यहां अब तक सभी की रिपोर्ट नेगेटिव...क्योंकि खुद का जीवन खतरे में डाल...कोरोना से लड़ रहे ये रियल हीरो

वायरस भी इतना खतरनाक है कि मामूसी सी लापरवाही से किसी की भी जिंदगी खतरे में पड़ सकती हैै। कफ्र्यू सा माहौल है। ऐसे खौफनाक माहौल में चुनिंदा लोग ऐसे भी हैं जो खुद की परवाह किए बिना औरों का जीवन बचाने में लगे हुए हैं।

By: Meghshyam Parashar

Published: 28 Mar 2020, 07:28 PM IST

भरतपुर. वैश्विक महामारी कोरोना पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन हुआ है। देश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या जहां 800 से ऊपर निकल चुकी हैं। वहीं करीब 26 लाख की आबादी वाला भरतपुर जिला भी कोरोना वायरस से खुद के वासियों को बचाने की जंग लड़ रहा है। जनता कफ्र्यू के बाद 23 मार्च से पूरा जिला लॉकडाउन है। घरों से बाहर निकलने पर पाबंदी लगी हुई है। वायरस भी इतना खतरनाक है कि मामूसी सी लापरवाही से किसी की भी जिंदगी खतरे में पड़ सकती हैै। कफ्र्यू सा माहौल है। ऐसे खौफनाक माहौल में चुनिंदा लोग ऐसे भी हैं जो खुद की परवाह किए बिना औरों का जीवन बचाने में लगे हुए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं चिकित्सक और नर्सिंगकर्मी, पुलिस प्रशासनिक अधिकारी एवं कार्मिक। पंचायतराज, नगर निगम, नगरपालिका और शिक्षा विभाग समेत कुछ अन्य विभागों के कार्मिक भी कंधे से कंधा मिलाकर अपना दायित्व बखूबी निभा रहे हैं।

जिला कलक्टर: रात 12 बजे तक फोन कॉल, सुबह चार बजे जागना

भरतपुर. जिला कलक्टर नथमल डिडेल की अगुवाई में प्रशासनिक अमले ने कोरोना के विरुद्ध मोर्चा संभाल रखा है। एडीएम प्रशासन नरेश कुमार गालव, यूआइटी सचिव उम्मेदीलाल मीणा, एसडीएम संजय गोयल सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। जिला कलक्टर स्वयं सीधी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। शहर में नियमित रूप से राउंड कर रहे हैं। प्रत्येक उपखंड और तहसील स्तर पर व्यवस्थाओं का फीडबैक रोजाना लिया जा रहा है। नियंत्रण कक्ष पर आने वाली शिकायतों को गंभीरता से सुन रहे हैं। आमजन को रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए परेशानी नहीं उठानी पड़े, इसके लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जिला प्रशासन के कार्मिक गांव-गांव मॉनिटरिंग कर रहे हैं। प्रत्येक गांव में सर्वे किया जा रहा है। विदेश और प्रवासी राजस्थानियों की पहचान कर उनकी स्क्रीनिंग कराई जा रही है। इतना ही नहीं जिला कलक्टर की दिनचर्या की बात करें तो वह प्रतिदिन रात 11.30 बजे से 12 बजे के बीच कोरोना का अपडेट लेकर सोते हैं। इसके बाद सुबह चार बजे जाग जाते हैं। उनके पास पिछले तीन दिन से फलां दुकानदार फलां जगह सब्जी महंगी बेच रहा है। इस तरह के फोन भी आ रहे हैं। पूरे दिन ऑफिस में बैठकर अधिकारी-कर्मचारियों को मोटिवेट करते हैं। चूंकि जहां जिलेभर में लॉकडाउन के चलते जनता की सुरक्षा के लिए कोई भी बाहर नहीं निकल सकता है, लेकिन ये अफसर बाहर निकलते हैं।

