एशिया के सबसे बड़े स्टील प्लांट बीएसपी की साख कर्मियों के हाथ

एशिया के सबसे बड़े स्टील प्लांट बीएसपी की साख कर्मियों के हाथ
BHILAI

Abdul Salam | Publish: Aug, 08 2019 11:32:02 PM (IST) Bhilai, Durg, Chhattisgarh, India

केंद्र सरकार जब घाटे वाले सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में है। तब बीएसपी के कर्मियों को खुद अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी.

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र की साख दांव पर है। कॉर्पोरेट ऑफिस ने एनवल बिजनेस प्लान के तहत अलग-अलग माह में हॉट मेटल के उत्पादन का लक्ष्य तय किए हैं। वित्त वर्ष 2019-20 के चार माह के दौरान किसी भी माह में बीएसपी उस टारगेट के करीब तक नहीं पहुंचा है। डेली रिवार्ड स्कीम (डीआर स्कीम) के सहारे पहले उम्मीद से ज्यादा उत्पादन प्रबंधन कर्मियों से ले लिया करता था। वर्तमान प्रबंधन इस तरह की कोई योजना तक नहीं बनाया है। इन हालात में क्षमता से अधिक उत्पादन करने वाले रिकार्ड की ओर लौटना आसान नहीं है।

कर्मियों की बढ़ गई जिम्मेदारी
केंद्र सरकार जब घाटे वाले सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में फटाफट सौंपने की तैयारी में है। तब बीएसपी के कर्मियों को खुद अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। पिछले चार माह में बीएसपी अपने टारगेट से 3,40,545 टन पिछड़ चुका है। चार माह में 19,545,000 टन हॉट मेटल का उत्पादन करना था। इसके विपरीत 15,74,455 टन ही उत्पादन किए हैं।

बीएसपी के दो फर्नेस मेंटनेंस में
भिलाई इस्पात संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेस-४, ५ कैपिटल रिपेयर में है। जिसकी वजह से हॉट मेटल का उत्पादन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रहा है। पिछला वित्त वर्ष में गैस हादसे की वजह से उत्पादन के मामले में प्रबंधन नुकसान में रहा था। इस वित्त वर्ष में दो-दो फर्नेस का बंद रहना दिक्कत खड़ी कर रहा है।

पचास फीसदी उत्पादन ब्लास्ट फर्नेस-8 से
बीएसपी के ब्लास्ट फर्नेस-8 से करीब 50 फीसदी हॉट मेटल का उत्पादन किया जा रहा है। शेष फर्नेस मिलकर 50 फीसदी हॉट मेटल का उत्पादन कर रहे हैं। हालात ऐसे ही रहे तो बीएसपी भी घाटे में चला जाएगा। इसका नुकसान कर्मियों को भी आगे जाकर उठाना पड़ सकता है। यूनियन नेता बार-बार निजीकरण के खिलाफ सड़क पर आ रहे हैं, लेकिन बीएसपी के उत्पादन के लय को वापस लाने मुहीम चलाने की बात कोई नहीं कर रहा।

प्रबंधन के सामने यह है विकल्प
बीएसपी प्रबंधन अगर ब्लास्ट फर्नेस-4 व 5 को जल्द शुरू कर देता है, तो हॉट मेटल का उत्पादन टारगेट के समीप पहुंच जाएगा। दोनों मिलकर प्रतिदिन 5,000 टन हॉट मेटल का उत्पादन कर सकते हैं। इस तरह माह में करीब 1.5 लाख टन हॉट मेटल का उत्पादन बढ़ जाएगा। दूसरा तरीका विभागों को डीआर स्कीम देकर प्रोत्साहित करना है। यह तरीका भी अब तक कारगर रहा है।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned