बड़ी खबर: CG के 78 निकायों ने बैंकों से कर्जा लेकर 2 अरब 74 करोड़ रुपए किया गबन, अब ऑडिट आपत्ति

प्रदेश के 78 नगरीय निकायों (Urban bodies) के अनाप-शनाप खर्च का मामला प्रकाश में आया है। कई निकायों के अधिकारियों ने नियम विरूद्ध बैंकों से कर्जा लिया और उसमें गबन (defalcation) तक कर डाले हैं। (Bhilai news)

By: Dakshi Sahu

Published: 07 Jul 2019, 11:43 AM IST

भिलाई. प्रदेश के 78 नगरीय निकायों (Urban bodies) के अनाप-शनाप खर्च का मामला प्रकाश में आया है। कई निकायों के अधिकारियों ने नियम विरूद्ध बैंकों से कर्जा लिया और उसमें गबन (defalcation) तक कर डाले हैं। बिना बिल वाउचर के भुगतान कर दिए हैं। सेल्फ चेक, बियरर चेक काटे हैं। बैंकों के एकाउंट से नकद राशि तक निकाली गई है। हिसाब-किताब नहीं मिलने पर स्थानीय निधि संपरीक्षक ने ऑडिट में आपत्ति लगाई है। संबंधित निकायों के अधिकारियों से जवाब मांगा है, लेकिन अनाप-शनाप खर्च की वजह से जवाब देते नहीं बन रहा है। (Bhilai news)

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गबन के 719 मामले लंबित
पांच नगर पालिक निगम (municipal corporation), 4 चार नगर पालिका परिषद और 23 नगर पंचायतों में गबन के 719 मामले लंबित है। यह 2011 से 31 मार्च 2017 के बीच के हैं। मोबाइल टावर के लाइसेंस का नवीनीकरण, तालाबों का ठेका, साइकिल स्टैंड का बकाया और अधिक दर पर सामग्री की खरीदी से संबंधित हैं। 11 निकायों ने विभिन्न 47 बैंकों से कर्जा लिया है, लेकिन निकाय के पास इन बैंकों से समाधान वित्तीय पत्रक नहीं है। संपरीक्षक ने 37 करोड़, 36 लाख 36 हजार के कर्जा के संबंध मेंं आपत्ति की है, लेकिन अब तक कर्ज लेने की वजह नहीं बता पाए हैं। (Bhilai news)

1. अनाप-शनाप खर्च को रोकने के लिए शासन ने अक्टूबर 2015 में प्री ऑडिट की व्यवस्था की। इसके लिए प्रदेश के 168 निकायों को पांच संभाग में विभाजित कर निजी चार्टर्ड एकाउंटेंट को अनुबंध शर्त पर रखा है। इस नई व्यवस्था के निकायों में होने वाले विकास कार्यों का भुगतान से पहले हर बिल का चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑडिट करता है।

2.दूसरा पोस्ट ऑडिट साल में एक बार होता है। इसे शासन की स्थानीय निधि संपरीक्षक के कर्मचारी करते हैं। ऑडिट में बिल का मिलान करते हैं। नियम-अधिनियम और लागत में कम ज्यादा होने पर आपत्ति की जाती है। नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाता है। संतोषजनक जवाब मिलने पर प्रकरण निराकृत कर दिया जाता है।

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दुर्ग में तो वेतन रोक दिए थे
दुर्ग निगम कन्या विवाह योजना, गौरवपथ का निर्माण, 11 एमएलडी फिल्टर प्लांट, महात्मा गांधी स्कूल के कम्प्यूटर फीस सहित अन्य मामले ऑडिट आपत्ति थी। इन आपत्तियों का कई वर्षों से निराकरण नहीं होने पर 2013-14 में तत्कालीन आयुक्त जेपी पाठक ने अधिकारी कर्मचारियों के वेतन रोक दिए थे। इसके बाद कुछ आपत्त्तियों का निराकरण किया गया था।

2013-14 में छावनी, कोहका, डुंडेरा के तालाबों का गहरीकरण पर स्वीकृति से अधिक खर्च, सीसी रोड के निर्माण में अतिरिक्त स्वीकृति, आईएचडीपी आवास, वांबे आवास से कम राजस्व और लक्ष्य से बहुत कम राजस्व वसूली के प्रकरण सहित कुल 34 करोड़ 87 लाख की ऑडिट आपत्ति है। इस संबंध में स्थानीय निधि संपरीक्षक कार्यालय से कई बार नोटिस जारी किया गया। अधिकारियों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। आपत्ति लंबित है। (Bhilai news)

2014-15 के आय-व्यय को लेकर आपत्ति है। 73 लाख 49 हजार 910 रुपए के बिल की हिसाब नहीं मिल रहा है। अब तक आपत्ति का निराकरण नहीं किया है। नपा अहिवारा में 2011-12 में 8, लाख 68 हजार 108 और 2014-15 के बजट में 9 लाख 48 करोड़ 800 रुपए खर्च कहां किया है। इसका बिल प्रस्तुत नहीं किया है।

2011-12, 2013-14 और 2015-16 के खर्च से संबंधित आपत्त्तियों का निराकरण नहीं किया है। 2011-12 में विकास कार्यों पर 79 लाख 90 हजार रुपए अधिक खर्च होना बताया है। 2013-14 में 89 लाख 25 हजार 462 रुपए और 2015-16 में 36 लाख 56 हजार 56 रुपए के बिल का हिसाब नहीं मिल रहा है।

इस तरह की आपत्तियां
1. गबन संबंधी 32 आपत्तियां है। इससे शासन को 39 लाख 83 हजार 770 रुपए आर्थिक नुकसान की आशंका है।
2.नियम विरूद्ध खर्च से संबंधित 480 आपत्तियां है। इनसे 43 करोड़ 95 लाख 02 हजार 227 रुपए अधिक खर्च की बात सामने आई है।
3. भंडार गृह से सामग्री खरीदी की 88 आपत्तियां है। भंडारगृह के बिल के मिलान में 3 करोड़ 67 लाख 76 हजार 322 रुपए का हिसाब नहीं मिला।
4. 47 निकायों ने बैंक से ऋण लिया है। लेकिन उसकी जानकारी स्थानीय निधि संपरीक्षा को नहीं दी है। प्रदेश में इस तरह की 11 आपत्तियां है।
5. 78 नगरीय निकायों में से 12 नगर पंचायत और 2 नगर पालिका परिषद ने बजट ही तैयार नहीं किया है। सदन की स्वीकृति के बिना 70 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं।
6. प्रदेश के 168 निकायों के आय-व्यय, विकास कार्यों के बिल का प्री ऑडिट के लिए शासन ने 2015 में पांच फर्म को अधिकृत किया है, लेकिन फर्म ने किसी अन्य को ठेका पर दे दिया है।
7. शासन की स्वीकृति के बिना निकायों ने मद परिवर्तन कर अन्य कार्यों में खर्च किया है। इसका भी जवाब नहीं दिया है। (Bhilai news)

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