एनजेसीएस यूनियन के एक सुर से बदल सकती है बीएसपी के 5000 कर्मियों की तकदीर

एनजेसीएस यूनियन के एक सुर से बदल सकती है बीएसपी के 5000 कर्मियों की तकदीर
BHILAI

Abdul Salam | Publish: Aug, 08 2019 11:43:57 AM (IST) Bhilai, Durg, Chhattisgarh, India

एनजेसीएस के सदस्य एक स्वर में नोटेशनल सीनियारिटी की बात रखते हैं। तब मसला सुलझा जाएगा, इसका फायदा पांच हजार कर्मियों के साथ बीएसपी प्रबंधन को होगा.

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र के डिप्लोमा इंजीनियर्स पदनाम पर 7 सितंबर 2019 को दिल्ली में बैठक होनी है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के सामने नेशनल ज्वाइंट कमेटी फॉर स्टील (एनजेसीएस) के सभी सदस्य एक स्वर में अगर नोटेशनल सीनियारिटी की बात रखते हैं। तब मसला सुलझा जाएगा। इसका फायदा कर्मचारियों के साथ-साथ प्रबंधन को भी आने वाले समय में होना है।

जागी है नई उम्मीद
भिलाई इस्पात संयंत्र के करीब पांच हजार कर्मचारी डिग्रेडेशन से प्रभावित हैं। एनजेसीएस यूनियन ने पहली बैठक में जिस तरह से एक साथ नोटेशनल सीनियारिटी की बात को प्रबंधन के सामने रखी है। यह इन कर्मियों में नई उम्मीद जगा दी है। इस पहल से ही पीडि़त कर्मचारी यूनियन के करीब आते दिख रहे हैं।

12 साल से उठा रहे नुकसान
बीएसपी ने आईटीआई वालों को एस-3 के स्थान पर एस-1 और डिप्लोमा इंजीनियर्स को एस-6 के जगह एस-3 में भर्ती लेना शुरू किया। जिससे यह कर्मचारी देखते ही देखते पिछड़ते चले गए। अब तक वे करीब 12 साल का नुकसान उठा चुके हैं। एस-3 से एस-4 में पहुंचने के लिए कर्मियों को 4-4 साल का समय लगता है। 3 ग्रेड पीछे धकेल देने से उनको 12 साल तक पीछे कर दिए। बीएसपी में 2003 से डिग्रेडेशन का दौर चल रहा है। इसके बाद 2008 में डिप्लोमा इंजीनियर को एस-6 के स्थान पर एस-3 में ज्वाइनिंग दी गई। बीएसपी के करीब 30 फीसदी कर्मचारी इस समस्या के जद में है।

यूनियन के साथ खड़े हो रहे कर्मचारी
डिग्रेडेशन के विषय को एनजेसीएस में उटाए जाने के बाद से कर्मचारी यूनियन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। वे इस विषय को लेकर अब यूनियन के साथ सड़क पर संघर्ष करने की तैयारी कर रहे हैं।

प्रबंधन को नहीं होगा आर्थिक नुकसान
डिग्रेड किए गए कर्मियों को अगर अपग्रेड किया जाता है, तो प्रबंधन पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। जहां कर्मचारी ग्रेड में पे स्केल 15830 से लेकर 17600 के मध्य ही हैं। ऐसे में करीब 90 फीसदी कर्मचारी इस पे स्केल के दायरे में फिट बैठते हैं। तब इन कर्मियों को अपग्रेड करते हुए उन्हें मूल ग्रेड में पदस्थ करने से उनके बेसिक में कोई परिवर्तन करने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि इसके विपरीत कर्मियों में कंपनी के प्रति समर्पण और मनोबल बढ़ेगा।

5 साल में रिटायर्ड हो रहे 5000 कर्मचारी
बीएसपी से आने वाले पांच साल में करीब पांच हजार कर्मचारी रिकायर्ड हो जाएंगे। उच्च प्रबंधन कॉस्ट कटौती को ध्यान में रखते हुए रिटायर्ड होने वाले कर्मियों के स्थान पर 20 फीसदी ही भर्ती करने की बात कह रहा है। असल में इनती भॢतयां भी प्लांट में नहीं हो रही है।

यह हो सकता है यूनियन का रोड मैप
सभी केंद्रीय यूनियन एक स्वर में अपग्रेडशन की मांग प्रमुखता से करे। स्थानीय स्तर और सभी कर्मियों का सहयोग लेकर प्रबंधन से मीटिंग कर प्रस्ताव तैयार करे। प्रबंधन के सामने इस एकल मुद्दा पर हो चर्चा। प्रबंधन और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के समक्ष यह साफ किए कि इससे कंपनी को होगा फायदा और कोई आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। जरूरत पडऩे पर आंदोलन का रास्ता भी अपना सकता है।

अपग्रेडेशन से संयंत्र को होगा यह फायदा
बीएसपी कर्मियों को उनके मूल ग्रेड में अपग्रेड करने से कंपनी को जहां एक ओर कोई आर्थिक बोझ नहीं उठाना होगा। वहीं इसके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ कंपनी को जरूर मिलेगा। वर्तमान में जब हायर ग्रेड में पदस्थ ज्यादातर कर्मी आने वाले पांच साल में रिटायर हो जाएंगे। तब अधिकारियों और नीचे ग्रेड में काम कर रहे कर्मियों के मध्य की कड़ी खत्म हो जाएगी।

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