एसपी: 24 घंटे बजती है मोबाइल की घंटी, ताकि नहीं फैले कोरोना

कोरोना वायरस को लेकर खौफ हर किसी में है। देश व प्रदेश में लॉकडाउन है, इस कारण हर कोई घरों में रहकर अपनी सुरक्षा कर रहा है, लेकिन इस महामारी में खुद को खतरे में डालते हुए पुलिस अपनी ड्यूटी कर रही है। इसी वजह से पुलिस 24 घंटे सड़क पर ड्यूटी कर रही है। होमगार्ड रात-दिन ड्यूटी कर रहे हैं। वे खुद से बचाते हुए आमजन के लिए खड़े हैं, ताकि हम सुरक्षित रहें। जिले में 2600 पुलिसकर्मी, 150 होमगार्ड, आरएसी के 150 जवान मुस्तैदी से ड्यूटी निभा रहे हैं। एसपी हैदर अली जैदी बताते हैं कि 24 घंटे मोबाइल की घंटी बजती है, लेकिन जरा सी भी परेशानी महसूस नहीं होती है। क्योंकि मैं अकेला ऐसा नहीं है। पूरे देश की जनता इस महामारी से लड़ रही है। इसमें सभी का प्रयास होना चाहिए कि इस संकट को दूर करें। हां इतना जरूर है कि खुद जनता को इस समय पॉजीटिव रहकर सड़कों को ड्यूटी दे रहे पुलिसकर्मियों की बात माननी चाहिए। वो खुद संकट में रहकर जनता की सुरक्षा के लिए फर्ज निभा रहे हैं। इसके अलावा पुलिसकर्मियों को भी निर्देशित कर रखा कि जनता को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

सफेद कोट पहनकर मौत से दिन रात लड़ रहे जांबाज

चीन के बुहान शहर से निकला मौत का वायरस जब से भारत में आया है, हमारे यहां के सफेद कोट पहनने वाले जांबाज दिन-रात एक कर उससे जंग लड़ रहे हैं। इस जंग में ये जांबाज न तो थक रहे हैं और न रुक रहे हैं। जिले में कोरोना के संदिग्ध सामने आने से पहले ही चिकित्सा विभाग ने प्रशासन के साथ मिलकर मोर्चा संभाल लिया था। इस रणभूमि में 150 मेडिकल ऑफिसर के साथ 100 नर्सिंग कर्मी, जिला मुख्यालय पर 42 डॉक्टर उतरे हुए हैं। इनका साथ देने के लिए मेडिकल कार्मिक भी लगाए गए हैं, जो कि आइसोलेशन वार्ड समेत अन्य स्थानों पर ड्यूटी दे रहे हैं। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के सभी अधिकारी व कार्मिक भी कोरोना पर विजय पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के किसी भी वस्तु को छूने पर भी फैल सकता है। फिर यह जांबाज जनता की रक्षा कर रहे हैं। साथ ही अस्पताल के प्रमुख स्थानों को बार-बार सेनिटाइज किया जा रहा है।

934 सफाई कर्मचारी जान हथेली पर रखकर कर रहे सफाई

आप जब घर से बाहर निकलते हैं तो थोड़ी सी गंदगी मिलने पर सफाई कर्मचारी को कोसने से नहीं चूकते हैं, लेकिन आपको मालूम होना चाहिए कि नगर निगम ही नहीं जिलेभर में शहरी निकायों के स्थायी व अस्थायी सफाई कर्मचारी जान हथेली पर रखकर आपकी सुरक्षा का इंतजाम कर रहे हैं। नगर निगम के 300 स्थायी व 634 अस्थायी सफाई कर्मचारी बखूबी शहर को स्वच्छ रखने में भूमिका निभा रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि अस्थायी 634 सफाई कर्मचारियों के पास मास्क तक उपलब्ध नहीं है। मेयर अभिजीत कुमार बताते हैं कि खुद गंदगी से सामना करने वाले ये कार्मिक भी जांबाज है, जो कि शहर को स्वच्छ रखने के लिए जान की परवाह भी नहीं करते हैं।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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