अभिषेक मिश्रा हत्याकांड : दूसरी बार भी हाजिर नहीं हुए टीआई, नाराज कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

अभिषेक मिश्रा हत्याकांड : दूसरी बार भी हाजिर नहीं हुए टीआई, नाराज कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
अभिषेक मिश्रा हत्याकांड : दूसरी बार भी हाजिर नहीं हुए टीआई, नाराज कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

Satyanarayan Shukla | Updated: 11 Oct 2019, 11:04:48 PM (IST) Bhilai, Durg, Chhattisgarh, India

बहुचर्चित अभिषेक मिश्रा हत्याकांड की सुनवाई में टीआई की लगातार दूसरी बार भी हाजिर नहीं हुए। इस पर कोर्ट की नाराजगी सामने आई। कोर्ट ने गवाह टीआई से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही यह भी कहा है कि न्यायालय के आदेश का पालन न करने पर अवमानना का प्रकरण दर्ज कर उनके खिलाफ क्यों न कार्रवाई की जाए।

भिलाई@Patrika. बहुचर्चित अभिषेक मिश्रा हत्याकांड की सुनवाई में टीआई की लगातार दूसरी बार भी हाजिर नहीं हुए। इस पर कोर्ट की नाराजगी सामने आई। कोर्ट ने गवाह टीआई से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही यह भी कहा है कि न्यायालय के आदेश का पालन न करने पर अवमानना का प्रकरण दर्ज कर उनके खिलाफ क्यों न कार्रवाई की जाए। प्रकरण पर अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

तत्कालीन पुलगांव टीआई नरेश पटेल का प्रतिपरीक्षण
अभिषेक हत्याकांड पर न्यायाधीश जीके मिश्रा की अदालत में सुनवाई चल रही है। इसमें गवाह तत्कालीन पुलगांव टीआई नरेश पटेल का प्रतिपरीक्षण किया जाना है। इसके लिए न्यायालय ने 11 अक्टूबर की तिथि तय की थी, लेकिन टीआई नरेश पटेल उपस्थित नहीं हुए। इससे पूर्व पटेल स्वास्थ्यगत कारणों का हवाला देते हुए उपस्थित नहीं हुए थे। इस पर अदालत ने प्रतिपरीक्षण के लिए11 अक्टूबर की तिथि तय करते हुए 3 अक्टूबर को उपस्थिति का समंस जारी किया था, लेकिन 10 अक्टूबर तक समंस की तामिली नहीं हो पाई। इसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया और कहा कि इस संबंध में टीआई से स्पष्टीकरण मांगा जाए कि क्यों न उनके खिलाफ आदेश का पालन न करने के संबंध में अवमानना का प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाए। मामले में सुनवाई के लिए राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुरेश चंद्र मिश्रा, प्रार्थी निशांत त्रिपाठी की ओर से राजकुमार तिवारी और बचाव पक्ष की ओर से उमाभारती साहू व बीपी सिंह उपस्थित थे।

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सरकारी वकील की तय की जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान शासन के वकील ने पुन: साक्ष्य के लिए अवसर दिए जाने की अपील अदालत से की। इस पर बचाव पक्ष ने शासन के वकील द्वारा जान बूझकर मामले के निराकरण में विलंब करने की बात कही और बचाव पक्ष ने साक्ष्य के लिए पुन: अवसर दिए जाने पर आपत्ति की। दोनों पक्षो को सुनने के बाद न्यायाधीश ने शासन के वकील की जिम्मेदारी तय की कि वे अपनी जवाबदारी पर गवाह को आगामी तिथि पर उपस्थित रखें। सरकारी वकील पर गवाह को उपस्थित रखने की जवाबदारी तय करते हुए अदालत ने चेतावनी भी दी कि तय तिथि को साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने पर अभियोजन साक्ष्य का मौका समाप्त कर दिया जाएगा। जिसके लिएएसपी व विशेष लोक अभियोजक जिम्मेदार होंगे।

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