जानिए रक्षाबंधन पर आखिर 29 साल बाद आ ही गया ऐसा शुभ संयोग

-दोपहर 1.11 से 3.26, शाम 7.19 से 8.54 बजे तक बहनें बांध सकेंगी भाइयों को राखी, रक्षाबंधन तीन अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन समसप्तक योग और त्रियोग का संयोग बन रहा है।

By: Meghshyam Parashar

Updated: 02 Aug 2020, 04:09 PM IST

-दोपहर 1.11 से 3.26, शाम 7.19 से 8.54 बजे तक बहनें बांध सकेंगी भाइयों को राखी
भरतपुर. रक्षाबंधन तीन अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन समसप्तक योग और त्रियोग का संयोग बन रहा है। तीन अगस्त को पूर्णिमा में सूर्य, शनि का सप्तक योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, सोमवती पूर्णिमा, श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाड़ा नक्षत्र और आखिरी सावन सोमवार का एक साथ पडऩा इस पर्व के महत्व को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसा संयोग 29 साल पहले सन 1991 में बना था। कामवन शोध संस्थान के निदेशक डॉ. रमेशचंद्र मिश्र ने बताया कि रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस संबंध में पौराणिक कथा भी प्रसिद्ध है, देवों और दानवों के युद्ध में जब देवता हारने लगे तब वे देवराज इंद्र के पास गए। देवताओं को भयभीत देखकर इंद्राणी ने उनके हाथों में रक्षासूत्र बांध दिया। इससे देवताओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने दानवों पर विजय प्राप्त की। तभी से राखी बांधने की प्रथा शुरू हुई। पुराणों में यह जिक्र भी मिलता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर बलि राजा के अभिमान को इसी दिन चकानाचूर किया था। इसलिए यह त्योहार 'बलेवÓ नाम से भी प्रसिद्ध है। एक अन्य मान्यता के मुताबिक ऋषि-मुनियों के उपदेश की पूर्णाहुति इसी दिन होती थी। पं. राममोहन शर्मा ने बताया कि भद्रा के वक्त राखी बांधने से बचना चाहिए। इस बार भद्रा दो अगस्त की रात से भद्रा शुरू होगी जो कि तीन अगस्त को सोमवार के दिन पूर्णिमा तिथि पर सुबह 9.28 बजे रहेगी। इस दौरान राखी बांधना वर्जित होगा। 9.28 के बाद दिनभर शुभ मुहूर्त में बहनें राखी बांध सकेंगी।

बहिष्कार: इस बार स्वदेशी राखी सभी जगह... चाइनीज कहीं नहीं

हर साल रक्षाबंधन के लिए बड़े स्तर पर राखियों का आयात चीन से होता है, लेकिन इस बार चीन से मतभेद को देखते हुए प्रदेश समेत देशभर के व्यापारियों ने चाइनीज राखियों का बहिष्कार कर दिया है। इसका असर भी दिख रहा है। शहर के बाजार में ज्यादातर चाइनीज राखियां नहीं है। चीनी उत्पादों के बहिष्कार के लिए चलाए जा रहे अभिमान का भी इस पर काफी असर पड़ा है। हालांकि पिछले कुछ सालों की तुलना इस बार राखियों पर महंगाई की भी मार देखी जा रही है।

पिछले साल सितंबर में आए त्यौहार इस बार अगस्त में

1. भादो मास के कृष्ण पक्ष 6 अगस्त को मनाई जाएगी कजरी तीज
भादो मास के कृष्ण पक्ष छह अगस्त को इस बार कजरी तीज का त्योहार मनाया जाएगा, जबकि पिछले साल यह पर्व 18 अगस्त को मनाया गया था। इसे बूढ़ी तीज भी कही जाती है। इस दिन माहेश्वरी वैश्य जौ, गेहूं, चने और चावल के सत्तू में घी, मेवा डालकर उससे भिन्न-भिन्न पकवान बनाते हैं और चंद्रोदय के बाद उसी का भोजन करते हैं।

2. हरतालिका तीज 21 को

हरतालिका तीज सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग को अखंड बनाए रखने के लिए कठिन व्रत रखती हैं। इस साल हरतालिका तीज 21 अगस्त को मनाई जाएगी, जबकि बीते साल यह पर्व दो सितंबर को पड़ा था। इस साल हरताालिका तीज 21 अगस्त को मनाई जाएगी। 22 अगस्त को चतुर्थी चंद्र पूजन जिसे चौरचन कहते हैं रात्रि में चंद्रमा को अघ्र्य देकर महिलाएं इस व्रत का अनुष्ठान करती हैं और हाथ में फल लेकर सभी लोग चंद्रमा का दर्शन करते हैं। इससे व्रत के फल की प्राप्ति होती है।

3. गणेश चतुर्थी व्रत 22 को

भाद्र शुक्ल चतुर्थी गणेश चतुर्थी कहलाती है। यूं तो प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी गणेश के पूजन और उनके नाम का व्रत रखने का विशिष्ट दिन है। इस बार गणेश पूजा 22 अगस्त को मनाया जाएगा, जबकि पिछले साल 2 सितंबर को मनाया गया था। श्रीगणेश जी देव समाज में सर्वोपरि स्थान रखते हैं। उनका जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय हुआ था। 25 अगस्त को संतान सप्तमी, 26 अगस्त को राधा अष्टमी और 29 अगस्त को पदमा एकादशी, कर्मा धर्मा व्रत मनाया जाएगा।

4. भाद्र कृष्ण अष्टमी को जन्माष्टमी 11 और 12 को

भाद्र कृष्ण अष्टमी को जन्माष्टमी का उत्सव इस बार 11 और 12 अगस्त को मनाया जाएगा, जबकि यह पर्व बीते साल 23 और 24 अगस्त को मनाया गया था। इस बार कोरोना संक्रमण को लेकर औपचारिक पूजा-अर्चना ही होगी। कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मथुरा नगरी में असुर राज कंस के कारागृह में देवकी की आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस तिथि को रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व है। श्रीकृष्ण का जन्माष्टमी बुधवार रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि के समय वृष के चंद्रमा में हुआ था। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और जया एकादशी व्रत है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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