छह जुलाई को सोमवार से होगी पवित्र माह सावन की शुरुआत

-इस बार सावन में आएंगे पांच सोमवार, तीन अगस्त को होगा समापन

By: Meghshyam Parashar

Published: 24 Jun 2020, 06:27 PM IST

भरतपुर. भगवान भोलेनाथ की आराधना का महीना सावन इस बार सोमवार से शुरू होकर सोमवार को ही संपन्न होगा। छह जुलाई से तीन अगस्त तक श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। सावन का प्रारंभ और समापन सोमवार को होना शुभ संकेत है। श्रावण प्रतिपदा को सोमवार, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वैद्धति योग तथा कोलव नामक करण रहेगा। वहीं चंद्रमा मकर राशि में विचरण करेगा। कामवन शोध संस्थान के निदेशक डॉ. रमेशचंद्र मिश्र ने बताया कि पहला सोमवार छह जुलाई को, दूसरा सोमवार 13 जुलाई को, तीसरा सोमवार 20 जुलाई को, चौथा सोमवार 27 जुलाई को और पांचवां व अंतिम सोमवार तीन अगस्त को रहेगा। पांचों सोमवार को विशेष योग रहेंगे। इन योग में भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करना बहुत ही श्रेष्ठ रहेगा। प्रथम सोमवार को शिव के साथ लक्ष्मीनारायण की भी पूजा-होगी। छह जुलाई को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वैधृति योग, कौलव करण, प्रतिपदा तिथि रहेगी। यह अभीष्ट फलदायक सोमवार रहेगा। मान्यता है कि इस दिन शिव तत्व की साधना और पूजा-अर्चना मंगलकारी, अनिष्ट विनाशक सिद्ध होगी। दूसरा सोमवार 13 जुलाई को होगा। इस दिन अष्टमी तिथि होगी, इसके स्वामी शिव हैं। सोमवार को शिव तिथि का होना विशेष संयोग कारक है। दूसरे सोमवार को रेवती नक्षत्र रहेगा, जिसका स्वामी पूषण नामक सूर्य है। समस्त रुके हुए कार्य जल्दी ही संपन्न होंगे।
सावन का तीसरा सोमवार 20 जुलाई को रहेगा, इसमें अमावस्या तिथि रहेगी जो हरियाली अमावस्या के रूप में मनेगी। इस दिन सोमवती अमावस्या विशेष फलदायी रहेगी। ऐसा माना जाता है कि इस दिन ऋषि, पितृ और गौ पूजन करना भी विशेष लाभप्रद रहेगा। चौथा सोमवार 27 जुलाई को होगा। सुबह 7.10 बजे तक सप्तमी तिथि रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि रहेगी। चित्रा नक्षत्र, साध्य योग, वाणिज करण विद्यमान रहेंगे। इस दिन सूर्य और विश्वकर्मा की पूजा विशेष उपयोगी रहेगी। इस पूजा से राजनीतिक उत्थान, उन्नति, यश, मान, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। भूमि-भवन की भी प्राप्ति शीघ्र होगी। पांचवां और अंतिम सोमवार तीन अगस्त को रहेगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, प्रीति तथा आयुष्मान योग रहेगा। इस दिन शिव पूजा के साथ भगवान सत्यनारायण, विश्व देव तथा ब्राह्मणों की पूजा तथा सम्मान देने से स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी। इस दिन जरुरतमंदों को भोजन, वस्त्र, अन्नदान करना चाहिए।

इस बार अधिकमास का महीना, हर तीन साल में आता है

अधिकमास वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच करीब 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग एक मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, इसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है। इस बार अधिकमास 18 सितंबर से शुरू होगा। समापन 16 अक्टूबर को होगा। इसलिए नवरात्र भी 17 अक्टूबर से शुरू होंगे।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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