महाष्टमी पर सुकर्मा योग, महानवमी पर रवियोग

-नवरात्र में कन्या पूजन के दो विशेष दिन

By: Meghshyam Parashar

Updated: 13 Oct 2021, 08:12 AM IST

भरतपुर. इस बार शारदीय नवरात्र का समापन आठ दिन में हो जाएगा। नवरात्र की अष्टमी तिथि का पूजन 13 अक्टूबर को और नवमी तिथि का पूजन 14 अक्टूबर को किया जाएगा। महाष्टमी पर इस बार सुकर्मा और महानवमी तिथि पर रवियोग रहेगा। ऐसे में दोनों में कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। पं. मनु मुदगल ने बताया कि पंचांग में तिथि का समय बढऩे घटने का कारण कई बार नवरात्र नौ दिन के तो कई बार आठ दिन में ही नवरात्र का समापन हो जाता है। इस कारण भक्तों में अष्टमी व नवमी तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है। इस बार शारदीय नवरात्र का समापन भी आठ दिनों में ही हो जाएगा।
प्रत्येक माह में शुल्क पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत किया जाता है, लेकिन नवरात्र में आने वाली दुर्गा अष्टमी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां आदिशक्ति के अष्टम स्वरूप महागौरी का पूजन किया जाता है। इसी के साथ अष्टमी तिथि पर व्रती अपने घरों में हवन भी करवाते हैं। यह तिथि परम कल्याणकारी और यश-कीर्ति व समृद्धि दिलाने वाली मानी गई है। नवरात्र के आखिरी दिन नवमी तिथि को समस्त सिद्धि प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। नवरात्र में नवमी तिथि का भी विशेष महत्व माना गया है। शारदीय नवरात्र अष्टमी तिथि 12 अक्टूबर की रात नौ बजकर 47 मिनट से 12 अक्टूबर की रात आठ बजकर सात मिनट तक रहेगी। इसी तरह नवमी तिथि व शुभ मुहूर्त 13 अक्टूबर की रात आठ बजकर सात मिनट से 14 अक्टूबर की शाम छह बजकर 52 मिनट तक रहेगी।

सर्वार्थ सिद्धि व रवि योग में मनेगा विजयदशमी पर्व

बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक पर्व विजदशमी इस बार सर्वार्थसिद्धि, कुमार एवं रवि योग में मनाया जाएगा। प्रमुख ज्योतिषियों के अनुसार 15 अक्टूबर को सर्वार्थसिद्धि योग एवं कुमार योग सूर्योदय से सुबह 9.16 तक तथा रवि योग पूरे दिन रात रहेगा। दशमी तिथि 14 अक्टूबर को शाम 6.52 बजे से प्रारंभ होकर 15 अक्टूबर को शाम छह बजकर दो मिनट बजे समाप्त होगी। श्रवण नक्षत्र 14 अक्टूबर को सुबह 9.36 बजे से प्रारंभ, श्रवण नक्षत्र समाप्त 15 अक्टूबर को सुबह 9.16 बजे, पूजन का समय 15 अक्टूबर दोपहर दो बजकर दो मिनट से लेकर दोपहर दो बजकर 48 मिनट तक रहेगा। विजयदशमी सर्वसिद्धिदायक तिथि मानी जाती है। इसलिए इस दिन सभी शुभ कार्य फलदायी माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दशहरा के दिन भवन निर्माण, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, अन्नप्राशन, कर्ण छेदन, यज्ञोपवीत संस्कार और भूमि पूजन आदि कार्य शुभ माने गए हैं। विजयदशमी के दिन केवल विवाह संस्कार को निषेध माना गया है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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