भलाई का जमाना ही नहीं रहा, सिगरेट पीने के लिए माचिस नहीं देना इस युवक को भारी पड़ गया

रविवार को सुबह 8.40 बजे प्रियर्दिशनी परिसर सुपेला के पास एक युवक लूट का शिकार हो गया। लुटेरों ने उसे सिगरेट पीने माचिस मांगने के बहाने रोका और पिटाई शुरू कर दी। जेब में रखे 6315 रुपए नकद लूट लिए।

By: Satya Narayan Shukla

Published: 07 Oct 2018, 10:43 PM IST

भिलाई. रविवार को सुबह 8.40 बजे प्रियर्दिशनी परिसर सुपेला के पास एक युवक लूट का शिकार हो गया। लुटेरों ने उसे सिगरेट पीने माचिस मांगने के बहाने रोका और पिटाई शुरू कर दी। जेब में रखे 6315 रुपए नकद लूट लिए। युवक लुटेरों के चंगुल से छुटकर जैसे-तैसे सुपेला थाना पहुंचा तो वहां पुलिस बजाए उसकी मदद के उलटा उसे ही फटकराने लगा कि सुनसान रास्ते से क्यों आ रहा था? हालांकि बाद में मुलाहिजा कराने के बाद रिपोर्ट दर्ज की।

सुपेला निवासी हेमंत कबीरधाम रजिस्ट्री आफिस में संविदा कार्यरत

सुपेला दक्षिण गंगोत्री निवासी हेमंत गिलहरे बोड़ला कबीरधाम के रजिस्ट्री आफिस में संविदा पर कार्यरत है। रविवार को अवकाश होने की वजह से घर आ रहा था। वह सुबह 6 बजे रायपुर पहुंचा। वहां से लोकल ट्रेन में बैठकर भिलाई नगर रेलवे स्टेशन में सुबह 8.30 बजे उतरा। दक्षिण गंगोत्री सर्कस मैदान के पास घर होने के कारण शार्टकर्ट वह स्टेशन से ट्रैक किनारे होते हुए पैदल घर आ रहा था। तभी प्रियदर्शिनी परिसर के पास ट्रैक किनारे खड़े 18 से 20 साल के दो युवकों ने हेमंत से माचिस मांगा। हेमंत माचिस रखने से इनकार करते हुए आगे बढ़ा ही था कि युवक उसकी ओर लपके। हेमंत ने युवकों को इरादा भांप लिया और भागने की कोशिश की, लेकिन उसका शर्ट लुटेरों के पकड़ में आ गया। हेमंत को पकड़कर पहले हाथ-मुक्के और लात-घूसे से जमकर पिटाई की फिर चाकू अड़ा दिया। इसके बाद जेब में रखे रुपए निकाल लिए। हेमंत ने बताया यह उसका पगार का पैसा था। त्योहार के लिए कुछ खरीदारी करने आ रहा था।
लुटेरों को पकडऩा छोड़, पीडि़त को ही धमकाती रही पुलिस

ऐसे में लूटे जाओगे नहीं तो और क्या होगा?

हेमंत लुटेरों से छूटने के बाद सीधे सुपेला थाना पहुंचा। वहां सामने बैठे ड्यूटी अफसर को घटना की जानकारी दी। उसके चेहरे पर मुक्के से पिटाई के निशान थे। कपड़े फटे हुए थे। बावजूद ड्यूटी अफसर लुटेरों को पकडऩे सक्रियता दिखाने के, हेमंत को ही फटकारने लगे। कहा कि ट्रैक किनारे सूनसान एरिया से क्यों आ रहा था। ऐसे में लूटे जाओगे नहीं तो और क्या होगा?

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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