भी हुए थे नाराज

जिले में लंबे समय से चल रहे चंबल प्रोजेक्ट की उलझन अब तक समाप्त नहीं हो सकी है। पिछले कुछ माह पहले राजस्थान पत्रिका की ओर से यह मुद्दा उठाने के बाद कंपनियों को नोटिस जारी किए गए थे। क्योंकि कंपनी ने कार्य को ही सबलेट कर रखा था। 15 मई को चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग की वीसी के माध्यम से हुई बैठक में भी यह मामला दुबारा उठाया था। बैठक में राज्यमंत्री गर्ग ने कहा था कि चंबल परियोजना प्रतिभा के स्थान पर जी इन्फ्रा को कार्यादेश जारी होने के बाद भी कार्य शुरू न करने पर नोटिस जारी किया जाए। साथ ही जिला कलक्टर राज्यस्तर पर भी वार्ता करें। हालांकि अभी तक जिला कलक्टर के स्तर पर भी इस मामले को लेकर कोई भी वार्ता या कार्रवाई की बात सामने नहीं आई है।

इनका कहना है

भरतपुर-कुम्हेर के 226 गांवों का पैकेज प्रतिभा कंपनी के पास है। यह कंपनी ठीक कार्य नहीं कर रही। ऐसे में काम में देरी हो रही है। डीग एवं नगर कस्बों में पानी शुरू कर दिया है। गांवों का काम चल रहा है। टेस्टिंग शुरू हो गई है। कामां-पहाड़ी में भी ट्रांसमिशन का काम शुरू हो गया है। काम जल्द से जल्द करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

- महेन्द्र चेचीवाल, एक्सईएन चम्बल परियोजना

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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