जब लोग कंधा देने से डर रहे, तब गले लगा रहा 'अपना घर

- अब सरकार भी मांग रही आसरा

By: Meghshyam Parashar

Published: 05 Sep 2020, 10:07 AM IST

भरतपुर. कोरोना के खौफ ने दुनिया की गति थाम दी है। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में सब कुछ बदल गया है। यदि कुछ नहीं बदला है तो वह है अपना घर की सेवा का जुनून। कोरोना काल में जहां लोग 'अपनों को कंधा देने से दूर हो रहे हैं। वहीं 'अपना घर ऐसे लोगों को गले लगाकर उन्हें आसरा दे रहा है। अब उत्तरप्रदेश सरकार इस सेवा की मुरीद होकर ऐसे ठुकराए लोगों को अपना घर में पनाह देने की गुहार लगा रही है।
सड़कों पर जिंदगी की सांसों को पूरा करने वाले ऐसे बहुतेरे लोग अब यहां आसरा पाए हुए हैं। कोरोना संक्रमण के बीच ऐसे लोगों का जीवन सुरक्षित कर पाना खासी चुनौती होती है। इसकी वजह यह है कि ऐसे लोग न तो अपने खान-पान का ख्याल रख पाते हैं और ना ही साफ-सफाई जैसी चीजों का इन्हें भान रहता है। गंदगी के बीच रहने के कारण ऐसे लोग संक्रमित हो जाते हैं। ऐसे में इनकी देखभाल सामान्य व्यक्ति से ज्यादा करनी होती है। मानव सेवा का जुनून पाले मां माधुरी ब्रज वारिस सेवा सदन (अपना घर) ऐसे लोगों को 'प्रभु मानकर सेवा में जुटा है। इसी सेवा का असर है कि उत्तरप्रदेश सरकार ने अपने कुछ असहाय लोगों को अपना घर भेजने का निर्णय किया है। वहीं अब प्रदेश सरकार भी ऐसे लोगों को यहां बेहतर देखरेख के लिए पहुंचा रही है। कुछ दिन पहले उत्तरप्रदेश के इटावा से ऐसे व्यक्ति को यहां लाया गया है जो कचरे के ढेर में अपनी जिंदगी बिता रहा था। यह व्यक्ति ऐसे कचरे के ढेर पर मिला था, जहां लोग अपने मास्क बगैराह फेंक रहे थे। यह व्यक्ति अब अपना घर में आसरा पा रहा है।

बोले मथुरा के अधिकारी नहीं हैं व्यवस्थाएं

मथुरा के जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अपना घर प्रबंधक को लिखे पत्र में कहा है कि महिला कल्याण विभाग उत्तरप्रदेश में अनेकों संस्थाएं संचालित हैं। इनमें 18 वर्ष से अधिक आयु की करीब 100 मंदबुद्धि महिला एवं 50 पुरुष निवासरत हैं। इनके उपचार एवं पुनर्वास की समुचित व्यवस्थाएं संंस्थाओं में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इनका स्थानांतरण अपना घर में करने की स्वीकृति दी जाए। अपना घर से स्वीकृति मिलने के बाद मथुरा प्रशासन ने असहाय लोगों को अपना घर भिजवाया है।

शासन सचिव ने लिखा कलक्टरों को पत्र

उत्तरप्रदेश सरकार के आग्रह के बाद अपना घर ने राजस्थान सरकार को भी ऐसे लोगों को अपना घर भेजने की बात कही। इस पर शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने सभी जिला कलक्टरों को इस संबंध में पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि अपना घर में आश्रयहीन, लावारिस, असहाय व बीमार लोगों के आवास की व्यवस्था है। संस्था में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक आश्रयहीनों को रखा जाकर उनके आवास, भोजन एवं चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है। पत्र में सभी जिला कलक्टरों को कहा है कि अपने जिले में इस तरह के व्यक्तियों को चिह्नित कर अपना घर आश्रम भरतपुर भेजने की व्यवस्था करें।

212 प्रभुजनों को दिया प्रवेश

कोरोना काल में अपना घर में अब तक 212 प्रभुजनों को प्रवेश दिया गया है। इनमें से राजस्थान से 75, उत्तरप्रदेश से 35 के अलावा उत्तराखण्ड, दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश, गुजरात एवं महाराष्ट्र आदि राज्यों से आए प्रभुजनों को भर्ती किया है।

इनका कहना है

पीडि़त मानवता की सेवा ही हमारा ध्येय है। अपना घर में बेसहारा, आश्रयहीन एवं असहायों को प्रभुजी मानकर सेवा की जा रही है। हाल ही में उत्तरप्रदेश सरकार ने ऐसे लोगों को यहां भेजने की बात कही है। हम ऐसे लोगों को यहां सेवा के उद्देश्य से ले रहे हैं। साथ ही इसके लिए हमने राज्य सरकार को भी प्रस्ताव दिया है।
- डॉ. बी.एम. भारद्वाज, संस्थापक अपना घर भरतपुर

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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