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भरतपुर सीट पर भाजपा की हार का खुला राज!

-भरतपुर लोकसभा सीट पर हार की समीक्षा बैठक में निकले संगठन व नेताओं में विरोध के स्वर

भरतपुरJun 17, 2024 / 07:18 pm

Meghshyam Parashar

भारतीय जनता पार्टी की ओर से जयपुर में हुई हार की समीक्षा बैठक में जिले के संगठन व नेताओं के बीच विरोध के स्वर मुखर नजर आए। कुछ ने संगठन पर चुनाव प्रचार में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया तो कुछ ने सही जगह चुनाव प्रचार में बजट का उपयोग नहीं करने की बात कही। इतना ही नहीं भाजपा मुख्यालय में हुई हार की समीक्षा बैठक में भाजपा दो धड़ों में बंटी नजर आई। हालांकि बैठक के बाद पदाधिकारियों को अंदर के मुद्दों को बाहर नहीं निकालने की भी नसीहत तक दी गई। बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अलावा चुनाव प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, सह प्रभारी विजया राहटकर, वी. सतीश मौजूद रहे।
बैठक में भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी रहे रामस्वरूप कोली ने कहा कि दो मार्च को उन्हें टिकट की घोषणा की गई। 22 अप्रेल को नामांकन पत्र दाखिल करने का कार्यक्रम बनाया गया था, लेकिन ऐनवक्त तक कोई तैयारी नहीं की गई। ऐसे में प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों ने तारीख बदली और तैयारियां कराई। तब जाकर पूरी तैयारी और ताकत के साथ नामांकन पत्र दाखिल कराया गया। जबकि यह जिम्मेदारी किसकी होती है, यह सब जानते हैं। पिछले चुनाव में सिर्फ कामां विधानसभा क्षेत्र को छोडकऱ सभी छह सीटों पर भाजपा जीत दर्ज कराती रही है। इस पर कामां विधायक नौक्षम चौधरी ने कहा कि कामां में 65 प्रतिशत समुदाय के मतदाता है। इससे भाजपा को नुकसान हुआ। बैठक में राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म, संभाग प्रभारी हेमराज मीणा, कामां विधायक नौक्षम चौधरी, पूर्व विधायक बच्चू सिंह बंशीवाल, पूर्व सांसद रंजीता कोली, प्रत्याशी रामस्वरूप कोली, जिलाध्यक्ष मनोज भारद्वाज, पूर्व विधायक विजय बंसल, सह प्रभारी सोमकांत शर्मा, जिला प्रभारी गोवर्धन जादौन, समन्वयक पिंटू सैनी और सह समन्वयक डीडी कुमावत आदि मौजूद रहे।
रंजीता कोली: चार लोगों के हाथ में रही चुनाव की कमान

बैठक में पूर्व सांसद रंजीता कोली ने साफ तौर पर कहा कि पूरे चुनाव की कमान चार लोगों के हाथ में रही। उन्होंने ही हर बैठक में प्रत्याशी को कभी कितने वोट से तो कभी कितने वोट से जिताने का दावा किया। सर्वे रिपोर्ट का भी ध्यान नहीं रखा गया। जाट समुदाय से किसी को भी मंत्री नहीं बनाना भी नाराजगी का सबसे बड़ा कारण रहा। इसके लिए जरूरी है कि आम कार्यकर्ता की राय को भी धरातल पर जाकर जानना चाहिए था। बैठक में जिलाध्यक्ष मनोज भारद्वाज ने कहा कि संगठन ने पार्टी के निर्देशों के तहत पूरी मेहनत के साथ काम किया। जाट आरक्षण आंदोलन व किसी भी जाट विधायक को मंत्री नहीं बनाना भी प्रमुख कारण हो सकता है। बैठक में जिला प्रभारी गोवर्धन सिंह जादौन से भी चुनाव प्रचार के दौरान प्रवास के बारे में पूछा। हालांकि वे कुछ नहीं बोल सके।
भाजपा प्रत्याशी को एजेंट तक नहीं मिले…

