छत्तीसगढ़ के युवा कलाकार की कलाकृतियों की "लंदन" में ऑन लाइन लगी प्रदर्शनी

लॉकडाउन में मजदूरों से जड़े विषय पर बनाया मार्मिक चित्र.

By: Abdul Salam

Updated: 24 May 2020, 12:54 AM IST

भिलाई. लंदन के एयर गैलरी में इन दिनों सोल सीरिज की कलाकृतियों की ऑन लाइन प्रदर्शन लगाई गई है। कोरोना वायरस की वजह से गैलेरी आम लोगों के लिए बंद है। तब वर्चुअल प्रदर्शनी लगाई गई है। जिसमे दुर्ग में रहने वाले युवा कलाकार तुषार वाघेला की कलाकृतियों का चयन किया गया। यह प्रदर्शनी लंदन में 7 मई से शुरू हुई है और 14 जून 2020 तक जारी रहेगी। इसे ऑन लाइन वेब साईट पर भी देखा जा सकता है।

लॉकडाउन में लौट रहे मजदूरों का दर्द
प्रदर्शनी में जिन कलाकृतियों को रखा गया है। उनकी मूल अवधारणा यह है कि एक श्रमिक या कामगार के लिए उनके औजार अति महत्वपूर्ण होते हैं। यह उसके लिए महज एक वस्तु नहीं बल्कि जागृत है, जीवंत जैसे उसने ही अपने इन औजारों में प्राण फूंक कर इनकी प्राण प्रतिष्ठा की हो। तभी तो शायद विश्वकर्मा पूजा के दिन औजारों की या विजयादशमी के दिन शस्त्रों की पूजा की जाती है। वह लॉकडाउन के दौरान घर लौटते समय में भी इन औजारों को पैदल चलते हुए कभी अपने सिर तो कभी अपने हाथ में ले लेता है। इन औजारों से उसका लगाव छुपाए नहीं छुपता।

इस तरह से तैयार किया है चित्रों को
कलाकार ने बताया कि उसने प्रस्तुत सीरिज में असली एक्स-रे का उपयोग किया गया है। इन डिजिटल एक्स-रे से लिए गए चित्रों को वापस कंप्यूटर के माध्यम से एडिट कर म्यूजियम क्वालिटी पेपर पर पिगमेंट इंक से प्रिंट लिया गया है।

नजर आ रहे दृश्य के पीछे की हकीकत बयान करते चित्र
गैलरी में प्रदर्शित कलाकृति में से एक बनाना रिपब्लिक है बनाना रिपब्लिक शब्द का उपयोग मध्य अमरीकी देशो के लिए किया गया था। इसका अर्थ होता है राजनैतिक और आर्थिक रूप से अस्थिर, भ्रष्ट राष्ट्र इस चित्र में एक दो व्यक्ति जो एक दूसरे का चुम्बन ले रहें है, चित्र में उनका एक्सरे है, जिनमें से एक के दंतैल नुकीले दांत हैं, उसने गांधी टोपी पहनी है तथा दूसरा एक ब्युरोकेट है, जिसके सिर पर सैनिक वाली टोपी है।

भारत के रुपए की हड्डियां किस तरह टूट रही
कोरोना वायरस से पूरे विश्व में महामारी का आलम है। इस दौर में भारत के रुपए को इस प्रदर्शनी में दर्शाया गया है। जिसमें देश का रुपए रोज टूटता जा रहा है। इस कलाकृति में रुपए की टूटी हड्डियां साफ दिखाई देती है।

मजदूरों के औजार पर इस वजह से गया ध्यान
कलाकार ने बताया कि यह कलाकृति उसके बेहद करीब है। वह बचपन से ही चित्रकारी कर रहा है। अब इस क्षेत्र में काम करते हुए करीब 24 साल हो रहे हैं। एक ब्रश और चित्रकार का कितना गहरा संबंध होता है, यह वह खुद बेहद अच्छे से जानता है। इसी तरह से मजदूर भी अपने औजार को लेकर बहुत ज्यादा संवेदनशील होता है। उसके पुराने औजार उस मजदूर के लिए जीवन्त है जैसे इनमें कोई प्राण हो।

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