महामारी में ऐसी खुली लूट...जानकर चौंक जाएंगे आप

महामारी में भी मौका ढूंढ रहे निजी अस्पताल, चार हजार में हो रही सिटी स्केन की जांच
-आरबीएम में सरकारी रेट 800 में हो रही जांच

By: Meghshyam Parashar

Updated: 04 May 2021, 04:56 PM IST

भरतपुर. महामारी के दौर ने हर किसी को मुश्किल में डाल दिया है, लेकिन निजी लैब एवं अस्पताल इस महामारी में भी मौका ढूंढते नजर आ रहे हैं। कोरोना से प्रभावित हो रहे फेंफड़ों की वास्तविकता जांचने के लिए चिकित्सक सिटी स्केन की सलाह दे रहे हैं। इस बीच आरबीएम में बढ़ती भीड़ से इतर लोग निजी लैब एवं अस्पतालों में जांच के लिए पहुंच रहे हैं। यहां मरीजों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। सिटी स्केन की जांच के मरीज से चार हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं, जबकि पहले यह जांच 800 से एक हजार रुपए के बीच हो रही थी। अब भी इसकी सरकारी दर महज 800 रुपए ही है। कोरोना से संक्रमित हो रहे लोग इन दिनों बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। आरबीएम अस्पताल में मरीजों का लोढ़ बढऩे के कारण मजबूरन निजी चिकित्सालयों में जा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना वायरस फेंफड़ों को भी प्रभावित कर रहा है। ऐसे में पॉजिटिव आने वाले लोगों की सिटी स्केन कराई जा रही है, इससे उनके फेंफड़ों की वास्तविक स्थिति का पता लगाकर उपचार किया जा सके, लेकिन निजी अस्पताल संचालक इस संकट काल में मनमर्जी के दाम वसूल करते नजर आ रहे हैं। हाल ही में एक व्यक्ति ने निजी अस्पताल में सिटी स्केन की जांच कराई थी। निजी अस्पताल ने इस जांच के लिए उसने चार हजार रुपए वसूल किए, जबकि पहले यह जांच एक हजार रुपए तक में की जा रही थी।

आरबीएम में प्रतिदिन 100 जांच

कोरोना काल में आरबीएम पर भी जांचों का खासा दवाब बढ़ गया है। आरबीएम में इन दिनों सिटी स्केन की प्रतिदिन करीब 80 से 100 जांच हो रही हैं। सरकारी स्तर पर इसकी कीमत 800 रुपए वसूल की जा रही है। आरबीएम में पहले यह जांच महज 20 से 30 तक ही हो रही थी। अब यकायक जांचों की संख्या बढ़ गई है। आरबीएम में जांच को उमड़ती भीड़ से बचने के लिए कुछ लोग निजी अस्पताल जा रहे हैं, जहां मरीजों से मनमाफिक दाम वसूल किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि आरबीएम की मशीन पुरानी होने के कारण ज्यादा मरीजों की जांच नहीं हो पा रही। ऐसे में मजबूरन लोग निजी अस्पताल जा रहे हैं।

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आप निरीक्षण करते रहेंगे, आम आदमी रोता रहेगा

इस समय जिला प्रशासन का अफसर हो या नेता या फिर कोई और, हर कोई व्यवस्थाओं को सुधारने का दावा कर रहा है, लेकिन आम और खास का अंतर कोई समझ नहीं पा रहा है। क्योंकि आम पर किसी का ध्यान नहीं है। सबसे ज्यादा पीडि़त आम आदमी ही है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे वर्ग को जल्द से जल्द राहत प्रदान करे। ताकि बीमारी के साथ ही वह इलाज के लिए कर्ज के बोझ तले न दब जाए। यह जिम्मेदारी भी खुद जिला प्रशासन को उठानी चाहिए। चूंकि निरीक्षणों से ज्यादा आवश्यक है कि व्यवस्थाओं को समझ कर उन्हें सुधारने की दिशा में कदम उठाया जाए। वरना जांच और इलाज के नाम पर शोषण करने वाला एक और माफिया गिरोह पैर पसारता जाएगा।

इनका कहना है

आरबीएम में प्रतिदिन करीब 80 से 100 जांच की जा रही हैं। सरकारी रेट के हिसाब से मरीज से 800 रुपए वसूल किए जा रहे हैं।

- अमन चौधरी, प्रभारी सिटी स्केन आरबीएम भरतपुर

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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