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एक आईएएस के सेवा भाव की अनौखी कहानी...

सेवा की सनक ऐसी कि नहीं बचा सके बेटी तो आईएएस बनकर लिया सेवा का संकल्प
- पीडि़त मानवता की सेवा में रमता है जिला कलक्टर आलोक रंजन का मन

भरतपुर

Published: March 28, 2022 08:04:32 pm

भरतपुर . सॉफ्टवेयर इंजीनियर का दिल सेवा के लिए इतना सॉफ्ट शायद ही पहले कभी देखा होगा। सेवा की बदौलत वह अपने ओहदे को और ऊंचा करते नजर आते हैं। आला दर्जे की अफसरी इसमें कतई आड़े नहीं आती। वह पीडि़त मानवता को देखते हैं तो उनकी सेवा में ऐसे रम जाते हैं कि उन्हें अपनी कलक्टरी का भान तक नहीं रहता। हम बात कर रहे हैं भरतपुर जिला कलक्टर आलोक रंजन की।
दिल्ली में पढ़ाई पूरी करने के बाद रंजन एक नामचीन कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने, लेकिन इस नौकरी के दरिम्यान भी उनका दिल पीडि़त मानवता की सेवा के लिए हमेशा धड़कता रहा। रंजन के घर पर वार्डन का काम करने वाले की बेटी को अचानक स्पाइनल की परेशानी हो गई। खूब इलाज कराने के बाद भी वह ठीक नहीं हुई। इसकी खबर रंजन को लगी तो उन्होंने दोस्तों के साथ मिलकर करीब 3 लाख रुपए का चंदा एकत्रित किया और बेटी का इलाज कराया, लेकिन फिर भी बेटी को नहीं बचा सके। इस घटना ने रंजन की जिंदगी को नई दिशा दी और वह पीडि़त मानवता की सेवा में जुट गए। इसके उन्होंने संस्था बनाकर काम भी किया, लेकिन संस्था चल नहीं सकी। रंजन के सेवा भाव और उनकी कुशाग्रता को देखकर उनको किसी ने मशविरा दिया कि प्रशासनिक सेवा में जाकर वह पीडि़त मानवता की सेवा ज्यादा बेहतर तरीके से कर सकते हैं। यह बात रंजन को जम गई और वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर तन्मयता से प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुट गए। एक साल तैयारी के बाद परीक्षा दी तो पहले ही प्रयास में वह आईएएस बन गए। अब वह पूरे मनोयोग से पीडि़तों की सेवा में जुटे हैं।
एक आईएएस के सेवा भाव की अनौखी कहानी...
एक आईएएस के सेवा भाव की अनौखी कहानी...
अपना घर पहुंचे तो याद आए दिन

भरतपुर में जिला कलक्टर के पद पर आसीन आलोक रंजन हाल ही में अपना घर बझेरा पहुंचे तो उनकी यादें ताजा हो उठीं। वह गत दिवस सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक अपना घर में रहने वाले प्रभुजी से मिले और उनकी व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। सभी ब्लॉकों में जाकर उन्होंने व्यवस्थाओं को जांचा। रंजन ने उनके खाने-दवा, रहन-सहन आदि की व्यवस्थाओं के बारे में जानकार संतुष्टि जाहिर की।
ऐसे जुटे, जैसे सेवादार हों

अपना घर आश्रम में शनिवार से श्रेष्ठतम सेवा मिशन का आगाज हुआ। इसमें जिला कलक्टर आलोक रंजन भी पहुंचे। तमाम ताम-झामों को किनारे करते हुए रंजन यहां प्रभुजी की सेवा में जुट गए। रंजन ने अपने हाथों से प्रभुजी को नहलाया और उन्हें कपड़े भी पहनाए। इस सेवा के दरिम्यान उनकी अफसरी कहीं भी नहीं झलकी। वह सेवा भाव से प्रभुजी की सेवा में तल्लीन रहे। जिला कलक्टर के रूप को देखकर वहां लोग हतप्रद रह गए।

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