जब लोग जान बचाने को सीटों के नीचे घुसे थे, तब वसुंधरा कर रही थी खौफ का खात्मा

- बहादुर बेटी ने सिपाही की मदद से बचाई राइफल

By: Meghshyam Parashar

Published: 06 Mar 2021, 04:46 PM IST

भरतपुर. जिंदगी जिंदादिली से जीने का नाम है। यह फलसफा मैंने एनसीसी में सीखा है। अंतिम सांस तक संघर्ष करने का हुनर हारी बाजी को भी जीत में बदल सकता है। मेरे कान के करीब से जब गोली गुजरी तो लगा कि सब कुछ खत्म होने को है, लेकिन खौफ के इस खेल को मैंने खुद के ऊपर हावी नहीं होने दिया और सिपाही के साथ बदमाशों से भिड़ गई। बस, इसी क्षण बदमाशों के हौसले पस्त हो गए और वह राइफल छोड़कर खेतों की ओर भाग गए। यह कहना है धौलपुर की बेटी आईसीआईसीआई बैंक भरतपुर में कैशियर के पद पर कार्यरत वसुंधरा चौहान का। वसुंधरा उसी बस में सवार थी, इसमें तीन मार्च को बदमाशों ने एक इनामी बदमाशों को छुड़ाने के लिए फायरिंग की थी।
वसुंधरा कहती हैं कि बस में बदमाशों के सवार होने का किसी को भान तक नहीं था। कंडक्टर की ओर से किराया मांगने पर उन्होंने आगे जाकर किराया देने को कह दिया। यहां तक सब कुछ सहज था। इसके बाद सभी बदमाशों ने अपनी जेबों से मिर्ची पाउडर निकालकर चालानी गार्डों की आंखों में झोंक दिया। यह पाउडर उड़कर कुछ सवारियों की आंखों में भी लगा। चालानी गार्ड संभल पाते इससे पहले ही बस में चीख-पुकार मच गई। इस दरिम्यान बस के पिछले हिस्से में सवार एक बदमाश ने फायर कर दिया। इससे सवारियां सहम गईं और लोग जान बचाने को सीटों के नीचे घुस गए। वसुंधरा कहती हैं कि इस दौरान मैं अपनी सीट पर खड़ी हुई तो एक गोली बिल्कुल मेरे कान के करीब से गुजरी। इसके बाद बदमाश पुलिसकर्मी की राइफल छुड़ाने लगे। सिपाही कमर सिंह मीना उनका मुकाबला करने लगे तो मैं भी उनके साथ बदमाश का विरोध करने लगी और बदमाश को पीटना शुरू कर दिया। अन्य सवारियां उन्हें नहीं दबोच लें, इस भय से बदमाश भागने लगे। पांचों बदमाश फायर करते हुए एक साथ हो लिए। मेरे और सिपाही के प्रयास से राइफल तो बच गई, लेकिन बदमाश भागने में सफल हो गए। वसुंधरा कहती हैं कि यह सब कुछ महज 40 सेकंड के अंतराल में हो गया। यदि अन्य सवारियां भी हमारा साथ देती तो बदमाश मौके पर ही दबोच लिए जाते।

कतई कमतर नहीं हैं महिला

बदमाशों से लोहा लेने वाली वसुंधरा कहती हैं कि नारी पुरुषों से कतई कमतर नहीं है। यह बात उन्हें समझनी होगी। आत्मविश्वास से लबरेज महिला किसी भी परिस्थति पर सहज ही काबू पा सकती है। जरुरत बस खुद को परिस्थितियों से लडऩे के लिए तैयार करने की है। वसुंधरा ने कहा कि महिला किसी भी खतरे को भांपने की समझ विकसित करें और उसका डटकर मुकाबला करें। इसके बाद वह कठिन से कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करने में समक्ष होंगी। उन्होंने कहा कि बेटियां बहादुर बनें। अब आने वाला युग उनका है।

महिला राइडर हैं वसुंधरा

वसुंधरा चौहान सामाजिक सरोकारों से जुड़े धौलपुर के चम्बल रॉयल क्लब की महिला राइडर हैं। क्लब में उनकी छवि निर्भीक युवती के रूप में है। वजह, क्लब के सदस्य बुलट बाइक के जरिए रैली आदि निकालते हैं। इनमें वसुंधरा बुलट चलाकर मजबूत इरादों के साथ बेटियों को आगे बढऩे का हौसला देती हैं। सीआरसी के पदाधिकािरयों का कहना है कि 'काश हर बेटी वसुंधरा और हर सिपाही कमर सिंह हो जाए, तो बेटियों की आन और वतन की शान महफूज हो जाएÓ।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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