विश्वेंद्र सिंह ने साधा निशाना...राजा का काम है न्याय करना, व्यापारी का काम है लाभ कमाना

-सिमको वैगन फैक्ट्री विवाद: सिमको प्रशासन ने स्कूल भवन को ध्वस्त कराया, खेल मैदान में किए गड्ढे
-सिमको मामले को लेकर कुछ व्यापारी व नेताओं को भी किया पाबंद

By: Meghshyam Parashar

Published: 17 Sep 2020, 09:42 AM IST

भरतपुर. पिछले करीब चार माह से चल रहा सिमको वैगन फैक्ट्री का विवाद अब एक बार फिर सुर्खियों में आ चुका है। चूंकि विवाद की बड़ी वजह इसलिए है कि पिछले कुछ दिन से सिमको प्रशासन की ओर से आवास व स्कूल भवन को जर्जर बताकर तोडऩे की कार्रवाई की गई तो उसका विरोध हुआ है, लेकिन अभी तक सिमको प्रशासन की ओर से यह बयान तक जारी नहीं किया है कि आखिर यह सबकुछ करने के बाद वह करना क्या चाहते हैं। सबसे बड़ा संशय इसी कारण बना हुआ है। वहीं पूर्व कैबीनेट मंत्री व विधायक विश्वेंद्र सिंह ने भी सोशल मीडिया पर सिमको प्रकरण को लेकर ट्वीट कर निशाना साधा है। क्योंकि सिमको प्रकरण में एक संगठन की ओर से एक जनप्रतिनिधि के इशारे पर यह सारी कार्रवाई करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में राजनैतिक गलियारों में यह ट्वीट भी सुर्खियां बटोरने के साथ ही चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं इस मामले को लेकर पुलिस ने कुछ व्यापारियों के साथ सिमको श्रमिकों के नेताओं को भी पाबंद किया है। हालांकि पुलिस अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से कतराते रहे।
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ माह पहले शिक्षा विभाग की ओर से सिमको राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के भवन को क्षतिग्रस्त बताकर खाली कराने के लिए निर्णय लिया गया था। इसको लेकर राज्य सरकार ने भी स्वीकृति जारी कर दी थी। 13 सितंबर को पुलिस व प्रशासन की मौजूदगी में स्कूल भवन को खाली करा दिया गया था, अब बुधवार को तड़के चार-पांच बजे करीब चा जेसीबी सिमको लेवर कॉलोनी स्थित इस स्कूल पर पहुंची। जहां प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा के दोनों स्कूल भवनों को ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद सिमको खेल मैदान को भी जगह-जगह से गड्ढे खोदकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। सिमको खेल मैदान पर लंबे समय से खिलाड़ी हर दिन खेलने के लिए जाते थे, लेकिन अब यहां कोई भी खेल नहीं सकेगा। क्योंकि खेल मैदान ही पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वहीं पूर्व कैबीनेट मंत्री व डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेंद्र सिंह ने ट्वीट में लिखा है कि राजा का काम है न्याय करना, व्यापारी का काम है लाभ कमाना, जब-जब व्यापारी को न्याय करने का काम मिलता है, वह लूट मचाने के अलावा कुछ नहीं करता, इसमें उसका दोष नहीं है। क्योंकि उसकी फितरत ही लाभ कमाने की होती है न्याय की नहीं, *भरतपुर*सिमको। हालांकि इस ट्वीट को सिमको को लेकर चल रही कार्रवाई से जोड़ा जा रहा है। क्योंकि विश्वेंद्र सिंह ने ही पिछले दिनों उद्योगनगर थाने में सिमको के श्रमिकों की लड़ाई लड़ रहे नेताओं को बगैर कारण बैठाकर रखने के मामले में विरोध व्यक्त किया था।

शहरवासी बोले...विवाद से नहीं मतलब, सिर्फ स्थिति हो स्पष्ट

जब पत्रिका ने इस मामले को लेकर शहर के लोगों से बात की तो उन्होंने कहा कि शहर की जनता को विवाद से कोई मतलब नहीं है। वह तो सिमको का पुराना समय चाहती है। अगर यहां कुछ नया होने वाला है तो वह भी जनता के बीच आकर खुद जनप्रतिनिधि अवगत कराएं। हालांकि इस मामले को लेकर अब प्रशासनिक अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं, जबकि सिमको प्रबंधन भी मामले में बयान देने से पीछे हट रहा है।

आंदोलन के बाद 2008 में खुली थी सिमको

सिमको वैगन फैक्ट्री को वर्ष 2008 में लॉकआउट के बाद खोला गया था। इस कंपनी में काम कर चुके वृद्ध बताते हैं कि शुरुआत के समय इस कंपनी के कारण भरतपुर का नाम देशभर में था। जबकि हजारों युवाओं को रोजगार के साथ व्यापारियों को भी बहुत फायदा मिलता था। सिमको वैगन फैक्ट्री 13 नवंबर 2000 से लेकर 2008 तक लॉकआउट रही। राज्य सरकार के प्रयासों के उपरांत सिमको की 13 यूनियनों के साथ त्रिपक्षीय समझौता उप श्रम आयुक्त भरतपुर कैंप-जयपुर की ओर से पांच मार्च 2008 को नौ शर्तों के साथ कराया गया। इसमें नौ बिंदुओं पर समझौता हुआ कि श्रमिकों का बकाया वेतन वर्तमान महंगाई को देखकर व ग्रेच्युटी नियमानुसार बोनस वर्ष 1999-2000 तक एवं 2000-2001 तक छुट्टियों का पैसा देकर हिसाब चुकता किया जाएगा, जो पैसा एक वर्ष के अंदर त्रिमासिक किश्तों में दिया जाना तय था। प्रथम किश्त 31 मार्च 2008 को दी जानी थी। इन्हीं कुछ बिंदुओं को लेकर अब तक विवाद होता रहा है।

-सिमको प्रबंधन की ओर से फैक्ट्री निर्माण वास्ते आवंटित भूमि को फ्री होल्ड कराकर आवासीय क्वार्टरों को तुड़वा कर जमीन को बेचने की साजिश की जा रही है। स्कूल भवन को तोड़ दिया गया है। खेल मैदान को क्षतिग्रस्त कर दिया है। इस खेल मैदान में खेलकर सैकड़ों खिलाड़ी बने हैं। बहुत दुख हो रहा है।

कृपाल सिंह ठैनुआ
संयोजक, सिमको बचाओ संघर्ष समिति

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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