बैठक में आश्चर्य की बात यह भी सामने आई कि किसी ने कहा कि भाजपा प्रत्याशी के खुद के दम पर ही एजेंट तलाश करते रहे, किसी भी विधानसभा क्षेत्र में एजेंट बनाने तक में सहयोग नहीं दिया। कार्यकर्ताओं से कहा तो उन्होंने इंकार कर दिया। क्योंकि उन्होंने खुद के दम पर चुनाव प्रचार किया था।
पांच विधायकों का बैठक से ही किनारा

बैठक में शामिल होने के लिए सभी विधायकों को बुलाया गया था, लेकिन भरतपुर जिले से चार विधायक बैठक में ही नहीं पहुंचे। कठूमर से विधायक रमेश खींची, नदबई से जगत सिंह, वैर से बहादुर सिंह कोली, डीग-कुम्हेर से डॉ. शैलेष सिंह बैठक में नहीं पहुंचे। बाकी बयाना से भाजपा को समर्थन देने वाली निर्दलीय विधायक डॉ. ऋतु बनावत भी बैठक में नजर नहीं आई।
ये कारण भी आए सामने
चुनाव से कुछ दिन पहले जिले की टीम बदल दी गई। चुनाव से पांच-सात दिन पहले 39 में से 22 मंडल अध्यक्ष बदल दिए गए। ऐसे में नए अध्यक्ष काम समझ नहीं पाए और पुरानों ने किनारा कर लिया। जिला संगठन के पदाधिकारी चुनाव प्रचार में नहीं गए।
कुछ पदाधिकारी व नेता घोषित प्रत्याशी के कारण आपस में उलझे रहे। इससे पार्टी को आंतरिक कलह के कारण नुकसान का सामना करना पड़ा।
कार्यकर्ता छोटे-छोटे खर्च के लिए चक्कर काटते रहे। एक पदाधिकारी ने लाखों रुपए के खर्च का हिसाब तक नहीं दिया।
राजस्थान के लोकसभा प्रभारी ने जब चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक ली तो बैठक के दौरान ही उन्होंने प्रबंधन समिति के सदस्यों से उनके काम के बारे में पूछा तो जानकारी में आया कि प्रबंधन समिति के सदस्यों को उसी दिन सुबह बताया गया है कि आप लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य हो और आपका यह काम है। ऐसे में संगठन ने प्रबंधन समिति को गुमराह रखा।
संभाग प्रभारी, संभाग सह प्रभारी, जिला संगठन और जिला प्रभारी इनकी जिम्मेदारी पूरे जिले में बूथ सम्मेलन करने की थी, लेकिन संगठन ने किसी भी स्तर पर बूथ सम्मेलन करने के लिए काम नहीं किया।
यह है सबसे बड़ा कारण

2019 के चुनाव में भरतपुर लोकसभा क्षेत्र की कठूमर विधानसभा में भाजपा को 39351, कामां में 13223, नगर में 33769, डीग-कुम्हेर में 51772, भरतपुर में 62320, नदबई में 65035, वैर में 34909, बयाना में 39497 वोटों की बढ़त मिली थी। जबकि इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने आठ में से छह विधानसभा क्षेत्रों में बाजी मारी। इसमें भी कामां से सबसे अच्छी लीड कांग्रेस को मिली थी। कठूमर में कांग्रेस को 8842, कामां में 46 हजार 168, नगर में 16566, डीग-कुम्हेर में 2869, वैर में 3442, बयाना में 5634 मत भाजपा प्रत्याशी से अधिक मिले। वहीं भाजपा की बात करें तो भरतपुर विधानसभा में 20 हजार 898, नदबई में 9084 मत कांग्रेस से अधिक मिले हैं। इस चुनाव में अकेली कामां विधानसभा ने कांग्रेस की जीत का अंतर सबसे ज्यादा बढ़ाया।

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