पंजाब में 5000 मिनी बसों को परमिट देने का रास्ता साफ

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की मिनी बस परमिट मुहिम पर रोक की विनती रद की

By: Bhanu Pratap

Published: 24 Jun 2020, 03:06 PM IST

चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा नये मिनी बस परमिट जारी करने संबंधी आवेदन लेने पर रोक लगाने की मौजूदा मिनी बस ऑपरेटरों की विनती को खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ट्रांसपोर्ट के कारोबार में एकाधिकार और अनुचित मुनाफाखोरी को रोकने की अपनी सरकार की वचनबद्धता के अनुसार नये मिनी बस परमिट जारी करने संबंधी ऐलान किया था। मौजूदा ऑपरेटरों द्वारा नये परमिट जारी करने संबंधी सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। सरकार द्वारा परमिट के लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की माँग की थी।

अदालत ने स्वीकार की दलील
परमिट के लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की विनती को रद्द करते हुए अदालत ने राज्य सरकार की इस दलील को स्वीकार कर लिया कि 30 जून की समय सीमा निर्धारित करना प्रशासनिक सुविधा का विषय था। परमिट देने की प्रक्रिया, जिसमें 1400 से अधिक ग्रामीण रूट शामिल थे, के लिए कुछ समय लगने की संभावना थी।

सरकार का तर्क
सरकार के पक्ष का बचाव करते हुए पंजाब के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल रमीज़ा हकीम ने दलील दी कि मौजूदा मिनी बस ऑपरेटरों द्वारा दायर की गई याचिका नये ऑपरेटरों को बाहर रखने, ग्रामीण यातायात की जुटबंदी और मौजूदा बस ऑपरेटरों का एकाधिकार बनाए रखने की तरकीब के सिवाय और कुछ नहीं था क्योंकि इनमें से बहुत से बस ऑपरेटरों की बसें पिछले 25 सालों से बिना किसी अच्छी प्रतिस्पर्धा के रूट पर चल रही हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने विधानसभा के बजट सैशन के दौरान 5000 मिनी बस परमिट जारी करने का ऐलान किया था, जिसके अनुसार ट्रांसपोर्ट विभाग ने यह परमिट देने संबंधी आवेदनों की माँग के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी किये था। इस प्रक्रिया की शुरुआत मार्च 2020 के शुरू में एक सार्वजनिक मुहिम के जरिये की गई थी।

अगस्त में होगी अगली सुनवाई
सरकार के इस कदम को मौजूदा निजी मिनी बस ऑपरेटरों ने इस आधार पर चुनौती दी थी कि प्रस्तावित नीति अधीन 30 जून 2020 तक मिनी बस परमिट अंधाधुन्ध और बेरोक जारी किये जाएंगे जिससे ग्रामीण ट्रांसपोर्ट मार्केट में भीड़ बढ़ेगी जो राज्य की ट्रांसपोर्ट योजना के लिए परेशानी का संयोग बनेगी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस श्री रंजन गुप्ता और करमजीत सिंह के एक डिवीजऩ बेंच ने की। नये आवेदकों द्वारा दाखिल याचिकाएं मुकम्मल होने के बाद यह मामला अगस्त में अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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