'धन्यवाद भरतपुर नौ दिन और दिखाना है ऐसा ही साहस

-सुबह से देर शाम तक जनता कफ्र्यू में जिलेभर के बाजारों में पसरा रहा सन्नाटा
-शाम के समय सब्जी, परचून की कुछ दुकानें खुली, फिर भी भीड़ नहीं आई नजर

भरतपुर. जब विदेशी आक्रांताओं पर विजय पाने में हमारा भरतपुर कभी पीछे नहीं रहा तो इस बार लड़ाई पूरे देश के लिए है। भरतपुर ने सुबह से लेकर देर शाम निर्धारित समय तक साहस का परिचय दिया। बाजारों में इस कदर सन्नाटा पसरा नजर आया कि मानिए शहर में की जनता घरों में कैद है। शाम को पांच बजे ही मकानों की छतों पर घंटा-घडिय़ाल, थाली बजाने की आवाज गूंज उठी। करीब 10 से 25 मिनट शहर में एक साथ इसकी गूंज सुनाई दी। मतलब साफ था कि भरतपुर की जनता ने कोरोना वायरस से सुरक्षा का विकल्प अपनाते हुए सरकार की गाइडलाइन का भी पालन किया और जागरूक भी हुए हैं। कुछ बुजुर्गों का यह भी मानना है कि पहली बार ऐसा कफ्र्यू नजर आया है कि खुद जनता ने ही इसका पालन किया। अब 31 मार्च तक ऐसा ही साहस बनाए रखने की आवश्यकता है। रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसरा नजर आया। शाम के समय सब्जी व परचून की कुछ दुकानों के खुलने पर लोगों ने खरीदारी की। फिर भी अन्य दिवस की अपेक्षा बहुत कम लोग खरीदारी करते नजर आए। जिले के नगर, बयाना, नदबई, कामां, डीग, कुम्हेर, वैर, भुसावर, उच्चैन, पहाड़ी, जुरहरा, रुदावल, सीकरी इलाके में जनता कफ्र्यू को लेकर बाजार बंद रहे। लोग पूरे दिन घरों में ही रहे।

शाम पांच बजे दिखा जन का उत्साह ऐसा..

शाम पांच बजे शहर की जनता में गजब का उत्साह नजर आया। बच्चे, महिला व पुरुषों ने घर के गेट व छतों पर खड़े होकर थाली बजाई। इस दौरान सामने से निकल रहे पुलिसकर्मी भी उनका साथ देते नजर आए। इसके अलावा इससे यह भी सामने आया कि खुद जनता का कहना था कि जो कोरोना वायरस से बचाने के लिए रात-दिन काम कर रहे हैं। उनका सम्मान और हौंसला बढ़ाना आवश्यक है।

मंत्री ने ट्विटर पर आदेश दिए, फिर भी शिक्षकों के अवकाश पर उलझन

शिक्षा मंत्री ने भले ही ट्विटर पर शिक्षकों के अवकाश के संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं, लेकिन अब भी उलझन की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि शिक्षा विभाग की ओर से रविवार को अवकाश होने के कारण भी निदेशक ने आदेश जारी नहीं किया गया। ऐसे में शिक्षकों ने जब शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बात की तो वहां भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया। हालांकि केंद्र सरकार व राज्य सरकार की ओर से शिक्षकों के अवकाश के लिए निर्देशित किया जा चुका है, लेकिन आदेश नहीं निकलने के कारण गफलत की स्थिति बनी हुई है। शिक्षकों का कहना था कि अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वे सोमवार को सर्वे करें, स्कूल जाएं या राज्य सरकार के घरों में रहने के आदेश का पालन करें।

थामे रोडवेज के पहिए, प्रतिदिन लाखों का नुकसान

भरतपुर. कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव और प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से राज्य सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने केंद्रीय बस स्टैण्ड से भरतपुर और लोहागढ़ डिपो की बसों के संचालन को 31 मार्च तक रोक दिया है। यहां की बसों के पहिए अब 31 मार्च तक थम गए हैं। न यहां कोई बस आएगी और यहां से कोई बस किसी रूट पर जाएगी। हालांकि, यह निर्णय लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए संक्रमण के प्रभाव से बचाने के लिए किया गया। इससे अन्य राज्यों के जिलों व राजस्थान के जिलों से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मेरठ, अलीगढ़, मथुरा आदि स्थानों पर जाने वाली बसों में सफर करने वाले संक्रमण से संदिग्ध लोगों को रोका जा सकेगा। हालांकि इस स्थिति में रोडवेज को प्रतिदिन करीब 20 से 22 लाख रुपए का नुकसान होगा।

स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता जरुरी

केंद्रीय बस स्टैण्ड से लोहागढ़ व भरतपुर डिपो की करीब 160 बसें संचालित होती है। लोहागढ़ के कार्यवाहक मुख्य प्रबंधक महेश गुप्ता ने बताया कि हमारे डिपो की बसों से प्रतिदिन करीब 12 से 13 हजार यात्री सफर करते हैं। इनसे रोडवेज को प्रतिदिन 10 से 11 लाख रुपए की आय होती है। अब बसों के संचालन बंद होने से नुकसान तो होगा, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना भी अनिवार्य है। इसी तरह भरतपुर डिपो से भी लगभग 80 बसें संचालित होती हैं। अब इस महीने के अंत तक बसों का संचालन नहीं होगा। यहां से भी प्रतिदिन करीब 13 से 14 हजार यात्री सफर करते हैं। अब प्रतिदिन करीब 11.5 लाख रुपए का नुकसान होगा। इसलिए प्रतिदिन के हिसाब से दोनों डिपो को 31 मार्च तक दो करोड़ रुपए से अधिक नुकसान होगा।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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