scriptAfter 53days,the district hospital gave mental retardation certificate | 53 दिनों बाद जिला अस्पताल, Durg ने जारी किया मानसिक मंदता प्रमाण पत्र | Patrika News

53 दिनों बाद जिला अस्पताल, Durg ने जारी किया मानसिक मंदता प्रमाण पत्र

दिव्यांग की मां ने कहा शुक्रिया,

भिलाई

Updated: May 17, 2022 11:20:55 pm

भिलाई. जिला अस्पताल, दुर्ग में दिव्यांग के मानसिक मंदता प्रमाण पत्र के लिए चक्कर लगा रही मां के हाथ में 53 वें दिन प्रमाण पत्र थमा दिया गया। अस्पताल में चक्कर लगाने से उनको राहत मिली और पीडि़ता ने सीएमएचओ, दुर्ग, डॉक्टर जेपी मेश्राम, सीएस, दुर्ग डॉक्टर वाईके शर्मा व आरएमओ दुर्ग डॉक्टर अखिलेश यादव को इसके लिए शुक्रिया कहा।

53 दिनों बाद जिला अस्पताल, Durg ने जारी किया मानसिक मंदता प्रमाण पत्र
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पुणे के स्कूल में करना है दाखिल
पीडि़त मां अपने बेटे को जल्द से जल्द पुणे के स्कूल में दाखिल करना चाहती हैं। इस वजह से बच्चे का यह प्रमाण पत्र जल्द बनवाने कोशिश कर रही थी। यहां से उनको पहले चिकित्सक छुट्टी पर होने की बात कहकर चक्कर लगाना पड़ा। इसके बाद मेकाहारा, रायपुर जाकर जांच कराने के नाम पर लौटाया गया।

दुर्ग से बेहतर जांच मेकाहारा में
जिला अस्पताल, दुर्ग में दिव्यांग का डॉक्टर रेणू अग्रवाल ने आईक्यू असेसमेंट करीब 3 घंटे तक किया। इसके बाद उन्होंने आईक्यू-46 लिखा। बच्चे को लेकर मां कमरा नंबर-9 में पहुंची तो जांच रिपोर्ट देखने के बाद मौजूद चिकित्सक ने कहा कि फिर से जाकर आईक्यू असेसमेंट करवाओ। इस पर पीडि़ता ने कहा अभी तो जांच करवाए हैं, फिर से जांच करवाने बोल रहे हैं। इसके बाद लंबे समय तक पीडि़ता बच्चे को लेकर अस्पताल का चक्कर लगाती रही। आखिर में चिकित्सक ने लिख दिया कि मेकाहारा, रायपुर में जांच करवाओं। इससे साफ है कि रायपुर में जांच जिला अस्पताल, दुर्ग से बेहतर हो रहा है। मेकाहारा, रायपुर की तरह दुर्ग को भी आईक्यू जांच मामले में अपग्रेड किया जाना चाहिए। जांच का जो एक्यूपमेंट नहीं है, उसे लाने की जरूरत है।

क्यों जरूरी है बौद्धिक अक्षमता प्रमाण पत्र
पीडि़त मां ने बताया कि बच्चे को पुणे के स्कूल में दाखिल कर रही हैं। पहले से ही सीपी प्रमाण पत्र बना हुआ है। बेटे को झटका बीच-बीच में आता था, जिससे धीरे-धीरे बौद्धिक अक्षमता भी हो गई है। इस तरह के बच्चों के लिए स्कूल में देख-रेख अलग तरह से होती है। अगर खाली दिव्यांग है तो उसके लिए देख-रेख अलग होती है। यह प्रमाण पत्र इस वजह से इस तरह के बच्चों के लिए जारी किया जाता है।

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