खुद के बलबूते जीतें जंग, फिर समाज होगा संग

-शिक्षा से लिखी जा सकती है कामयाबी की इबारत

By: Meghshyam Parashar

Published: 06 Mar 2021, 04:38 PM IST

भरतपुर. जननी को जग में कहने को तो ईश्वर से भी बड़ा माना गया है, लेकिन यह बात सिर्फ कथनों तक ही नहीं सिमटे। महिला सम्मान दिखावे से बाहर निकले और हर स्तर पर यह धरातल पर नजर आए। 'यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता वाली कहावत चरितार्थ में लाने से ही समाज का उद्धार संभव है। शिक्षा के बलबूते आधी दुनिया ने अपनी कामयाबी की पूरी इबारत लिखी है। पुरुष प्रधान समाज को यह बात भलीभांति समझनी होगी। तभी सच्चे मायनों में नारी सशक्तीकरण होगा। यह बात महिला बाल विकास विभाग की उपनिदेशक मोनिका बलारा ने महिला दिवस के उपलक्ष्य में पत्रिका से कही।
उन्होंने कहा कि महिला दिवस कोई एक दिन का जश्न, आजादी या समारोह नहीं हो सकता। यह सम्मान महिला के लिए हर दिन होना चाहिए। मोनिका ने कहा कि स्त्री तो स्त्री है। चाहे वह फाइटर प्लेन उड़ाए या घर में अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाएं। दोनों की महानता को बराबर आंकना ही नारी के लिए सुखद अनुभव होगा। उन्होंने कहा कि समाज कुरीतियों, अंधविश्वास एवं रूढि़वादिता की बेडिय़ों में नहीं जकड़े तो महिला के लिए हर दिन महिला दिवस सरीखा है। उन्होंने कहा कि एक महिला ही महिला को बेहतर तरीके से समझ सकती है। इसके लिए पहल भी महिला को ही करनी होगी। समाज में बदलाव के लिए दहेज और कन्या भू्रण हत्या जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करने से महिला एवं समाज दोनों का उद्धार होगा।

स्कूल में देखा अफसरों का रुतबा और ठान लिया कि बनना है अधिकारी

हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील से ताल्लुक रखने वालीं मोनिका बलारा का एक प्रशासनिक अधिकारी बनने का सफर कतई आसान नहीं रहा। वह बताती हैं कि पिता की ख्वाहिश उन्हें चिकित्सक बनाने की थी, लेकिन उनका मन इतिहास में रम रहा था। सीकर में मेडिकल की तैयारी बे-मन से की, नतीजा पीएमटी में नहीं चयन नहीं हो सका। मोनिका बताती हैं कि उनके शिक्षक आरके गुप्ता विद्यार्थियों में निखार के लिए खासे जतन करते थे, जब भी स्कूल में किसी कार्यक्रम में कलक्टर या एसडीएम आते तो वह बच्चों को वैसा ही बनने के लिए प्रेरित करते। अफसरों का रुतबा देखकर मोनिका ने भी अफसर बनने की ठान ली और तैयारी के लिए जयपुर पहुंच गईं। मोनिका के पिता भी आरएएस बनने की चाहते रखते थे, लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। ऐसे में मोनिका ने यह बीड़ा उठाया और उनके सपने को साकार किया। मोनिका पूरी लगन के साथ तैयारी में जुट गईं। वर्ष 2012 में प्री और 2013 में मेंस के बाद इसका परिणाम वर्ष 2015 में आया। मोनिका राजस्थान में दूसरी रैंक से उत्तीर्ण हुईं। मोनिका बताती हैं कि किसी भी सुनहरी मंजिल को हासिल करने की राह कतई आसान नहीं होती। इसके लिए जी-तोड़ मेहनत, मजबूत इरादे और लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करना जरूरी होता है। मोनिका बताती हैं कि प्रशासनिक अधिकारी पद पर रहते हुए महिलाओं की तकलीफ करने से उन्हें खासी संतुष्टि मिलती है।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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